{"_id":"5b8c300142c792466b462ad9","slug":"81535913985-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेरी भारत मां सजती है, ओढ़ चुनरिया हिंदी की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेरी भारत मां सजती है, ओढ़ चुनरिया हिंदी की
Updated Mon, 03 Sep 2018 12:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीजपुर। एनटीपीसी की रिहंद परियोजना के इंद्रधनुष प्रेक्षागृह में हिंदी पखवाड़ा के मौके पर शनिवार की रात अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया। महिला कवियों ने हास्य व्यंग्य व सरकार पर कविता के माध्यम से वार कर लोगों को खुब गुदगुदाया।
मुख्य अतिथि महाप्रबंधक रंजन कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आगरा की डा. रुचि चतुर्वेदी ने मां सरस्वती की वंदना कर भक्ति रस का समावेश किया। उन्होंने हिंदी भाषा के महत्व को परिलक्षित करते हुए मेरी भारत मां सजती है, ओढ़ चुनरिया हिंदी की, का पाठ कर लोगों को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। संचालन कर रहीं दिल्ली की डा. कीर्ति काले ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कविता पाठ किया। भगवान श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य: को वर्णित करते हुए उन्होंने तेरे जैसा छैल छबीला देखा नहीं, देख लिया सारा संसार का पाठ कर लोगों को भावविभोर कर दिया। वाराणसी की डा. पूनम श्रीवास्तव ने अनमोल शहर की मैं अनमोल निशानी हूँ, कुछ लोगों की खातिर मैं रंगीन कहानी हूं तथा देश प्रेम से ओतप्रोत एवं शृंगार रस की कविताओं को सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर बाध्य कर दिया। अमरोहा की निकहत अमरोहवी ने मैं हूं मजदूर की बेटी एक कसम है, मैं अपनी औलाद को पत्थर नहीं ढोने दूंगी व रायबरेली की साविस्ता ब्रजेश नें न तू हिंदू मुझे लिखना न मुसलमान लिखना, अगर तुम जरूरी समझो तो इंसान लिखना को सुनाकर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कवि सम्मेलन में सूरत की उर्मिला, मध्यप्रदेश नागदा की डा. संध्या विश्व ने हास्य एवं व्यंग्य से ओतप्रोत कविता से लोगों को खुब गुदगुदाया। इस मौके पर महाप्रबंधक जीसी चौकसे, एम रमेश, अपर महाप्रबंधकगण डा. रेनू सक्सेना, शशिचंद्र, यूके श्रीवास्तव, आरपी शर्मा, वेद प्रकाश, केसी सिंघा राय, आरके सिंह, एसपी गुप्ता, रविंद्र सिंह, एल शाह आदि मौजूद रहे। सहायक प्रबंधक राजभाषा एवं जनसंपर्क मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि महाप्रबंधक रंजन कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आगरा की डा. रुचि चतुर्वेदी ने मां सरस्वती की वंदना कर भक्ति रस का समावेश किया। उन्होंने हिंदी भाषा के महत्व को परिलक्षित करते हुए मेरी भारत मां सजती है, ओढ़ चुनरिया हिंदी की, का पाठ कर लोगों को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। संचालन कर रहीं दिल्ली की डा. कीर्ति काले ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कविता पाठ किया। भगवान श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य: को वर्णित करते हुए उन्होंने तेरे जैसा छैल छबीला देखा नहीं, देख लिया सारा संसार का पाठ कर लोगों को भावविभोर कर दिया। वाराणसी की डा. पूनम श्रीवास्तव ने अनमोल शहर की मैं अनमोल निशानी हूँ, कुछ लोगों की खातिर मैं रंगीन कहानी हूं तथा देश प्रेम से ओतप्रोत एवं शृंगार रस की कविताओं को सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर बाध्य कर दिया। अमरोहा की निकहत अमरोहवी ने मैं हूं मजदूर की बेटी एक कसम है, मैं अपनी औलाद को पत्थर नहीं ढोने दूंगी व रायबरेली की साविस्ता ब्रजेश नें न तू हिंदू मुझे लिखना न मुसलमान लिखना, अगर तुम जरूरी समझो तो इंसान लिखना को सुनाकर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कवि सम्मेलन में सूरत की उर्मिला, मध्यप्रदेश नागदा की डा. संध्या विश्व ने हास्य एवं व्यंग्य से ओतप्रोत कविता से लोगों को खुब गुदगुदाया। इस मौके पर महाप्रबंधक जीसी चौकसे, एम रमेश, अपर महाप्रबंधकगण डा. रेनू सक्सेना, शशिचंद्र, यूके श्रीवास्तव, आरपी शर्मा, वेद प्रकाश, केसी सिंघा राय, आरके सिंह, एसपी गुप्ता, रविंद्र सिंह, एल शाह आदि मौजूद रहे। सहायक प्रबंधक राजभाषा एवं जनसंपर्क मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया।
विज्ञापन