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Sonebhadra News: 35 साल पहले डाला में बहा था खून, पुलिस की गोली से छात्र समेत नौ की गई थी जान
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डाला स्थित शहीद स्मारक स्थल।
डाला। आज फिर से दो जून का दिन है। करीब 35 साल पहले आज ही के दिन लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे एक छात्र समेत नौ लोग पुलिस की गोलियों के शिकार हो गए थे। वह उत्तर प्रदेश सीमेंट निगम के अधीन संचालित फैक्ट्री डाला को निजी हाथों में बेचे जाने का विरोध कर रहे थे। घटना को साढ़े तीन दशक बीतने के बाद भी डाला वासियों के जेहन में वह मंजर आज भी ताजा है। यही कारण है कि दो जून आते ही लोग घटना के विरोध में लामबंद होकर जाते हैं। प्रतीकात्मक रूप में ही सही, लेकिन सड़क पर उतरकर विरोध जताते हैं।
चूना पत्थर की प्रचूर उपलब्धता के आधार पर सरकार ने उत्तर प्रदेश सीमेंट निगम के माध्यम से चुर्क और डाला में सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना की थी। लंबे समय तक यह सीमेंट फैक्ट्री हजारों परिवारों की आजीविका का आधार रही। वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने फैक्ट्री को घाटे में बताकर डालमिया ग्रुप को महज 26 करोड़ में बेच दिया। इसकी भनक लगते ही फैक्ट्री के सैकड़ों कर्मचारी, मजदूर व आम लोग आंदोलित हो गए। सड़क पर उतरकर विरोध जताने लगे। आलम यह रहा कि हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस को गोलियां दागनी पड़ी। इस गोलीकांड में छात्र राकेश कुमार त्रिपाठी के अलावा मजदूर रामप्यारे कुशवाहा विधि, शैलेंद्र कुमार राय, सुरेंद्र द्विवेदी, बालगोविंद, दीनानाथ, नंदकुमार गुप्ता, नामधारी, रामनरेश की मौत हो गई थी। नौ आंदोलनकारियों की शहादत के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा और फिर से फैक्ट्री का संचालन शुरू हुआ। हालांकि कुछ वर्षों बाद फिर से कोर्ट की दखल पर फैक्ट्री को जेपी ग्रुप ने सर्वाधिक बोली लगाकर खरीद लिया। बाद में डाला सीमेंट फैक्ट्री अल्टाट्रेक के अधिकार क्षेत्र में आ गई। दो जून की इस घटना के विरोध में आज भी लोग प्रतीकात्मक रूप से प्रदर्शन करते हैं। वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर निर्मित शहीद स्थल पर एकत्रित होकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
सुबह पूजा, फिर बंटेगा शरबत, शाम को सुंदरकांड का पाठ
डाला। दो जून की घटना के विरोध में शहीद स्मारक पर पूरे दिन कार्यक्रम चलेगा। व्यापार मंडल के अध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि आंदोलन में शहीद साथियों की स्मृति में सुबह 10 बजे से शहीद स्मारक पर पूजन होगा। इसके बाद दोपहर में राहगीरों को शरबत पिलाया जाएगा। गोलीकांड के समय पर ठीक अपराह्न 3.20 बजे मानव श्रृंखला बनाकर वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग को कुछ देर के लिए सांकेतिक रूप से अवरुद्ध किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा होगी। शाम छह बजे से सुंदर कांड पाठ सहित अन्य कार्यक्रम होंगे। यह सभी कार्यक्रम स्थानीय आमजन के सहयोग से किया जाएगा।
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चूना पत्थर की प्रचूर उपलब्धता के आधार पर सरकार ने उत्तर प्रदेश सीमेंट निगम के माध्यम से चुर्क और डाला में सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना की थी। लंबे समय तक यह सीमेंट फैक्ट्री हजारों परिवारों की आजीविका का आधार रही। वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने फैक्ट्री को घाटे में बताकर डालमिया ग्रुप को महज 26 करोड़ में बेच दिया। इसकी भनक लगते ही फैक्ट्री के सैकड़ों कर्मचारी, मजदूर व आम लोग आंदोलित हो गए। सड़क पर उतरकर विरोध जताने लगे। आलम यह रहा कि हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस को गोलियां दागनी पड़ी। इस गोलीकांड में छात्र राकेश कुमार त्रिपाठी के अलावा मजदूर रामप्यारे कुशवाहा विधि, शैलेंद्र कुमार राय, सुरेंद्र द्विवेदी, बालगोविंद, दीनानाथ, नंदकुमार गुप्ता, नामधारी, रामनरेश की मौत हो गई थी। नौ आंदोलनकारियों की शहादत के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा और फिर से फैक्ट्री का संचालन शुरू हुआ। हालांकि कुछ वर्षों बाद फिर से कोर्ट की दखल पर फैक्ट्री को जेपी ग्रुप ने सर्वाधिक बोली लगाकर खरीद लिया। बाद में डाला सीमेंट फैक्ट्री अल्टाट्रेक के अधिकार क्षेत्र में आ गई। दो जून की इस घटना के विरोध में आज भी लोग प्रतीकात्मक रूप से प्रदर्शन करते हैं। वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर निर्मित शहीद स्थल पर एकत्रित होकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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सुबह पूजा, फिर बंटेगा शरबत, शाम को सुंदरकांड का पाठ
डाला। दो जून की घटना के विरोध में शहीद स्मारक पर पूरे दिन कार्यक्रम चलेगा। व्यापार मंडल के अध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि आंदोलन में शहीद साथियों की स्मृति में सुबह 10 बजे से शहीद स्मारक पर पूजन होगा। इसके बाद दोपहर में राहगीरों को शरबत पिलाया जाएगा। गोलीकांड के समय पर ठीक अपराह्न 3.20 बजे मानव श्रृंखला बनाकर वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग को कुछ देर के लिए सांकेतिक रूप से अवरुद्ध किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा होगी। शाम छह बजे से सुंदर कांड पाठ सहित अन्य कार्यक्रम होंगे। यह सभी कार्यक्रम स्थानीय आमजन के सहयोग से किया जाएगा।
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