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सपा ने फिर सांसद पकौड़ी पर खेला दांव
Sonbhadra
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2014 के लिए अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर राबर्ट्सगंज सुरक्षित सीट से सांसद पकौड़ी कोल पर एक बार फिर विश्वास जताया है। इससे उनके समर्थकों मेें उल्लास है।
वर्ष 1975 से भारतीय रिपब्लिक पार्टी से राजनीति की शुरुआत करने वाले पकौड़ी लाल कोल का अब तक का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। पहला चुनाव उन्होंने वर्ष 1978 में राजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था। विधायकी के इस चुनाव में उनको मुंह की खानी पड़ी थी। इसके बाद भी उन्होंने कई बार विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। राबर्ट्सगंज लोकसभा चुनाव का चुनाव उन्होंने सबसे पहले डॉ. सोनेलाल पटेल की अगुवाई वाले अपना दल से लड़ा था। यहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर पार्टी बदल लिया और बसपा का दामन थाम लिया। इस बार किस्मत उनके साथ थी। बसपा के टिकट पर उन्होंने वर्ष 2002 में छानबे (मिर्जापुर) की सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें जीत हासिल हुई। जब वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव होना था, तो उन्होंने बसपा छोड़ दी और विधायक रहते हुए इस्तीफा देकर सपा में शामिल हो गए।
इस चुनाव में सपा ने उन्हें राबर्ट्सगंज सीट से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया। संयोग से वे चुनाव हार गए, लेकिन सपा में बने रहे। फिर जब तत्कालीन सांसद लालचंद कोल घूस कांड में पकड़े गए और उनकी सदस्यता रद हुई तो मध्यावधि चुनाव हुआ। मध्यावधि चुनाव में सपा ने एक बार पुन: पकौड़ी पर दांव खेला, लेकिन तब वे महज 339 वोट से हार गए। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सपा ने भी उनका हौसला टूटने नहीं दिया और 2009 के लोकसभा चुनाव में फिर से उन्हें टिकट देकर उन पर विश्वास जताया। इस बार के चुनाव में जनता ने भी उन पर विश्वास जताते हुए उनके सिर पर सांसदी का ताज रख दिया। अब जबकि लोकसभा 2014 का चुनाव होना है, सपा ने अपने पत्ते खोलते हुए राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट पर फिर से वर्तमान संासद पकौड़ी कोल को ही टिकट देकर उन पर दांव लगा दिया है। श्री कोल को पार्टी का टिकट मिलने पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हर्ष जताया है। साथ ही सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के इस निर्णय का स्वागत करते हुए एक बार फिर यह सीट सपा की झोली में डालने का संकल्प लिया है।
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वर्ष 1975 से भारतीय रिपब्लिक पार्टी से राजनीति की शुरुआत करने वाले पकौड़ी लाल कोल का अब तक का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। पहला चुनाव उन्होंने वर्ष 1978 में राजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था। विधायकी के इस चुनाव में उनको मुंह की खानी पड़ी थी। इसके बाद भी उन्होंने कई बार विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। राबर्ट्सगंज लोकसभा चुनाव का चुनाव उन्होंने सबसे पहले डॉ. सोनेलाल पटेल की अगुवाई वाले अपना दल से लड़ा था। यहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर पार्टी बदल लिया और बसपा का दामन थाम लिया। इस बार किस्मत उनके साथ थी। बसपा के टिकट पर उन्होंने वर्ष 2002 में छानबे (मिर्जापुर) की सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें जीत हासिल हुई। जब वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव होना था, तो उन्होंने बसपा छोड़ दी और विधायक रहते हुए इस्तीफा देकर सपा में शामिल हो गए।
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इस चुनाव में सपा ने उन्हें राबर्ट्सगंज सीट से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया। संयोग से वे चुनाव हार गए, लेकिन सपा में बने रहे। फिर जब तत्कालीन सांसद लालचंद कोल घूस कांड में पकड़े गए और उनकी सदस्यता रद हुई तो मध्यावधि चुनाव हुआ। मध्यावधि चुनाव में सपा ने एक बार पुन: पकौड़ी पर दांव खेला, लेकिन तब वे महज 339 वोट से हार गए। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सपा ने भी उनका हौसला टूटने नहीं दिया और 2009 के लोकसभा चुनाव में फिर से उन्हें टिकट देकर उन पर विश्वास जताया। इस बार के चुनाव में जनता ने भी उन पर विश्वास जताते हुए उनके सिर पर सांसदी का ताज रख दिया। अब जबकि लोकसभा 2014 का चुनाव होना है, सपा ने अपने पत्ते खोलते हुए राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट पर फिर से वर्तमान संासद पकौड़ी कोल को ही टिकट देकर उन पर दांव लगा दिया है। श्री कोल को पार्टी का टिकट मिलने पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हर्ष जताया है। साथ ही सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के इस निर्णय का स्वागत करते हुए एक बार फिर यह सीट सपा की झोली में डालने का संकल्प लिया है।
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