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बंद खदानों को चालू करने की मांग
Sonbhadra
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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ओबरा (संवाददाता)। ओबरा खनन हादसे के लगभग ढाई महीने बीतने के पश्चात भी खनन पर ग्रहण अभी भी बरकरार है। खनन कार्य बंद होने से प्रदेश सरकार को जहां करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है, वहीं खनन व्यवसायी और मजदूरों को मुश्किलों के दौर से होकर गुजरना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार से वैध पट्टाधारकों व खनन में कार्य करने वाले मजदूर खनन चालू करने को लेकर आस बनाकर बैठे हुए हैं। माना जा रहा है कि जिले में जिलाधिकारी की तैनाती न होने के कारण खनन कार्य पर अब तक नहीं शुरू कराया जा सका। यह क्षेत्र कब तक बंद रहेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन मजदूरों के सामने तो भुखमरी का संकट आ खड़ा है। मजदूरों के साथ साथ खनन व्यवसायी भी पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। खनन कार्य बंद होने से हजारों मजदूर पहले ही पलायन कर चुके हैं। खनन क्षेत्र में चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। पूर्वांचल के विकास कार्य भी ठप हो गए हैं। गिट्टी व बालू के अभाव में विकास कार्य आधा अधूरा ही है। बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित जनपद के हजारों मजदूर कार्य कर के अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। खनन चालू करने को लेकर वैध पट्टाधारकों द्वारा जिले के जिम्मेदार अधिकारी को कई बार गुहार लगाई जा चुकी है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील यादव ने कहा कि वैध खदान चालू होना अति आवश्यक है, जिससे मजदूरों के जीविका सुचारु रूप से चल सके। पिछली बसपा सरकार के भ्रष्टाचार नीतियों का नतीजा रहा कि आज खनन क्षेत्र पर ग्रहण लग गया है। उन्होंने मांग किया कि वैध खदानों को चालू कराया जाए। गौरतलब है कि बीते 27 फरवरी को ओबरा खनन हादसे के पश्चात जिला प्रशासन द्वारा आनन-फानन में आकर पूरे खनन क्षेत्र को बंद करा दिया गया था।
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प्रदेश सरकार से वैध पट्टाधारकों व खनन में कार्य करने वाले मजदूर खनन चालू करने को लेकर आस बनाकर बैठे हुए हैं। माना जा रहा है कि जिले में जिलाधिकारी की तैनाती न होने के कारण खनन कार्य पर अब तक नहीं शुरू कराया जा सका। यह क्षेत्र कब तक बंद रहेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन मजदूरों के सामने तो भुखमरी का संकट आ खड़ा है। मजदूरों के साथ साथ खनन व्यवसायी भी पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। खनन कार्य बंद होने से हजारों मजदूर पहले ही पलायन कर चुके हैं। खनन क्षेत्र में चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। पूर्वांचल के विकास कार्य भी ठप हो गए हैं। गिट्टी व बालू के अभाव में विकास कार्य आधा अधूरा ही है। बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित जनपद के हजारों मजदूर कार्य कर के अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। खनन चालू करने को लेकर वैध पट्टाधारकों द्वारा जिले के जिम्मेदार अधिकारी को कई बार गुहार लगाई जा चुकी है।
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील यादव ने कहा कि वैध खदान चालू होना अति आवश्यक है, जिससे मजदूरों के जीविका सुचारु रूप से चल सके। पिछली बसपा सरकार के भ्रष्टाचार नीतियों का नतीजा रहा कि आज खनन क्षेत्र पर ग्रहण लग गया है। उन्होंने मांग किया कि वैध खदानों को चालू कराया जाए। गौरतलब है कि बीते 27 फरवरी को ओबरा खनन हादसे के पश्चात जिला प्रशासन द्वारा आनन-फानन में आकर पूरे खनन क्षेत्र को बंद करा दिया गया था।
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