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आपातकाल के विरोध में माले ने दिया धरना
Sonbhadra
Updated Thu, 27 Jun 2013 05:30 AM IST
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सोनभद्र। भाकपा माले, पीयूएचआर और इंकलाबी नौजवान सभा ने वर्ष 1975 में लगे आपाताकाल को बुधवार को विरोध दिवस के रूप में मनाया। कार्यकर्ताओं ने सदर तहसील पर प्रदर्शन किया और डीएम को संबोधित दो सूत्री मांगपत्र तहसीलदार को सौंपा।
धरने में भाकपा राज्य कमेटी के सदस्य कामरेड मिठाई लाल बिंद ने कहा कि वर्ष 1975 मेें देश में लगा आपातकाल सदैव देश के इतिहास में काले दिन के रूप में याद किया जाएगा। इस काल में हुए उत्पीड़न देश की तत्कालीन हुकूमत की ज्यादती को बया करती हैं। इंकलाबी नौजवान सभा के नेता कामरेड कलीम ने कहा कि सपा की सरकार में गरीबों पर पुलिसिया दमन बढ़ा है। इस सरकार में जनता की मांगों को उठाने वालों के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज कर उनके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया जा रहा है। कलीम ने 20 जून को डाला में प्रदर्शन करने वाले 11 नामजद और 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ चोपन पुलिस की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी की निंदा की। कहा कि प्रदर्शन करने वालों ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया जो उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उन्होंने मुकदमा वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को संबोधित दो सूत्री मांगपत्र तहसीलदार को दिया गया। इसमें मुकदमा वापसी के साथ ही सलईबनवां गांव में जायका की ओर से गरीबों के घर में खोदे जा रहे गड्ढों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शामिल है। धरने में मानमती, कलावती, कस्तूरी, मंजू, फूलवंती, आशा देवी, अमरावती, लल्लू, रामचंदर, पिंटू, विजय, रघुवीर, मिथिलेश भारद्वाज, संतोष बिंद, राजेंद्र प्रजापति, एडवोकेट पवन, एडवोकेट संदीप सिंह कुशवाहा, बाबूलाल भारती, नाजमा खातून, जुबैदा खातून आदि कार्यकर्ता मौजूद थीं।
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धरने में भाकपा राज्य कमेटी के सदस्य कामरेड मिठाई लाल बिंद ने कहा कि वर्ष 1975 मेें देश में लगा आपातकाल सदैव देश के इतिहास में काले दिन के रूप में याद किया जाएगा। इस काल में हुए उत्पीड़न देश की तत्कालीन हुकूमत की ज्यादती को बया करती हैं। इंकलाबी नौजवान सभा के नेता कामरेड कलीम ने कहा कि सपा की सरकार में गरीबों पर पुलिसिया दमन बढ़ा है। इस सरकार में जनता की मांगों को उठाने वालों के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज कर उनके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया जा रहा है। कलीम ने 20 जून को डाला में प्रदर्शन करने वाले 11 नामजद और 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ चोपन पुलिस की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी की निंदा की। कहा कि प्रदर्शन करने वालों ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया जो उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उन्होंने मुकदमा वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को संबोधित दो सूत्री मांगपत्र तहसीलदार को दिया गया। इसमें मुकदमा वापसी के साथ ही सलईबनवां गांव में जायका की ओर से गरीबों के घर में खोदे जा रहे गड्ढों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शामिल है। धरने में मानमती, कलावती, कस्तूरी, मंजू, फूलवंती, आशा देवी, अमरावती, लल्लू, रामचंदर, पिंटू, विजय, रघुवीर, मिथिलेश भारद्वाज, संतोष बिंद, राजेंद्र प्रजापति, एडवोकेट पवन, एडवोकेट संदीप सिंह कुशवाहा, बाबूलाल भारती, नाजमा खातून, जुबैदा खातून आदि कार्यकर्ता मौजूद थीं।
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