{"_id":"5f9af2ef8ebc3e9bc202ca64","slug":"destitute-nishu-showed-encouragement-became-a-role-model-sonbhadra-news-vns555495339","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेसहारा नीशू ने दिखाया हौसला, बनी रोल माडल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेसहारा नीशू ने दिखाया हौसला, बनी रोल माडल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनभद्र। इरादे मजबूत हों तो मुश्किल राह भी आसान हो जाती है। इसे साबित कर दिखाया राबर्ट्सगंज इलाके के निपराज गांव की नीशू ने। उसने बालिका संरक्षण गृह के सहारे न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की बल्कि खुद के पैरों पर खड़ी होकर दूसरों के लिए भी नजीर बन गई। विपरीत हालात में भी उसके बुलंद हौसले को देखते हुए जिला प्रशासन ने उसे मिशन शक्ति का रोल माडल चुना है।
नीशू जब 14 वर्ष की थी तो मां का साया उठ गया। पिता दिव्यांग हैं। इसके चलते उसके ऊपर दो छोटे भाइयों की भी जिम्मेदारी आ गई। दादा-दादी ने आगे बढ़कर भाइयों की जिम्मेदारी तो ले ली लेकिन नीशू को उपेक्षित हाल में छोड़ दिया। तब पिता ने कुछ लोगों ने की मदद से उसे जिला मुख्यालय स्थित बालिका संरक्षण गृह में दाखिल कराया, जहां उसने अपने सपनों को उड़ान देते हुए न केवल आगे की पढ़ाई जारी रखी, बल्कि खुद के साथ दूसरों बच्चों का भी ख्याल रख सबकी चहेती बन गई। इसी दौरान उसने सिलाई-कढ़ाई का हुनर भी सीख लिया। जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेंद्र प्रौत्सायन के मुताबिक 18 साल उम्र पूरी होने के कारण उसे अभिभावकों को सौंप दिया जाना था लेकिन दिव्यांग पिता ने उसे अपने पास रख कर भरणपोषण में असमर्थता जताई और संरक्षण गृह में ही रखे जाने की गुजारिश की। स्थिति को देखते हुए संरक्षण गृह के समिति की संस्तुति पर विभाग ने उसी संरक्षण गृह में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी दे दी। अब नीशू संरक्षण गृह में रखकर न सिर्फ बच्चों की देखभाल कर रही है बल्कि रक्षाबंधन के मौके पर बंदियों के लिए राखी, कोराना से जंग के लिए मास्क तैयार कर प्रशासन को मुहैया कराने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नीशू के हौसले को देखते हुए उसे रोल मॉडल चुना गया है।
विज्ञापन
नीशू जब 14 वर्ष की थी तो मां का साया उठ गया। पिता दिव्यांग हैं। इसके चलते उसके ऊपर दो छोटे भाइयों की भी जिम्मेदारी आ गई। दादा-दादी ने आगे बढ़कर भाइयों की जिम्मेदारी तो ले ली लेकिन नीशू को उपेक्षित हाल में छोड़ दिया। तब पिता ने कुछ लोगों ने की मदद से उसे जिला मुख्यालय स्थित बालिका संरक्षण गृह में दाखिल कराया, जहां उसने अपने सपनों को उड़ान देते हुए न केवल आगे की पढ़ाई जारी रखी, बल्कि खुद के साथ दूसरों बच्चों का भी ख्याल रख सबकी चहेती बन गई। इसी दौरान उसने सिलाई-कढ़ाई का हुनर भी सीख लिया। जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेंद्र प्रौत्सायन के मुताबिक 18 साल उम्र पूरी होने के कारण उसे अभिभावकों को सौंप दिया जाना था लेकिन दिव्यांग पिता ने उसे अपने पास रख कर भरणपोषण में असमर्थता जताई और संरक्षण गृह में ही रखे जाने की गुजारिश की। स्थिति को देखते हुए संरक्षण गृह के समिति की संस्तुति पर विभाग ने उसी संरक्षण गृह में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी दे दी। अब नीशू संरक्षण गृह में रखकर न सिर्फ बच्चों की देखभाल कर रही है बल्कि रक्षाबंधन के मौके पर बंदियों के लिए राखी, कोराना से जंग के लिए मास्क तैयार कर प्रशासन को मुहैया कराने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नीशू के हौसले को देखते हुए उसे रोल मॉडल चुना गया है।
विज्ञापन