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Sonebhadra News: 906 स्कूलों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं
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सोनभद्र। जल संकट से निपटने और बच्चों को जल संरक्षण के प्रति सतेत करने के उद्देश्य से शासन ने जिले के सभी 2061 परिषदीय विद्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (वर्षा जल संचयन प्रणाली) लगाने का लक्ष्य तय किया था। यह योजना कागजों तक सीमित रह गई है। अब भी 906 विद्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है।
प्रदेश सरकार ने निर्देश जारी किया था कि प्रत्येक विद्यालय में बारिश के पानी को टंकी या जलाशय में एकत्र कर उपयोग में लाया जाए। उद्देश्य था कि बरसात का पानी व्यर्थ न जाए और स्कूली बच्चे जल बचाने के महत्व को व्यावहारिक रूप से सीख सकें।
परंतु जिले में इस योजना की स्थिति अधूरी, लापरवाह और औपचारिकता तक सीमित दिखाई देती है। योजना के तहत अब भी 906 विद्यालय ऐसे हैं जहां रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कोई नामोनिशान नहीं है। जिले के जिन 1155 विद्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गये थे। जिनमें से कई जगह यह सिस्टम खराब हालत में पड़े हैं। कहीं पाइप टूटे हैं, तो कहीं टंकियां जाम हैं।
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यानी व्यवस्था कागज पर बनी, पर उसका रखरखाव और उपयोग कोई नहीं कर रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रारंभ में कुछ स्कूलों में निर्माण एजेंसियों ने जल्दबाजी में कार्य तो कराया, लेकिन गुणवत्ता की ओर ध्यान नहीं दिया गया। अब परिणाम यह है कि सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं और स्कूलों में जल संचयन की व्यवस्था केवल बोर्ड पर लिखी जानकारी तक सीमित रह गई है।
यह स्थिति तब है जब सोनभद्र उन जिलों में गिना जाता है जहां गर्मी के दिनों में जल संकट आम बात है। ऐसे में विद्यालय स्तर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जैसी पहल को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी था। लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि यह योजना केवल रिपोर्टों और बैठकों की शोभा बनकर रह गई है। संवाद
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प्रदेश सरकार ने निर्देश जारी किया था कि प्रत्येक विद्यालय में बारिश के पानी को टंकी या जलाशय में एकत्र कर उपयोग में लाया जाए। उद्देश्य था कि बरसात का पानी व्यर्थ न जाए और स्कूली बच्चे जल बचाने के महत्व को व्यावहारिक रूप से सीख सकें।
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परंतु जिले में इस योजना की स्थिति अधूरी, लापरवाह और औपचारिकता तक सीमित दिखाई देती है। योजना के तहत अब भी 906 विद्यालय ऐसे हैं जहां रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कोई नामोनिशान नहीं है। जिले के जिन 1155 विद्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गये थे। जिनमें से कई जगह यह सिस्टम खराब हालत में पड़े हैं। कहीं पाइप टूटे हैं, तो कहीं टंकियां जाम हैं।
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यानी व्यवस्था कागज पर बनी, पर उसका रखरखाव और उपयोग कोई नहीं कर रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रारंभ में कुछ स्कूलों में निर्माण एजेंसियों ने जल्दबाजी में कार्य तो कराया, लेकिन गुणवत्ता की ओर ध्यान नहीं दिया गया। अब परिणाम यह है कि सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं और स्कूलों में जल संचयन की व्यवस्था केवल बोर्ड पर लिखी जानकारी तक सीमित रह गई है।
यह स्थिति तब है जब सोनभद्र उन जिलों में गिना जाता है जहां गर्मी के दिनों में जल संकट आम बात है। ऐसे में विद्यालय स्तर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जैसी पहल को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी था। लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि यह योजना केवल रिपोर्टों और बैठकों की शोभा बनकर रह गई है। संवाद