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Sonebhadra News: नशे का इंजेक्शन बांट रहा एचआईवी, रॉबर्ट्सगंज बना हाॅट स्पॉट
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अभी तक नशा सिर्फ पारिवारिक और सामाजिक जिंदगी बर्बाद कर रहा था। अब यह एड्स जैसी जानलेवा बीमारी का भी कारण बनने लगा है। आंकड़े बताते हैं कि महज तीन सालों में नशे का इंजेक्शन लेने वाले 85 व्यक्तियों में एचआईवी की पुष्टि हुई है। इस तरह के सबसे ज्यादा मरीज जिला मुख्यालय क्षेत्र में है। जहां छह ब्लॉकों में कुल 85 मरीज हैं, वहीं महज सदर ब्लॉक में इनकी संख्या 55 पहुंच गई है। स्थिति को देखते हुए नशे के लती 365 व्यक्तियों की निगरानी भी की जा रही है। कहा जा रहा है महज सदर ब्लॉक में फिलहाल 650 से अधिक व्यक्ति रोजाना नशे के लिए इंजेक्शन का प्रयोग करने में लगे हुए हैं।
आंकड़े बताते हैं कि नशे के इंजेक्शन के जरिये वर्ष 2023-24 में 35, वर्ष 2024-25 में 26, वर्ष 2025-26 में 24 और मौजूदा वित्तीय वर्ष में अगस्त तक 10 व्यक्तियों को एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है। ब्लॉकवार आंकड़ों पर नजर डालें तो नशे के जरिए एचआईवी के मरीज बनने वालों की संख्या सबसे अधिक रॉबर्ट्सगंज (सदर) ब्लॉक में 55 है। दूसरे नंबर पर म्योरपुर ब्लॉक है। यहां इस तरह के 11 मरीज पाए गए हैं। चतरा ब्लॉक में नौ, चोपन ब्लॉक में आठ, दुद्धी और घोरावल ब्लॉक में पांच-पांच मरीज नशे के इंजेक्शन के जरिए संक्रमित हुए हैं। नगवां, बभनी, करमा और कोन ब्लॉक में कोई प्रभावित नहीं पाया गया है। अब तक के जो आंकड़े हैं। वह साढ़े तीन साल से भी कम समय और ज्यादातर मुख्यालय एरिया के हैं। पूरे जिले में इस तरह का अभियान इसमें और इजाफा करता दिखाई दे सकता है।
जिले में अब तक पाए जा चुके हैं एचआईवी के 1787 संक्रमित
गत 31 अगस्त तक जिले में एचआईवी के कुल 1787 संक्रमित पाए जा चुके हैं। इसके फैलाव को जो हालिया ट्रेंड सामने आया है। उसमें सबसे खतरनाक स्थिति नशे के इंजेक्शन की है।। हाई रिस्क वाले आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से अगस्त के बीच महिला से संबंध के कारण दो, इंजेक्शन से 10, अप्राकृतिक यौन संबंध से दो और ट्रकर्स संक्रमण के नौ मामले सामने आए। वर्ष वार आंकड़ों पर ध्यान दें तो 2024-25 में 265, 2025-26 में 204, 2026-27 में पहली अप्रैल से 31 अगस्त तक 147 एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।
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नशे के लती इस तरह आ रहे संक्रमण की चपेट में :
नशे के लती युवाओं में ज्यादातर मजदूर और मध्यवर्गीय तबके के हैं। कम पैसे में नशे की लत पूरी करने के लिए कहीं से एक पुड़िया हेरोइन खरीदी जाती है। इसके बाद कुछ मेडिकल स्टोर पर ऊंची कीमत पर मिलने वाले एविल वाॅयल और फोर्टविन इंजेक्शन को खरीदकर नशे की पांच से 10 एमएल की डोज तैयार की जाती है। इसके बाद एक ही सीरिंज से तीन से चार, कहीं चार से पांच युवक सीधे नसों में नशे की खुराक ले लेते हैं। अगर इसमें कोई एचआईवी संक्रमित है तो बड़ी ही आसानी से उसका संक्रमण दूसरे में पहुंच जाता है।
सामने आ चुकी है इंजेक्शन की असुरक्षित बिक्री :
इंजेक्शन की असुरक्षित बिक्री कई बार सामने आ चुकी है। पिछले माह ओबरा में मेडिकल स्टोर की आड़ में हेरोइन बेचने का मामला तो पकड़ा ही गया था। दिसंबर 2025 में अखिलेश यादव उर्फ कन्हैया की हत्या के पीछे भी नशे का इंजेक्शन ही सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने नशे के खिलाफ मुहिम भी चलाई लेकिन नशेड़ियों को बगैर डॉक्टर की पर्ची के एविल व फोर्नविट थमाने वाले दावा दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।
एचआईवी से डरने की जरूरत नहीं है। सही समय पर पहचान और सही उपचार से कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। बचाव के लिए सुरक्षित यौन संबंध और हमेशा नए सुई (सीरिंज) का इस्तेमाल करें। यौन साथी के प्रति वफादार रहें। कंडोम का इस्तेमाल करें। जब भी अत्यधिक वजन गिरने, बार-बार दस्त, रात को पसीना, लगातार बुखार-गंभीर संक्रमण की स्थिति दिखे तो आईसीटीसी सेंटर पहुंचकर एचआईवी की जांच कराएं। जांच-परामर्श, उपचार पूरी तरह निशुल्क है। किसी की पहचान-गोपनीयता उजागर नहीं की जाती। -सुनील कुमार श्रीवास्तव, परामर्शदाता एआरटी सेंटर मेडिकल कॉलेज।
हाई रिस्क वाले 375 महिला सेक्स वर्कर, नशा इंजेक्शन वाले 385 और ट्रांसजेंडर ग्रुप के 152 व्यक्तियों से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए उन्हें जागरूक रखने और समय-समय जांच पर का क्रम जारी है। इसमें जो लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं उन्हें उपचार व स्वस्थ जिंदगी जीने में भी मदद दी जा रही है। -शिवशंकर सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक, लक्षित हस्तक्षेप परियोजना।
नशे के इंजेक्शन के जरिये एचआईवी का प्रसार न होने पाए इसके लिए लगातार जागरूकता-काउंसिलिंग जारी है। ऐसे व्यक्तियों को नशे की लत से बचाने के लिए ओएसटी सेंटर की भी मदद ली जा रही है। - डॉ. कीर्ति आजाद बिंद, जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी।
सूखे नशे (अफीम, हेरोइन, स्मैक) से बर्बाद हो रहे युवाओं को नई जिंदगी देने के लिए ओएसटी सेंटर लगातार काम कर रहा है। लोगों से अपील है कि उनके घर, आस-पास कोई भी व्यक्ति नशे से पीड़ित है तो उसे ओएसटी सेंटर पहुंचाएं। - प्रो. आनंद कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।
ऐसी स्थिति वास्तव में चिंता का विषय है। बगैर डॉक्टर पर्ची के एविल या फोर्टविन उपलब्ध कराने वाले दवा दुकानदारों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। - मुकेश पालीवाल, उपायुक्त ड्रग।
नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई-जागरूकता का क्रम जारी है। नशे के लिए बगैर डॉक्टर पर्ची के इंजेक्शन उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा। - अनिल कुमार, एएसपी/नोडल जिला एड्स प्रोग्राम।
नशे के लिए इंजेक्शन कहां से मिल रहा है, इसके कितने हॉट स्पॉट हैं, इसकी जानकारी की जाएगी। बगैर डॉक्टर की पर्ची के किसी भी व्यक्ति को एविल-फोर्टविन जैसे इंजेक्शन न मिलने पाएं, इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। - चर्चित गौड़, डीएम।
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आंकड़े बताते हैं कि नशे के इंजेक्शन के जरिये वर्ष 2023-24 में 35, वर्ष 2024-25 में 26, वर्ष 2025-26 में 24 और मौजूदा वित्तीय वर्ष में अगस्त तक 10 व्यक्तियों को एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है। ब्लॉकवार आंकड़ों पर नजर डालें तो नशे के जरिए एचआईवी के मरीज बनने वालों की संख्या सबसे अधिक रॉबर्ट्सगंज (सदर) ब्लॉक में 55 है। दूसरे नंबर पर म्योरपुर ब्लॉक है। यहां इस तरह के 11 मरीज पाए गए हैं। चतरा ब्लॉक में नौ, चोपन ब्लॉक में आठ, दुद्धी और घोरावल ब्लॉक में पांच-पांच मरीज नशे के इंजेक्शन के जरिए संक्रमित हुए हैं। नगवां, बभनी, करमा और कोन ब्लॉक में कोई प्रभावित नहीं पाया गया है। अब तक के जो आंकड़े हैं। वह साढ़े तीन साल से भी कम समय और ज्यादातर मुख्यालय एरिया के हैं। पूरे जिले में इस तरह का अभियान इसमें और इजाफा करता दिखाई दे सकता है।
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जिले में अब तक पाए जा चुके हैं एचआईवी के 1787 संक्रमित
गत 31 अगस्त तक जिले में एचआईवी के कुल 1787 संक्रमित पाए जा चुके हैं। इसके फैलाव को जो हालिया ट्रेंड सामने आया है। उसमें सबसे खतरनाक स्थिति नशे के इंजेक्शन की है।। हाई रिस्क वाले आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से अगस्त के बीच महिला से संबंध के कारण दो, इंजेक्शन से 10, अप्राकृतिक यौन संबंध से दो और ट्रकर्स संक्रमण के नौ मामले सामने आए। वर्ष वार आंकड़ों पर ध्यान दें तो 2024-25 में 265, 2025-26 में 204, 2026-27 में पहली अप्रैल से 31 अगस्त तक 147 एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।
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नशे के लती इस तरह आ रहे संक्रमण की चपेट में :
नशे के लती युवाओं में ज्यादातर मजदूर और मध्यवर्गीय तबके के हैं। कम पैसे में नशे की लत पूरी करने के लिए कहीं से एक पुड़िया हेरोइन खरीदी जाती है। इसके बाद कुछ मेडिकल स्टोर पर ऊंची कीमत पर मिलने वाले एविल वाॅयल और फोर्टविन इंजेक्शन को खरीदकर नशे की पांच से 10 एमएल की डोज तैयार की जाती है। इसके बाद एक ही सीरिंज से तीन से चार, कहीं चार से पांच युवक सीधे नसों में नशे की खुराक ले लेते हैं। अगर इसमें कोई एचआईवी संक्रमित है तो बड़ी ही आसानी से उसका संक्रमण दूसरे में पहुंच जाता है।
सामने आ चुकी है इंजेक्शन की असुरक्षित बिक्री :
इंजेक्शन की असुरक्षित बिक्री कई बार सामने आ चुकी है। पिछले माह ओबरा में मेडिकल स्टोर की आड़ में हेरोइन बेचने का मामला तो पकड़ा ही गया था। दिसंबर 2025 में अखिलेश यादव उर्फ कन्हैया की हत्या के पीछे भी नशे का इंजेक्शन ही सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने नशे के खिलाफ मुहिम भी चलाई लेकिन नशेड़ियों को बगैर डॉक्टर की पर्ची के एविल व फोर्नविट थमाने वाले दावा दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।
एचआईवी से डरने की जरूरत नहीं है। सही समय पर पहचान और सही उपचार से कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। बचाव के लिए सुरक्षित यौन संबंध और हमेशा नए सुई (सीरिंज) का इस्तेमाल करें। यौन साथी के प्रति वफादार रहें। कंडोम का इस्तेमाल करें। जब भी अत्यधिक वजन गिरने, बार-बार दस्त, रात को पसीना, लगातार बुखार-गंभीर संक्रमण की स्थिति दिखे तो आईसीटीसी सेंटर पहुंचकर एचआईवी की जांच कराएं। जांच-परामर्श, उपचार पूरी तरह निशुल्क है। किसी की पहचान-गोपनीयता उजागर नहीं की जाती। -सुनील कुमार श्रीवास्तव, परामर्शदाता एआरटी सेंटर मेडिकल कॉलेज।
हाई रिस्क वाले 375 महिला सेक्स वर्कर, नशा इंजेक्शन वाले 385 और ट्रांसजेंडर ग्रुप के 152 व्यक्तियों से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए उन्हें जागरूक रखने और समय-समय जांच पर का क्रम जारी है। इसमें जो लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं उन्हें उपचार व स्वस्थ जिंदगी जीने में भी मदद दी जा रही है। -शिवशंकर सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक, लक्षित हस्तक्षेप परियोजना।
नशे के इंजेक्शन के जरिये एचआईवी का प्रसार न होने पाए इसके लिए लगातार जागरूकता-काउंसिलिंग जारी है। ऐसे व्यक्तियों को नशे की लत से बचाने के लिए ओएसटी सेंटर की भी मदद ली जा रही है। - डॉ. कीर्ति आजाद बिंद, जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी।
सूखे नशे (अफीम, हेरोइन, स्मैक) से बर्बाद हो रहे युवाओं को नई जिंदगी देने के लिए ओएसटी सेंटर लगातार काम कर रहा है। लोगों से अपील है कि उनके घर, आस-पास कोई भी व्यक्ति नशे से पीड़ित है तो उसे ओएसटी सेंटर पहुंचाएं। - प्रो. आनंद कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।
ऐसी स्थिति वास्तव में चिंता का विषय है। बगैर डॉक्टर पर्ची के एविल या फोर्टविन उपलब्ध कराने वाले दवा दुकानदारों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। - मुकेश पालीवाल, उपायुक्त ड्रग।
नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई-जागरूकता का क्रम जारी है। नशे के लिए बगैर डॉक्टर पर्ची के इंजेक्शन उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा। - अनिल कुमार, एएसपी/नोडल जिला एड्स प्रोग्राम।
नशे के लिए इंजेक्शन कहां से मिल रहा है, इसके कितने हॉट स्पॉट हैं, इसकी जानकारी की जाएगी। बगैर डॉक्टर की पर्ची के किसी भी व्यक्ति को एविल-फोर्टविन जैसे इंजेक्शन न मिलने पाएं, इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। - चर्चित गौड़, डीएम।