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छोटी नोट और सिक्के न लेने से खफा हैं व्यापारी
Updated Thu, 12 Oct 2017 11:23 PM IST
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सोनभद्र। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने बैंकों में छोटे नोट और रेजकारी (सिक्के) न लिये जाने, मनमानी चार्ज वसूलने पर नाराजगीइ जाहिर की है। गुरुवार को प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की और उन्हें तीन सूत्री ज्ञापन सौंपा। मांग उठाई कि व्यापारियों का हो रहा उत्पीड़न बंद किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यपाल जैन ने कहा कि नोटबंदी के बाद छोटे नोट व रेजकारी की बाढ़-सी आ गई है। दूकानों पर बड़ी मात्रा में 10 रुपये के नोट व सिक्के आ रहे हैं। ग्राहक से अगर दूकानदार सिक्के नहीं लेते हैं तो ग्राहक दूकानदार से झगड़ा और मारपीट करने पर उतर आते हैं। वहीं दूसरी ओर दूकानदार अगर अपनी दूकान की बिक्री सिक्के व छोटे नोट के रूप में अपने बैंक के खाते में जमा करवाना चाहता है तो बैंक लेने से मना कर रहे हैं। बैंकों द्वारा ऐसा करना रिजर्व बैंक की गाइड लाइन के भी विरूद्घ है। जैन ने बताया कि विभिन्न बैंकों द्वारा पिछले चार-पांच वर्षों से चालू खातों में रुपये जमा करने पर बहुत से खर्च लिए जा रहे हैं। जिलाध्यक्ष रतन लाल गर्ग ने कहा कि प्राइवेट बैंकों में मनमानी चार्जेज लगाए जा रहे हैैं। बैंक से एकाउंट स्टेटमेंट मांगने पर लगाए जाने वाले चार्जेज नहीं समझ में आते क्योंकि चार्जेज कोड भाषा में लिखा रहता है। डेविट कार्ड व क्रेडिट कार्ड स्वैप करने पर भी करीब दो प्रतिशत चार्ज काट कर व्यापारी के खाते में जाता है। इस तरह से बैंकों द्वारा मनमानी चार्जेज लगाने व छोटे नोट तथा सिक्के न लेने से कस्टमर और व्यापारी के संबंध भी खराब हो रहे हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में हरीश अग्रवाल, रामेश्वर जैन, शिव सांवरिया, अशोक जैन, मिठाई लाल सोनी, धीरज सोनी, विमल जालान, विकास मित्तल, विमल अग्रवाल, एजाज कादरी, मोहन लाल केशरी, संतोष केशरी, राधेश्याम बंका, चंदन केशरी, विष्णु बरनवाल आदि मौजूद रहे।
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प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यपाल जैन ने कहा कि नोटबंदी के बाद छोटे नोट व रेजकारी की बाढ़-सी आ गई है। दूकानों पर बड़ी मात्रा में 10 रुपये के नोट व सिक्के आ रहे हैं। ग्राहक से अगर दूकानदार सिक्के नहीं लेते हैं तो ग्राहक दूकानदार से झगड़ा और मारपीट करने पर उतर आते हैं। वहीं दूसरी ओर दूकानदार अगर अपनी दूकान की बिक्री सिक्के व छोटे नोट के रूप में अपने बैंक के खाते में जमा करवाना चाहता है तो बैंक लेने से मना कर रहे हैं। बैंकों द्वारा ऐसा करना रिजर्व बैंक की गाइड लाइन के भी विरूद्घ है। जैन ने बताया कि विभिन्न बैंकों द्वारा पिछले चार-पांच वर्षों से चालू खातों में रुपये जमा करने पर बहुत से खर्च लिए जा रहे हैं। जिलाध्यक्ष रतन लाल गर्ग ने कहा कि प्राइवेट बैंकों में मनमानी चार्जेज लगाए जा रहे हैैं। बैंक से एकाउंट स्टेटमेंट मांगने पर लगाए जाने वाले चार्जेज नहीं समझ में आते क्योंकि चार्जेज कोड भाषा में लिखा रहता है। डेविट कार्ड व क्रेडिट कार्ड स्वैप करने पर भी करीब दो प्रतिशत चार्ज काट कर व्यापारी के खाते में जाता है। इस तरह से बैंकों द्वारा मनमानी चार्जेज लगाने व छोटे नोट तथा सिक्के न लेने से कस्टमर और व्यापारी के संबंध भी खराब हो रहे हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में हरीश अग्रवाल, रामेश्वर जैन, शिव सांवरिया, अशोक जैन, मिठाई लाल सोनी, धीरज सोनी, विमल जालान, विकास मित्तल, विमल अग्रवाल, एजाज कादरी, मोहन लाल केशरी, संतोष केशरी, राधेश्याम बंका, चंदन केशरी, विष्णु बरनवाल आदि मौजूद रहे।
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