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जर्जर भवनों को ढहाने की कार्रवाई अभी कागजों में

Sat, 21 May 2022 10:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 10:00 PM IST
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Action to demolish dilapidated buildings is still on paper
सोनभद्र। मानसून का सीजन आने वाला है, लेकिन जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया अभी कागजों में ही है। तमाम जद्दोजहद के बाद परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों को गिराने के लिए अभी मूल्यांकन समिति का ही गठन हो पाया है। यह समिति भवनों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट देगी, इसके बाद उच्चाधिकारियों से आदेश लेकर भवनों को गिराने का काम शुरू होगा। अन्य विभागों में तो इस दिशा में अब तक कोई कार्य ही शुरू नहीं हुआ है। जर्जर भवनों में चल रहे सरकारी दफ्तर, कार्यालय व आवास मानसून सत्र में चुनौती बढ़ाएंगे। जिले में परिषदीय विद्यालयों के 278 भवन जर्जर हैं। इन्हें काफी पहले ही निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। बावजूद वह लंबे समय से परिसर में ही खड़ा है। एक तरफ बच्चों की क्लास चलती है तो दूसरी तरफ इन जर्जर भवनों के कारण खतरे का अंदेशा बना रहता है। इन भवनों को बारिश से पहले ही ढहाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभागीय अफसरों की सुस्ती के चलते अब तक स्थिति जस की तस है। तमाम कोशिशों के बाद अभी सिर्फ तीन सदस्यीय मूल्यांकन समिति का गठन ही हुआ है। यह समिति कब सत्यापन करेगी, कब तक रिपोर्ट देगी और कब तक इस पर कार्रवाई होगी, कुछ भी तय नहीं है। इससे पहले गत वर्ष भी मूल्यांकन समिति का गठन हुआ था, लेकिन तकनीकी खामी बताकर उनकी कार्रवाई को रोक दिया गया था। इन दिनों ग्रीष्मावकाश के कारण स्कूल भले ही बंद हो गए हों, लेकिन एक माह की छुट्टियों के बाद संचालन शुरू होने पर इन जर्जर भवनों में बच्चों के लिए खतरा बना रहेगा।
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