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खेतों में अवशेष जलाया तो जुर्माना
Updated Tue, 25 Sep 2018 10:56 PM IST
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सोनभद्र। पर्यावरण को संतुलित रखने और प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए खेतों में फसलों के अवशेष जलाने पर रोक है। सरकार ने अवशेष फसल प्रबंधन के लिए नई योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को अनुदान पर विभिन्न तरह की मशीनें दी जाएंगी ताकि लोगों को फसलों का अवशेष खेतों में न जलाना पड़े। एनजीटी ने खेतों में फसल अवशेषों को जलाने पर दंड की व्यवस्था की है। यदि कोई किसान फसल अवशेष को जलाते हुए पाया जाएगा तो उस पर जुर्माना लगेगा।
धान एवं गेहूं की कटाई, मड़ाई होने के कारण अधिकांश क्षेत्रों में किसान फसल अवशेष को खेतों में जला रहे हैं। इससे वातावरण प्रदूषित होने के साथ ही मिट्टी के पोषक तत्वों की अत्यधिक क्षति हो रही है। धान की कटाई एवं गेहूं की बुआई के मध्य बहुत कम समय 20 से 30 दिन ही उपलब्ध होता है। कृषकों को गेहूं की बुआई की जल्दी होती है तथा खेत की तैयारी में कम समय लगे एवं शीध्र ही गेहूं की बुआई हो जाय, इस उद्देश्य से किसान अवशेष जलाने से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी होते हुए भी फसल अवशेष जला देते हैं। कृषि उप निदेशक डीके गुप्ता ने बताया कि इसकी रोकथाम करना पर्यावरण के लिए जरूरी है। इसीलिए सरकार ने प्रमोशन आफ मैकेनाइजेशन फार इन सी-टू मैनेजमेंट आफ क्राप रेजिड्यू योजना शुरू हुई है। इस योजना के तहत विभिन्न कृषि यंत्र, उपकरण जैसे सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हार्वेस्टर, हैपीसीडर, स्ट्राचापर, मल्चर, रोटरी स्लैसर, रिवर्सबुल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, रोटावेटर आदि पर अनुदान पर किसानों को दिया जाएगा। डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि किसान फसल अवशेष को खेत में सड़ाकर जैविक खाद के रूप में प्रयोग करें। फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों से बचें।
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धान एवं गेहूं की कटाई, मड़ाई होने के कारण अधिकांश क्षेत्रों में किसान फसल अवशेष को खेतों में जला रहे हैं। इससे वातावरण प्रदूषित होने के साथ ही मिट्टी के पोषक तत्वों की अत्यधिक क्षति हो रही है। धान की कटाई एवं गेहूं की बुआई के मध्य बहुत कम समय 20 से 30 दिन ही उपलब्ध होता है। कृषकों को गेहूं की बुआई की जल्दी होती है तथा खेत की तैयारी में कम समय लगे एवं शीध्र ही गेहूं की बुआई हो जाय, इस उद्देश्य से किसान अवशेष जलाने से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी होते हुए भी फसल अवशेष जला देते हैं। कृषि उप निदेशक डीके गुप्ता ने बताया कि इसकी रोकथाम करना पर्यावरण के लिए जरूरी है। इसीलिए सरकार ने प्रमोशन आफ मैकेनाइजेशन फार इन सी-टू मैनेजमेंट आफ क्राप रेजिड्यू योजना शुरू हुई है। इस योजना के तहत विभिन्न कृषि यंत्र, उपकरण जैसे सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हार्वेस्टर, हैपीसीडर, स्ट्राचापर, मल्चर, रोटरी स्लैसर, रिवर्सबुल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, रोटावेटर आदि पर अनुदान पर किसानों को दिया जाएगा। डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि किसान फसल अवशेष को खेत में सड़ाकर जैविक खाद के रूप में प्रयोग करें। फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों से बचें।
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