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Sonebhadra News: बिजली की खपत बढ़ी तो सौर ऊर्जा की तरफ हुआ रुझान
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सोनभद्र। बिजली की दरों में वृद्धि और बढ़ती खपत को देखते हुए सौर ऊर्जा की ओर उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ा है। लोग घरों की छतों पर सोलर संयंत्र लगाकर बिजली के बोझ से राहत पाने की जुगत में जुटे हैं। पिछले एक साल में 398 घरों पर सोलर संयंत्र लगाए गए हैं, जबकि 1407 स्थानों पर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया चल रही है। पीएम सूर्य घर योजना से मिल रही सब्सिडी भी उपभोक्ताओं को इस ओर आकर्षित कर रही है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को इस्तेमाल में लाने पर जोर दे रही है। इसी के तहत पीएम सूर्य घर योजना की शुरुआत वर्ष 2024 में की गई थी। इस योजना के माध्यम से जिले में वर्ष 2027 तक दस हजार घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य है, जबकि एक साल में ही आवेदन 25 हजार से ज्यादा आ चुके हैं। विभाग इनके सत्यापन के बाद संयंत्र लगाने की प्रक्रिया में जुटा है। अब तक 398 घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए हैं। वहीं 1407 घरों पर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इसे भी मई तक पूरा होने का अनुमान है। विभागीय अफसरों के मुताबिक बिजली के दाम में लगातार हो रही वृद्धि, निजीकरण और बढ़ती खपत के कारण लोग सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को तरजीह दे रहे हैं। सबसे ज्यादा नगरीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं। बिजली निगम के रॉबर्ट्सगंज डिविजन में ही अब तक 280 घरों पर संयंत्र लगाया गया है। हर्ष सिंह ने बताया कि ऑन ग्रिड सिस्टम होने के चलते उपभोक्ताओं के घर सौर ऊर्जा से जितनी बिजली बनेगी, उतनी यूनिट का बिल उन्हें कम देना होगा। ज्यादातर संयंत्र तीन किलोवाट के ही लगाए जा रहे हैं। इससे प्रतिदिन 13-15 यूनिट तक बिजली तैयार होती है। उपभोक्ता 60-70 प्रतिशत तक बिजली बिल बचा सकते हैं।
60 फीसदी तक मिल रही सब्सिडी
घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर पीएम सूर्य घर के तहत उपभोक्ताओं को सरकार सब्सिडी भी दे रही है। यह कुल लागत का 55 से 60 फीसदी तक है। एक किलोवाट के संयंत्र पर खर्च 75 हजार तक है, जिस पर 45 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। इसी तरह दो किलोवाट पर 1.30 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसमें 90 हजार की सब्सिडी है। तीन किलोवाट या इससे ज्यादा क्षमता वाले संयंत्र पर अधिकतम 1.08 लाख रुपये सब्सिडी स्वीकृत है।
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पीएम सूर्य घर योजना की ओर उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ा है। पिछले एक साल में 398 घरों पर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। अभी ज्यादातर उपभोक्ता नगरीय क्षेत्रों से ही आ रहे हैं। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी, ग्रामीण इलाकों से भी लोग इससे जुड़ेंगे। बिजली का खर्च कम करने में यह योजना बेहद उपयोगी है। -प्रेमशंकर सिंह, परियोजना अधिकारी नेडा।
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पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को इस्तेमाल में लाने पर जोर दे रही है। इसी के तहत पीएम सूर्य घर योजना की शुरुआत वर्ष 2024 में की गई थी। इस योजना के माध्यम से जिले में वर्ष 2027 तक दस हजार घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य है, जबकि एक साल में ही आवेदन 25 हजार से ज्यादा आ चुके हैं। विभाग इनके सत्यापन के बाद संयंत्र लगाने की प्रक्रिया में जुटा है। अब तक 398 घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए हैं। वहीं 1407 घरों पर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इसे भी मई तक पूरा होने का अनुमान है। विभागीय अफसरों के मुताबिक बिजली के दाम में लगातार हो रही वृद्धि, निजीकरण और बढ़ती खपत के कारण लोग सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को तरजीह दे रहे हैं। सबसे ज्यादा नगरीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं। बिजली निगम के रॉबर्ट्सगंज डिविजन में ही अब तक 280 घरों पर संयंत्र लगाया गया है। हर्ष सिंह ने बताया कि ऑन ग्रिड सिस्टम होने के चलते उपभोक्ताओं के घर सौर ऊर्जा से जितनी बिजली बनेगी, उतनी यूनिट का बिल उन्हें कम देना होगा। ज्यादातर संयंत्र तीन किलोवाट के ही लगाए जा रहे हैं। इससे प्रतिदिन 13-15 यूनिट तक बिजली तैयार होती है। उपभोक्ता 60-70 प्रतिशत तक बिजली बिल बचा सकते हैं।
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60 फीसदी तक मिल रही सब्सिडी
घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर पीएम सूर्य घर के तहत उपभोक्ताओं को सरकार सब्सिडी भी दे रही है। यह कुल लागत का 55 से 60 फीसदी तक है। एक किलोवाट के संयंत्र पर खर्च 75 हजार तक है, जिस पर 45 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। इसी तरह दो किलोवाट पर 1.30 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसमें 90 हजार की सब्सिडी है। तीन किलोवाट या इससे ज्यादा क्षमता वाले संयंत्र पर अधिकतम 1.08 लाख रुपये सब्सिडी स्वीकृत है।
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पीएम सूर्य घर योजना की ओर उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ा है। पिछले एक साल में 398 घरों पर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। अभी ज्यादातर उपभोक्ता नगरीय क्षेत्रों से ही आ रहे हैं। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी, ग्रामीण इलाकों से भी लोग इससे जुड़ेंगे। बिजली का खर्च कम करने में यह योजना बेहद उपयोगी है। -प्रेमशंकर सिंह, परियोजना अधिकारी नेडा।