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चोपन ब्लॉक के पूर्वी इलाकों में पानी का संकट
Updated Wed, 04 Apr 2018 11:44 PM IST
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चोपन ब्लॉक के पूर्वी गांवों में पानी का संकट पैदा हो गया है। इस साल कम बारिश से जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। मार्च में ही पांडु नदी के सूखने से आसपास के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। परेशानहाल लोगों ने टैैंकर से पानी आपूर्ति की मांग की है।
कम बारिश के चलते अप्रैल शुरू होते ही कोन, गिधिया, बरवाखाड़, डोमा, मिश्री, देवाटन, कचनरवा समेत दर्जनों गांवों में पेयजल का संकट शुरू हो गया है। ग्राम पंचायतों में एक वर्ष पूर्व टैंकर व पहले से स्थापित हैंडपंपों में सबमर्सिबल लगाकर टैंकर से पानी की आपूर्ति की व्यवस्थ की गई थी। लेकिन गर्मी बीतते ही ज्यादातर सबमर्सिबल गायब हो गए। गांव में कटनिहवाडाड़, गौहान टोला, लोहरान बस्ती में पानी की भारी किल्लत हमेशा होती है। क्षेत्र के रमाशंकर, विष्णू प्रसाद, राम कुमार, अमरेश का कहना है कि जिला प्रशासन को एक वर्ष पूर्व लगे सबमर्सिबल की जांच करानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। प्रशासन शुद्घ पेयजल की आपूर्ति कराये, वरना क्षेत्र में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाएंगे। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पांडु नदी का पानी मार्च में ही सूख गया। इससे जल स्तर भी नीचे खिसक गया। इसका सीधा असर अप्रैल में ही पड़ने लगा है।
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कम बारिश के चलते अप्रैल शुरू होते ही कोन, गिधिया, बरवाखाड़, डोमा, मिश्री, देवाटन, कचनरवा समेत दर्जनों गांवों में पेयजल का संकट शुरू हो गया है। ग्राम पंचायतों में एक वर्ष पूर्व टैंकर व पहले से स्थापित हैंडपंपों में सबमर्सिबल लगाकर टैंकर से पानी की आपूर्ति की व्यवस्थ की गई थी। लेकिन गर्मी बीतते ही ज्यादातर सबमर्सिबल गायब हो गए। गांव में कटनिहवाडाड़, गौहान टोला, लोहरान बस्ती में पानी की भारी किल्लत हमेशा होती है। क्षेत्र के रमाशंकर, विष्णू प्रसाद, राम कुमार, अमरेश का कहना है कि जिला प्रशासन को एक वर्ष पूर्व लगे सबमर्सिबल की जांच करानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। प्रशासन शुद्घ पेयजल की आपूर्ति कराये, वरना क्षेत्र में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाएंगे। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पांडु नदी का पानी मार्च में ही सूख गया। इससे जल स्तर भी नीचे खिसक गया। इसका सीधा असर अप्रैल में ही पड़ने लगा है।
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