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तीन हाइड्रो परियोजनाओं से 57 मेवा उत्पादन
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कोयला संकट से तापीय परियोजनाओं में आ रही दिक्कतों के बावजूद जल विद्युत परियोजनाओं का संचालन नहीं हो रहा है। इसके पीछे जलस्तर में कमी को बड़ी वजह माना जा रहा है। सूबे की तीन जल विद्युत परियोजनाओं से मंगलवार को महज 57 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया गया।
खारा, ओबरा और रिहंद की तीन हाइड्रो परियोजनाएं बिजली पैदा करती हैं मगर गर्मी बढ़ने के साथ पानी का भंडार भी कम हो रहा है। ऐसे में इन परियोजनाओं को चलाने में कोताही बरती जा रही है। लंबे समय से बंद ओबरा हाइड्रो परियोजना की एक इकाई से मंगलवार को उत्पादन प्रारंभ हुआ। तब आंकड़ा 57 मेगावाट के पास पहुंचा है। वहीं पानी की कमी के कारण रिहंद हाइड्रो की 250 मेगावाट की सभी इकाइयों से उत्पादन शून्य ही है। कोयला से उत्पादन कर रही परियोजनाओं में कोयला और पानी से बिजली बना रही परियोजनाओं में पानी की कमी के कारण परियोजनाओं का उत्पादन कम होने से राज्य उत्पादन निगम को बिजली की मांग पूरी करने के लिए सेंट्रल पूल और निजी क्षेत्रों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।
नहीं शुरू हो सकी बंद इकाई
अनपरा तापीय परियोजना की तीसरी, हरदुआगंज ई और पारीछा ए की इकाइयों से उत्पादन अब भी शून्य बना हुआ है। शुक्रवार से ही अनुरक्षण पर लगी एटीपी की तीसरी इकाई अब तक दोबारा उत्पादनरत नहीं हो सकी है। हरदुुआगंज और पारीछा की दोनों इकाइयां पिछले दस दिनों से बंद हैं
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ओबरा सी की पहली इकाई का हुआ ब्वायलर टेस्ट लाइटअप
ओबरा तापीय परियोजना के विस्तारीकरण में निर्माणाधीन 1320 मेगावाट की ओबरा सी परियोजना के 660 मेगावाट की पहली इकाई का मंगलवार की शाम ब्वायलर टेस्ट लाइटअप किया गया। इस दौरान सफलतापूर्वक ब्वायलर सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई। महाप्रबंधक इं. पीसी अग्रवाल ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके तहत हर तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को ब्वायलर टेस्ट लाइटअप किया गया है। बता दें कि प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ओबरा सी परियोजना उत्तर प्रदेश को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर मानी जा रही है। कोविड-19 के कारण परियोजना निर्माण विलंब से चल रही है। संभावना जताई जा रही है कि सबकुछ ठीक रहा तो अक्टूबर 2022 तक पहली इकाई से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।
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खारा, ओबरा और रिहंद की तीन हाइड्रो परियोजनाएं बिजली पैदा करती हैं मगर गर्मी बढ़ने के साथ पानी का भंडार भी कम हो रहा है। ऐसे में इन परियोजनाओं को चलाने में कोताही बरती जा रही है। लंबे समय से बंद ओबरा हाइड्रो परियोजना की एक इकाई से मंगलवार को उत्पादन प्रारंभ हुआ। तब आंकड़ा 57 मेगावाट के पास पहुंचा है। वहीं पानी की कमी के कारण रिहंद हाइड्रो की 250 मेगावाट की सभी इकाइयों से उत्पादन शून्य ही है। कोयला से उत्पादन कर रही परियोजनाओं में कोयला और पानी से बिजली बना रही परियोजनाओं में पानी की कमी के कारण परियोजनाओं का उत्पादन कम होने से राज्य उत्पादन निगम को बिजली की मांग पूरी करने के लिए सेंट्रल पूल और निजी क्षेत्रों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।
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नहीं शुरू हो सकी बंद इकाई
अनपरा तापीय परियोजना की तीसरी, हरदुआगंज ई और पारीछा ए की इकाइयों से उत्पादन अब भी शून्य बना हुआ है। शुक्रवार से ही अनुरक्षण पर लगी एटीपी की तीसरी इकाई अब तक दोबारा उत्पादनरत नहीं हो सकी है। हरदुुआगंज और पारीछा की दोनों इकाइयां पिछले दस दिनों से बंद हैं
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ओबरा सी की पहली इकाई का हुआ ब्वायलर टेस्ट लाइटअप
ओबरा तापीय परियोजना के विस्तारीकरण में निर्माणाधीन 1320 मेगावाट की ओबरा सी परियोजना के 660 मेगावाट की पहली इकाई का मंगलवार की शाम ब्वायलर टेस्ट लाइटअप किया गया। इस दौरान सफलतापूर्वक ब्वायलर सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई। महाप्रबंधक इं. पीसी अग्रवाल ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके तहत हर तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को ब्वायलर टेस्ट लाइटअप किया गया है। बता दें कि प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ओबरा सी परियोजना उत्तर प्रदेश को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर मानी जा रही है। कोविड-19 के कारण परियोजना निर्माण विलंब से चल रही है। संभावना जताई जा रही है कि सबकुछ ठीक रहा तो अक्टूबर 2022 तक पहली इकाई से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।