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कोरोना का कहर : इधर बेटी की डोली, उधर पिता की अर्थी उठी, 23 अप्रैल को थी शादी
Sat, 24 Apr 2021 11:07 AM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sat, 24 Apr 2021 11:07 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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बड़े अरमानों से बेटी की डोली विदा करने की तमन्ना जिस पिता ने की थी, वह डोली विदा होते नहीं देख सका। बेटी की दुल्हन के रूप में विदाई के वक्त ही पिता की अर्थी भी उठी।। एक तरफ पिता की अर्थी तो दूसरी तरफ बेटी की डोली उठते देख लोग अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। परिवार के लोगों पर तो मानो दुःखों का पहाड़ सा टूट पड़ा हो। क्या घराती, क्या बराती सभी इस गमगीन माहौल को देख स्तब्ध थे।
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यह हृदय विदारक दृश्य था शनिवार की सुबह सोनभद्र जिला मुख्यालय से करीब छह किमी दूर चुर्क के मुसही चरका टोला की। यहां एक तरफ बेटी की डोली उठ रही थी तो दूसरी तरफ परिवार के लोग पिता की अर्थी उठाने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। दरअसल, चरका टोला निवासी (65) रामप्रवेश यादव अपनी बेटी की शादी मिर्जापुर में तय की थी। तीन-चार दिन पहले तिलकोत्सव में वहां गए थे। वापस आए तभी से तबीयत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। शादी की तिथि 23 अप्रैल यानी शुक्रवार को थी। रात में जब बरात आई तो रामप्रवेश की हालत ज्यादा खराब हो गई। जयमाल की रस्म होते-होते हालत इतनी खराब हुई कि उनकी सांसे थम गईं। मरने से पहले तक वह बेटी के कन्यादान की बात कहते रहे, लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है। किसी तरह से शादी संपन्न हुई, लेकिन सुबह जब लोगों को पता चला तो माहौल गमगीन हो गया।
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