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प्रसव बाद 48 घंटे तक अस्पताल में रहेंगे शिशु
Sonbhadra
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू कर दिया है। साथ ही चिकित्सकों को निर्देश दिया है कि पैदा होने वाले बच्चे को स्वस्थ्य रहने के बाद भी अस्पताल से कम से कम 48 घंटे बाद ही छोड़ा जाए ताकि उसकी ठीक से देखभाल हो सके। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बलराम सिंह ने इसके लिए चिकित्सकों और नर्सों को निर्देश भी जारी कर दिया है।
बता दें सरकार शिशु मृत्यु दर को हर हाल में कम करने के लिए गंभीर है। इसके लिए स्वास्थ्य महकमे को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं। सीएमएस की मानें तो जिला अस्पताल में डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती माताओं को डिलीवरी के बाद तब तक नहीं जाने दिया जाएगा, जब तक बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य न हो जाए। यदि बच्चा स्वस्थ्य भी पैदा होता है तो उसे कम से कम 48 घंटे अस्पताल में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि आम तौर पर यह पाया जाता है कि जो बच्चे पैदा होते हैं और रोते नहीं हैं, या फिर ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी सांस नहीं चल रही है। ऐसे बच्चों को लोग मरा समझ लेते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि ऐसे बच्चों को डेढ़ मिनट की श्वसन क्रिया दी जाती है और उन्हें रुलाने का प्रयास किया जाता है। यदि डेढ़ मिनट में बच्चा रो देता है तो समझा जाता है कि वह ठीक है। बताया कि इसके लिए हाल में ही चिकित्सकों और एएनएम का प्रशिक्षण हो चुका है। आगे भी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि शिशुओं की देखभाल ठीक ढंग से की जा सके।
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बता दें सरकार शिशु मृत्यु दर को हर हाल में कम करने के लिए गंभीर है। इसके लिए स्वास्थ्य महकमे को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं। सीएमएस की मानें तो जिला अस्पताल में डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती माताओं को डिलीवरी के बाद तब तक नहीं जाने दिया जाएगा, जब तक बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य न हो जाए। यदि बच्चा स्वस्थ्य भी पैदा होता है तो उसे कम से कम 48 घंटे अस्पताल में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि आम तौर पर यह पाया जाता है कि जो बच्चे पैदा होते हैं और रोते नहीं हैं, या फिर ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी सांस नहीं चल रही है। ऐसे बच्चों को लोग मरा समझ लेते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि ऐसे बच्चों को डेढ़ मिनट की श्वसन क्रिया दी जाती है और उन्हें रुलाने का प्रयास किया जाता है। यदि डेढ़ मिनट में बच्चा रो देता है तो समझा जाता है कि वह ठीक है। बताया कि इसके लिए हाल में ही चिकित्सकों और एएनएम का प्रशिक्षण हो चुका है। आगे भी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि शिशुओं की देखभाल ठीक ढंग से की जा सके।
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