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भगवान राम का हुआ राजतिलक, हर्षित हुए जन
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सोनभद्र। आरटीएस क्लब में चल रहे श्रीरामचरित मानस नवाह पाठ महायज्ञ में बुधवार को भगवान श्रीराम को राजगद्दी (राज्याभिषेक) सौंपी गई। आचार्य संतोष कुमार द्विवेदी ने गुरू वशिष्ठ की भूमिका निभाई।
डा. शिवकुमार शास्त्री, यशवंत और अनिल पांडेय ने हवन-पूजन की प्रक्रिया पूरी करवाई। यज्ञ आयोजन समिति के महामंत्री सुशील पाठक, यजमान किशोर केडिया, दीप्ति केडिया ने भगवान राम का राजतिलक किया। इस दौरान मंडप परिक्रमा और भगवान राम के राजतिलक झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। गोरखपुर से आए हेमंत त्रिपाठी ने हनुमान चरित का वर्णन करते हुए कहा कि जो अपने जीवन से मान बढ़ाई का भान मिटा दे, वहीं हनुमान है। जो अपने मान को हन दें वहीं हनुमान है। कहा कि संजीवनी बूटी को लाने में हनुमान को थोड़ा सा अभिमान उत्पन्न हुआ तो भरत ने बिना फर का वाण मारकर मूर्छित कर दिया। अयोध्या से आए मधुसूदन शास्त्री ने कालनेमि से जुड़े प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि रामकथा हनुमान की कमजोरी थी। रावण इस बात को जानता था और सइका फायदा उठाने के लिए उसने नकली आश्रम का निर्माण करवाया लेकिन सजग श्रोता हनुमान ने शब्दों से ही पहचान लिया और कालनेमि का उद्धार कर दिया। जौनपुर से पधारे प्रकाशचंद्र विद्यार्थी ने लक्ष्मण को शक्तिवाण लगने को घटनाक्रम का एक भाग बताया। कहा कि इसी बहाने लक्ष्मण भगवान राम के गोंद का आनंद उठा रहे थे। हनुमान ने पर्वत सहित संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण को मूर्छा मुक्त कराया। आचार्य संतोष धर द्विवेदी ने कहा कि श्रीरामकथा को जीवन में उतारें, संस्कारों की शुद्धि होगी। समिति अध्यक्ष रतनलाल गर्ग ने आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर मृत्युंजय त्रिपाठी, शिशु तिवारी, अजय शुक्ला, विमलेश सिंह, सुशील आदि मौजूद रहे।
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डा. शिवकुमार शास्त्री, यशवंत और अनिल पांडेय ने हवन-पूजन की प्रक्रिया पूरी करवाई। यज्ञ आयोजन समिति के महामंत्री सुशील पाठक, यजमान किशोर केडिया, दीप्ति केडिया ने भगवान राम का राजतिलक किया। इस दौरान मंडप परिक्रमा और भगवान राम के राजतिलक झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। गोरखपुर से आए हेमंत त्रिपाठी ने हनुमान चरित का वर्णन करते हुए कहा कि जो अपने जीवन से मान बढ़ाई का भान मिटा दे, वहीं हनुमान है। जो अपने मान को हन दें वहीं हनुमान है। कहा कि संजीवनी बूटी को लाने में हनुमान को थोड़ा सा अभिमान उत्पन्न हुआ तो भरत ने बिना फर का वाण मारकर मूर्छित कर दिया। अयोध्या से आए मधुसूदन शास्त्री ने कालनेमि से जुड़े प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि रामकथा हनुमान की कमजोरी थी। रावण इस बात को जानता था और सइका फायदा उठाने के लिए उसने नकली आश्रम का निर्माण करवाया लेकिन सजग श्रोता हनुमान ने शब्दों से ही पहचान लिया और कालनेमि का उद्धार कर दिया। जौनपुर से पधारे प्रकाशचंद्र विद्यार्थी ने लक्ष्मण को शक्तिवाण लगने को घटनाक्रम का एक भाग बताया। कहा कि इसी बहाने लक्ष्मण भगवान राम के गोंद का आनंद उठा रहे थे। हनुमान ने पर्वत सहित संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण को मूर्छा मुक्त कराया। आचार्य संतोष धर द्विवेदी ने कहा कि श्रीरामकथा को जीवन में उतारें, संस्कारों की शुद्धि होगी। समिति अध्यक्ष रतनलाल गर्ग ने आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर मृत्युंजय त्रिपाठी, शिशु तिवारी, अजय शुक्ला, विमलेश सिंह, सुशील आदि मौजूद रहे।
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