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कुपोषित बच्चों को नहीं मिल रहा पौष्टिक आहार
Updated Sun, 23 Sep 2018 11:53 PM IST
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सोनभद्र/अनपरा । कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार प्रयासरत है। इसके लिए आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक निर्देश भी जारी किया गया है। कुपोषित बच्चों की सुविधा के लिए जनपद में आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में लगभग ढाई लाख बच्चे पंजीकृत हैं। पंजीकृत बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए पोषाहार और हाट कुक्ड की व्यवस्था की गई है, बावजूद इसके कुपोषित बच्चों में योजनाओं के संचालन के मुताबिक कमी नहीं आ रही है।
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 1825 है। इन केंद्रों में लगभग ढाई लाख नौनिहालों का पंजीयन है। कुपोषण को खत्म करने के लिए मुख्य रूप से आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, पंचायतराज व शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। छह वर्ष तक के बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण व पोषाहार भी उपलब्ध कराना है। अभिभावकों की मानें तो आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसकी वजह से जिले में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। जिनके बच्चे कुपोषित हैं, वह काफी परेशान हैं। इलाज करा रहे लोगों का कहना है कि उनके बच्चे भी कुपोषण का शिकार हैं लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों से उन्हें आपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही है। म्योरपुर ब्लाक के भाट क्षेत्र में स्थित गांव के तमाम बच्चे अति कुपोषित हैं। खजुरा आदि गांव के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बाल पोषाहार का लाभ नहीं मिल रहा। हालांकि संबंधित विभाग के अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं है। पुष्टाहार के बाद भी अतिकुपोषित बच्चों को जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा जाता है। यहां 14 दिन तक बच्चे और मां दोनों को पौष्टिक आहार दिया जाता है। बच्चों को डाइट के साथ खेल-खिलौने का सामान भी मिलता है। बच्चों की सभी जांच नि:शुल्क होती है और दवाई भी फ्री दी जाती है, बावजूद हालात में बहुत सुधार नहीं दिख रहा है।
अभियान का नहीं खास असर
कुपोषण के खात्मे के लिए लोगों को जागरूक करने लिए सितंबर को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। अभियान की सफलता के लिए चार विभागों को विशेष तौर पर शासन की ओर से निर्देश दिया गया है, जिसमें आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, पंचायतराज व शिक्षा विभाग शामिल हैं। किस दिन क्या होना है ये भी पूर्व में निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं । जिससे अभियान का लाभ कुपोषित बच्चों को नहीं मिल रहा है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत कुमार सिंह के मुताबिक पिछले साल कुपोषित बच्चों की तादाद 25000 थी, जो इस साल अगस्त तक घटकर 13000 रह गई है। कुपोषण दूर करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
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जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 1825 है। इन केंद्रों में लगभग ढाई लाख नौनिहालों का पंजीयन है। कुपोषण को खत्म करने के लिए मुख्य रूप से आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, पंचायतराज व शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। छह वर्ष तक के बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण व पोषाहार भी उपलब्ध कराना है। अभिभावकों की मानें तो आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसकी वजह से जिले में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। जिनके बच्चे कुपोषित हैं, वह काफी परेशान हैं। इलाज करा रहे लोगों का कहना है कि उनके बच्चे भी कुपोषण का शिकार हैं लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों से उन्हें आपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही है। म्योरपुर ब्लाक के भाट क्षेत्र में स्थित गांव के तमाम बच्चे अति कुपोषित हैं। खजुरा आदि गांव के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बाल पोषाहार का लाभ नहीं मिल रहा। हालांकि संबंधित विभाग के अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं है। पुष्टाहार के बाद भी अतिकुपोषित बच्चों को जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा जाता है। यहां 14 दिन तक बच्चे और मां दोनों को पौष्टिक आहार दिया जाता है। बच्चों को डाइट के साथ खेल-खिलौने का सामान भी मिलता है। बच्चों की सभी जांच नि:शुल्क होती है और दवाई भी फ्री दी जाती है, बावजूद हालात में बहुत सुधार नहीं दिख रहा है।
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अभियान का नहीं खास असर
कुपोषण के खात्मे के लिए लोगों को जागरूक करने लिए सितंबर को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। अभियान की सफलता के लिए चार विभागों को विशेष तौर पर शासन की ओर से निर्देश दिया गया है, जिसमें आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, पंचायतराज व शिक्षा विभाग शामिल हैं। किस दिन क्या होना है ये भी पूर्व में निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं । जिससे अभियान का लाभ कुपोषित बच्चों को नहीं मिल रहा है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत कुमार सिंह के मुताबिक पिछले साल कुपोषित बच्चों की तादाद 25000 थी, जो इस साल अगस्त तक घटकर 13000 रह गई है। कुपोषण दूर करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।