UP: पांच हजार में घूस लेते बाबू अरेस्ट, सरकारी मुलाजिमों में खलबली; लोकायुक्त पुलिस ने की कार्रवाई
Sonbhadra News: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के लिपिक मुन्नालाल वर्मा को रीवा लोकायुक्त पुलिस ने पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने चपरासी श्रवण तिवारी की इंक्रीमेंट फाइल आगे बढ़ाने के लिए सात हजार रुपये मांगे थे। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की।
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UP News: उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग में तैनात एक लिपिक (बाबू) को रीवा लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पर विभागीय कर्मचारी की इंक्रीमेंट संबंधी फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार देवसर परियोजना कार्यालय में चपरासी पद पर कार्यरत श्रवण तिवारी को अपने इंक्रीमेंट के भुगतान के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी करानी थी। इसके लिए उन्होंने संबंधित फाइल आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। आरोप है कि आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ लिपिक मुन्नालाल वर्मा ने फाइल को आगे बढ़ाने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के एवज में सात हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
रिश्वत की मांग से परेशान श्रवण तिवारी ने 25 मई को रीवा लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया और पूरी कार्रवाई की योजना तैयार की।
शनिवार दोपहर लोकायुक्त टीम ने एनटीपीसी विंध्याचल के यमुना भवन स्थित कार्यालय के आसपास निगरानी शुरू कर दी। तय योजना के अनुसार जैसे ही आरोपी मुन्नालाल वर्मा ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में पांच हजार रुपये स्वीकार किए, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। टीम ने मौके पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई की खबर मिलते ही विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों में खलबली मच गई। कार्यालय में मौजूद लोग भी अचानक हुई कार्रवाई को लेकर चर्चा करते रहे। अधिकारियों ने आरोपी के कब्जे से बरामद राशि और अन्य साक्ष्यों को अपने कब्जे में ले लिया है।
लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच भी की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।