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Sonebhadra News: गबन के मामले में व्यापारियों और कूरियर कंपनी की टीम करेगी जांच

Thu, 18 Dec 2025 12:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Dec 2025 12:58 AM IST
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A team of traders and courier companies will investigate the embezzlement case.
मऊ। आठ करोड़ रुपये की साड़ियों के गबन मामले में पुलिस ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की है। पुलिस से शिकायत के बाद ग्राहकों तक साड़ी पहुंचाने वाली दो कुरियर कंपनियों ने अपनी सफाई में जवाब दिया था। अब पुलिस ने तीन व्यापारियों और दोनों कूरियर कंपनी के मालिकों को जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
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बुनकरों और व्यापारियों का आरोप है कि बिकी हुई साड़ी ग्राहक तो वापस कर देते हैं, ऑनलाइन खरीदारी कंपनी रिफंड और ऑर्डर कैंसिल दिखा देती है, लेकिन वो साड़ी व्यापारियों तक नहीं पहुंच रही है। ये बीते तीन महीने से हो रहा है और केवल 12 दिसंबर को ही 10 लाख रुपये की साड़ियां 102 व्यापारियों को वापस नहीं मिली थीं। मऊ शहर में संचालित दो कुरियर कंपनियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए राशिद कमाल, मोहम्मद शादाब, मो. सद्दाम, मोहताशीम, अबु हुजैफा, मो. अमान, महताब आलम, शाहनवाज अशफाक, मो. कैफ सहित 102 व्यापारियों ने बीते 14 दिसंबर को मऊ कोतवाली में तहरीर दी थी।
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पुलिस ने दोनों कूरियर कंपनियों के मालिकों और व्यापारियों को बुलाकर बातचीत की और उनकी सहमति से पांच सदस्यीय टीम गठित की है। तहरीर देने के दिन तक इस धोखाधड़ी से पीड़ित व्यापारियों की संख्या 102 थी, लेकिन इनके एकजुट होने और जांच की बात उजागर होने पर धीरे धीरे सभी पीड़ित व्यापारी इकट्ठा हो गए हैं और अब संख्या 180 हो गई है।
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व्यापारियों ने बताया कि केवल कंपनी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रोजाना 300 से 600 रुपये तक की करीब 5000 हजार साड़ियों की बिक्री होती है। ग्राहक का फोन और पता नहीं मिलने के चलते उनमें से 40 फीसदी साड़ियां डिलिवर नहीं हो पाती हैं और वापस चली आती हैं।
बिकी हुई साड़ियों का वितरण कंपनी के अधिकृत कूरियर पार्टनर मालिक मऊ कोतवाली क्षेत्र के बल्लीपूरा निवासी दो सगे भाई हैं। आरोप है कि ये पार्टनर जानबूझकर साड़ी का गबन कर रहे हैं। बिना ग्राहक तक साड़ी पहुंचाए गलत डिलिवरी दिखाई जा रही है, कई मामलों में बिना ओटीपी वेरिफाई किए ही डिलिवरी की जाती है।

ग्राहकों के यहां से वापस हुई साड़ियों का न तो पैसा मिला है न ही साड़ी मिली है। तीन महीने में लगभग आठ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस धोखाधड़ी से बुनकरों को भारी नुकसान हो रहा है। कंपनियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
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