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निकल गए रुपये, अधूरे रह गए शौचालय
Updated Mon, 03 Jul 2017 11:19 PM IST
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सोनभद्र (खलियारी)। नगवां ब्लॉक के डोरिया ग्राम पंचायत में शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। यहां 110 शौचालयों के निर्माण के लिए निकले रुपये खर्च हो गए लेकिन करीब 30 शौचालयों का निर्माण अभी भी अधूरा है।
ग्राम पंचायत डोरिया में 188 शौचालय निर्माण के लिए आया है। इसमें से 110 शौचालय का धन निकाल लिया गया है। फिलहाल करीब 80 शौचालयों का निर्माण कराया गया है और करीब 30 शौचालयों का निर्माण अधूरे हैं। नगवा मंडल के भाजपा नेता परम सिंह पटेल का आरोप है कि शौचालयों के लिए आए धन से लाभार्थी खुद निर्माण कार्य नहीं करा रहे हैं बल्कि प्रधान अपने मन से सामानों की आपूर्ति कराकर निर्माण करवा रहे हैं। आरोप लगाया कि 110 शौचालय का धन 13 लाख 20 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने प्रधान से शौचालय निर्माण पूरा किए जाने के संबंध में पूछा तो प्रधान धन खत्म होने के बात कह रहे हैं। उधर, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी गोपाल जी ओझा का कहना है कि डोरिया में 110 शौचालयों का पैसा निकला था जिसमें से 85 शौचालय निर्मित हो चुके हैं। शेष अब तक क्यों नहीं बने इसकी जांच कराई जाएगी। प्रधान द्वारा शौचालयों के निर्माण की भी जांच कराएंगे। क्योंकि धनराशि लाभार्थी के खाते में जाती है और उसे ही निर्माण कराना होता है।
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ग्राम पंचायत डोरिया में 188 शौचालय निर्माण के लिए आया है। इसमें से 110 शौचालय का धन निकाल लिया गया है। फिलहाल करीब 80 शौचालयों का निर्माण कराया गया है और करीब 30 शौचालयों का निर्माण अधूरे हैं। नगवा मंडल के भाजपा नेता परम सिंह पटेल का आरोप है कि शौचालयों के लिए आए धन से लाभार्थी खुद निर्माण कार्य नहीं करा रहे हैं बल्कि प्रधान अपने मन से सामानों की आपूर्ति कराकर निर्माण करवा रहे हैं। आरोप लगाया कि 110 शौचालय का धन 13 लाख 20 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने प्रधान से शौचालय निर्माण पूरा किए जाने के संबंध में पूछा तो प्रधान धन खत्म होने के बात कह रहे हैं। उधर, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी गोपाल जी ओझा का कहना है कि डोरिया में 110 शौचालयों का पैसा निकला था जिसमें से 85 शौचालय निर्मित हो चुके हैं। शेष अब तक क्यों नहीं बने इसकी जांच कराई जाएगी। प्रधान द्वारा शौचालयों के निर्माण की भी जांच कराएंगे। क्योंकि धनराशि लाभार्थी के खाते में जाती है और उसे ही निर्माण कराना होता है।
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