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Sonebhadra News: ध्रुव, प्रह्लाद और गजेंद्र मोक्ष का प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
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रॉबर्ट्सगंज रामजानकी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में पुजन अर्चन करते श्रद्धालु। स्रोत आयोजक
रॉबर्ट्सगंज नगर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे। वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य मनोहर कृष्ण महाराज ने ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष एवं वामन अवतार की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथाव्यास ने कहा कि ध्रुव ने मात्र साढ़े पांच वर्ष की आयु में कठोर तपस्या कर भगवान की कृपा प्राप्त की थी। उनके जीवन से यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर की भक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। सच्ची श्रद्धा, समर्पण और दृढ़ संकल्प से भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। इससे यह संदेश मिलता है कि सच्चे भक्त को भक्ति मार्ग से कोई डिगा नहीं सकता।
वहीं गजेंद्र मोक्ष प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि संकट की घड़ी में जब सभी सहारे छूट जाते हैं, तब भगवान अपने भक्त की रक्षा के लिए स्वयं उपस्थित होते हैं। कथा के दौरान वामन अवतार की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई। संवाद
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कथाव्यास ने कहा कि ध्रुव ने मात्र साढ़े पांच वर्ष की आयु में कठोर तपस्या कर भगवान की कृपा प्राप्त की थी। उनके जीवन से यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर की भक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। सच्ची श्रद्धा, समर्पण और दृढ़ संकल्प से भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। इससे यह संदेश मिलता है कि सच्चे भक्त को भक्ति मार्ग से कोई डिगा नहीं सकता।
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वहीं गजेंद्र मोक्ष प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि संकट की घड़ी में जब सभी सहारे छूट जाते हैं, तब भगवान अपने भक्त की रक्षा के लिए स्वयं उपस्थित होते हैं। कथा के दौरान वामन अवतार की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई। संवाद
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