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50 हजार मेगावाट होगी क्षमता
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Wed, 01 Feb 2017 11:57 PM IST
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देश के सबसे बड़े बिजली घर विंध्याचल परियोजना के प्रमुख राजेश भटनागर ने बुधवार को बताया कि मार्च तक एनटीपीसी की उत्पादन क्षमता 47 हजार से बढ़कर 50 हजार मेगावाट हो जाएगी। इसके बाद इसे एक लाख मेगावाट तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
परियोजना के प्रशासनिक सभागार में उन्होंने बताया कि उत्पादन क्षमता के मामले में एनटीपीसी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी, प्लांट लोड फैक्टर के मामले में दूसरी, टॉप 20 कंपनियों में 11वीं कंपनी बन चुकी है। कहा कि यहां राख निस्तारण बड़ी चुनौती है। इसके निराकरण के लिए एनसीएल की गोरबी खदान को लेकर चल रही बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। कोल इंडिया के पास प्रस्ताव गया है। वहां से हरी झंडी मिलते ही कवायद आगे बढ़ा दी जाएगी।
बताया कि पश्चिमी ग्रिड में पूरी बिजली की आठ प्रतिशत और पूरे देश में आपूर्ति की जा रही बिजली की 2.7 प्रतिशत पूर्ति एनटीपीसी विंध्याचल से होती है। सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सेफ्टी पार्क में लाइव इलेक्ट्रिकल वर्क कर कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चिमनियों से कम से कम प्रदूषण निकले, इसके लिए परियोजना की एक यूनिट में प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम (ईएसपी) का नवीनीकरण हो गया है। शेष सात में भी नई ईएसपी लगेगी। मार्च तक परियोजना में एक फ्लू गैस सब प्लांट स्थापित होगा।
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इससे बिजली लागत में कमी और प्रदूषण नियंत्रण दोनों में मदद मिलेगी। विंध्य चिकित्सालय, ब्लड बैंक में सुविधाओं का विस्तार, सुहासिनी संघ के रचनात्मक कार्यक्रमों में तेजी, सीएसआर से निर्धन छात्रों को मदद की जाएगी। वाटर एटीएम जैसी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष 75 हजार पौधे रोपे जा रहे हैं। इस मौके पर महाप्रबंधक एके तिवारी, एजीएम स्निग्धा गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
परियोजना के प्रशासनिक सभागार में उन्होंने बताया कि उत्पादन क्षमता के मामले में एनटीपीसी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी, प्लांट लोड फैक्टर के मामले में दूसरी, टॉप 20 कंपनियों में 11वीं कंपनी बन चुकी है। कहा कि यहां राख निस्तारण बड़ी चुनौती है। इसके निराकरण के लिए एनसीएल की गोरबी खदान को लेकर चल रही बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। कोल इंडिया के पास प्रस्ताव गया है। वहां से हरी झंडी मिलते ही कवायद आगे बढ़ा दी जाएगी।
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बताया कि पश्चिमी ग्रिड में पूरी बिजली की आठ प्रतिशत और पूरे देश में आपूर्ति की जा रही बिजली की 2.7 प्रतिशत पूर्ति एनटीपीसी विंध्याचल से होती है। सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सेफ्टी पार्क में लाइव इलेक्ट्रिकल वर्क कर कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चिमनियों से कम से कम प्रदूषण निकले, इसके लिए परियोजना की एक यूनिट में प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम (ईएसपी) का नवीनीकरण हो गया है। शेष सात में भी नई ईएसपी लगेगी। मार्च तक परियोजना में एक फ्लू गैस सब प्लांट स्थापित होगा।
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इससे बिजली लागत में कमी और प्रदूषण नियंत्रण दोनों में मदद मिलेगी। विंध्य चिकित्सालय, ब्लड बैंक में सुविधाओं का विस्तार, सुहासिनी संघ के रचनात्मक कार्यक्रमों में तेजी, सीएसआर से निर्धन छात्रों को मदद की जाएगी। वाटर एटीएम जैसी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष 75 हजार पौधे रोपे जा रहे हैं। इस मौके पर महाप्रबंधक एके तिवारी, एजीएम स्निग्धा गोस्वामी आदि मौजूद रहे।