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...तो मुख्यमंत्री के जाने के बाद पुल की करेंगे जांच

Fri, 06 Apr 2018 11:12 PM IST
Updated Fri, 06 Apr 2018 11:12 PM IST
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...तो मुख्यमंत्री के जाने के बाद पुल की करेंगे जांच
कोन थानाक्षेत्र के बरहमोरी बालू साइट पर अफसरों की मिलीभगत से अवैध रूप से अस्थाई पुल बनाने की जांच अभी तक नहीं हो सकी है। जिले के अफसर मुख्यमंत्री के आगमन का बहाना बनाकर पुल जांच कराने से कतराते नजर आए। डीएम अमित कुमार सिंह ने जांच तो एसडीएस सदर डॉ अंकुर लाठर ने शिकायत मिलने की बात कही थी। मगर दो दिनों के बाद क्या कार्रवाई हुई यह बताने के लिए कई बार मोबाइल मिलाने के बाद भी अफसरों ने फोन रिसीव नहीं किया। डीएम, एसडीएम डॉ अंकुर लाठर से बात न होने की सूरत में वरिष्ठ खनन अधिकारी एसके दास के मोबाइल पर फोन किया गया तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराएंगे। टीम कब भेजेंगे इसका जवाब वह नहीं दे सके।
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सोनभद्र में अफसर, सिंडिकेट और खनन माफियाओं का गठजोड़ लंबे समय से चलते आ रहा है। बसपा की सरकार में पौंटी चड्ढा तो सपा की सरकार में हरियाणा का छिंकारा और अब भाजपा की सरकार में प्राइवेट लोगों का सिडिकेट का खनन में वर्चस्व है। जिले में हाल ही में तीन बालू की साइटें खुली हैं। इनमें से बरहमोरी बालू साइट पर पाइप डालकर मिट्टी बनाकर अस्थाई रूप से पुल बना दिया गया। एनजीटी और सेंचुरी इलाका होने के बावजूद अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अमर उजाला ने पांच मार्च के अंक में पेज नंबर दो पर नदी में बनाया अस्थाई पुल शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर गठजोड़ का खुलासा किया था।
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इस बारे में पूछे जाने पर जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह का कहना था कि पहले भी पुल बना था। इसी आधार पर बना होगा। फिर उन्होंने जांच कराने की बात कही थी। एसडीएम सदर डॉ अंकुर लाठर से सीयूजी फोन पर बात की गई तो उनका कहना था कि इस मामले की पहले भी उन्हें शिकायत आई है वह जांच कराएंगी।
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इनसेट
जिला पंचायत के अफसरों पर भी बनाया था दबाव
सोनभद्र। बरहमोरी बालू साइड पर अवैध रूप से पाइप डालकर अस्थाई रास्ता बनाने से पहले तीन अफसरों और चार नेताओं ने जिला पंचायत से टेंडर कराकर रास्ता बनाने के लिए दबाव बनाया था। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए तीनों अफसरों ने लखनऊ का हवाला देते हुए रपटा और पुल के लिए तत्काल प्रस्ताव तैयार कराने को कहा था। चूंकि जिला पंचायत को 23 मीटर आरसीसी पुल और 18 मीटर रपटा बनाने का ही अधिकार है। ऐसे नियम का हवाला देते हुए जिला पंचायत ने प्रस्ताव बनाने से इंकार कर दिया था। सूत्रों की माने तो इसके लिए अफसरों फटकार भी लगाई थी।
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