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अवैध खनन में विभाग का भी गठजोड़!

Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
Sonbhadra
Sonbhadra Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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बैढ़न। यह सोलह आना सच है कि जब तक संबंधित विभाग का संरक्षण नहीं मिलेगा माफिया अपनी कारगुजारियों को लंबे समय तक अंजाम नहीं दे सकते। फिर यह कैसे माना जाय कि सिंगरौली जिले के दर्जन भर स्थानों पर वर्षों से अवैध कोयला, पत्थर, बालू, मोरंग की खदानें महकमे की जानकारी के बिना चलती रहीं। अगर ऐसा है तो महकमे ने इससे पहले कभी कार्रवाई की जरूरत क्यों नहीं समझी। चिनगी टोला हादसे में छह मौतों के बाद यह सवाल हर किसी के जेहन में कौंध रहा है।
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जानकारों की माने तो जनपद में कई बिजली प्लांटों के आने के बाद अवैध खनन में तेजी आई। मामूली सेटिंग और अंधाधुंध कमाई ने ऊंची पहुंच रखने वालों को भी इस क्षेत्र में उतरने को विवश किया। हाईप्रोफाइल अधिकारियों के अलावा राजनीति के धुरंधरों के अपने भी इस धंधे में गहरे पांव जमाए हैं। इसी वजह से जब भी अवैध खनन स्थलों पर छापे पड़े। गरीब मजदूर ही हत्थे चढ़े। कभी रसूखदार लोगोें पर पुलिस हाथ नहीं डाल पाई।
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जनपद का खनन विभाग भी मानता है कि जिन-जिन स्थानों पर अवैध खनन हो रहा वहां किसी को लीज नहीं दी गई है। बावजूद इसके यहां तमाम पहाड़ियों को माफियाओं ने नंगी कर दी। मोरवा थानाक्षेत्र के दुल्लापाथर में कई वर्षों से पहाड़ को दीमक की तरह चट किया जा रहा है। इसमें कई खनन माफिया लगे हैं। 17 अप्रैल को एक व्यक्ति की मौत के बाद भी यहां खनन नहीं रुका। पिछले माह कलेक्टर एम सेलवेंद्रन ने यहां औचक छापा मारा। इससे खनन माफियाओं में हड़कंप मचा। किंतु कुछ दिनों बाद खनन फिर शुरू हो गया। अवैध खनन यहीं नहीं जिला मुख्यालय बैढ़न, माड़ा, चितरंगी, देवसर, सिंगरौली सभी स्थानों पर हो रहा है। जानकार बताते हैं कि कई बिजली प्लांटों के यहां आने से अवैध खनन में तेजी आई। कारण यह सस्ते में माल आपूर्ति करते हैं। जबकि अधिकृत खदानों का माल टैक्स, परमिट आदि के बाद कई गुना महंगा हो जाता है। इसे संबंधित अधिकारी भी जानते हैं। यही वजह है कि अवैध खनन रोके नहीं रुक रहा। कभी-कभी हादसों के बाद कुछ दिनों तक खनन संचालक भूमिगत हो जाते हैं। लेकिन हालात सामान्य होते ही वह दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। अब तक तो यही होता आया है।
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