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कोरोना से जंग में महाविद्यालय की छात्राएं बनीं सहभागी
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कोरोना से जंग में महाविद्यालय की छात्राएं बनीं सहभागी
जरूरतमंदों के लिए छात्राओं ने बनाया तीन हजार से अधिक मास्क
संवाद न्यूज एजेंसी
बभनी। जनता महाविद्यालय बभनी में पढ़ रहीं बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की छात्राएं भी वैश्विक महामारी कोरोना से जंग में सहभागी बनी हैं। कोरोना से बचाव करने व जरूरतमंदों में वितरित करने के लिए अब तक तीन हजार मास्क बना चुकी हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है। महाविद्यालय की छात्राएं आरती चौरसिया, मंजूषा, शकुंतला, गुंजा, मीना, चांदनी सहित करीब पचास छात्राएं मास्क बनाने में जुटी हैं। आरती चौरसिया की अगुवाई में महाविद्यालय की करीब पचास छात्राएं मास्क बनाने में लगी हुई हैं। आरती का कहना है कि मास्क का संकट है। दवा की दुकानों पर कहीं लोगों को मास्क नहीं मिल रहा है। ऐसे में लोगों को नि:शुल्क मास्क उपलब्ध हो सके, इसलिए हम कई छात्राओं ने मिलकर मास्क बनाने का निर्णय लिया। अब तक तीन से अधिक मास्क बनाकर जरूरतमंदों में वितरित कर चुकी हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है।
उधर, असनहर गांव की बासमती, अनीता, गुलबस, सुंदरी और शांति आदि महिलाएं अब तक 14 हजार मास्क तैयार कर चुकी हैं। ढाई हजार की आबादी वाले असनहर गांव में 14 स्वयं सहायता समूह हैं। आरती ने बताया कि कोरोना से बचने के लिए जब मेडिकल स्टोरों पर मास्क नहीं मिला तो लाकडाउन में मास्क बनाने का हम लोगों ने यह निर्णय लिया।
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कोरोना से जंग में महाविद्यालय की छात्राएं बनीं सहभागी
जरूरतमंदों के लिए छात्राओं ने बनाया तीन हजार से अधिक मास्क
संवाद न्यूज एजेंसी
बभनी। जनता महाविद्यालय बभनी में पढ़ रहीं बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की छात्राएं भी वैश्विक महामारी कोरोना से जंग में सहभागी बनी हैं। कोरोना से बचाव करने व जरूरतमंदों में वितरित करने के लिए अब तक तीन हजार मास्क बना चुकी हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है। महाविद्यालय की छात्राएं आरती चौरसिया, मंजूषा, शकुंतला, गुंजा, मीना, चांदनी सहित करीब पचास छात्राएं मास्क बनाने में जुटी हैं। आरती चौरसिया की अगुवाई में महाविद्यालय की करीब पचास छात्राएं मास्क बनाने में लगी हुई हैं। आरती का कहना है कि मास्क का संकट है। दवा की दुकानों पर कहीं लोगों को मास्क नहीं मिल रहा है। ऐसे में लोगों को नि:शुल्क मास्क उपलब्ध हो सके, इसलिए हम कई छात्राओं ने मिलकर मास्क बनाने का निर्णय लिया। अब तक तीन से अधिक मास्क बनाकर जरूरतमंदों में वितरित कर चुकी हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है।
उधर, असनहर गांव की बासमती, अनीता, गुलबस, सुंदरी और शांति आदि महिलाएं अब तक 14 हजार मास्क तैयार कर चुकी हैं। ढाई हजार की आबादी वाले असनहर गांव में 14 स्वयं सहायता समूह हैं। आरती ने बताया कि कोरोना से बचने के लिए जब मेडिकल स्टोरों पर मास्क नहीं मिला तो लाकडाउन में मास्क बनाने का हम लोगों ने यह निर्णय लिया।
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