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ताड़का का वध होते ही श्रीराम के लगे जयकारे
Updated Fri, 12 Oct 2018 11:53 PM IST
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सोनभद्र। जिले में चल रही रामलीला में गुरुवार की रात कलाकारों ने कई तरह की लीला का मंचन किया। राबर्ट्सगंज में श्रीराम-सीता विवाह का मंचन किया गया। असनहर में ताड़का वध और रेणुकूट में राम-सीता जन्म का मंचन किया गया। इस दौरान आरती हुई। राबर्ट्सगंज में श्रीराम-सीता विवाह के मंचन के दौरान जय श्रीराम के नारे से गुंजायमान हुए।
बभन संवाददाता के अनुसार ग्रामीण नव युवक रामलीला मंडली असनहर में गुरुवार की रात विश्वामित्र द्वारा राम, लक्ष्मण को राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए मांगना और ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। यहां मंचन में विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों के विघ्न पैदा करने पर विश्वामित्र ने अयोध्या नरेश राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम लक्ष्मण को मांगा। राजा दशरथ ने राम और लक्ष्मण को देने से इंकार कर दिया। दशरथ के इंकार करने पर विश्वामित्र मुनि क्रोधित हो उठे और श्राप देने लगे। तभी गुरू वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझा बुझाकर राम और लक्ष्मण को देने को कहा। जब विश्वामित्र मुनि, राम और लक्ष्मण को आश्रम आते देखा तो ताड़क वन में ताड़का नाम की राक्षसी ने उन पर हमला किया। इस पर श्री राम ने उसका वध कर दिया। व्यास लालकेश ने कलाकारों से रामलीला का मंचन कराया। यहां सूर्यकांत दुबे, मटुकधारी कुशवाहा, मेंहीलाल, कृष्ण कुमार, उमेश कुमार मौजूद रहे। रेणुकूट: हिण्डाल्को रामलीला मैदान पर दूसरे दिन की रामलीला का शुभारंभ राजा दशरथ के किये गये पुत्रेष्ठि यज्ञ के मंचन से हुआ। पुत्रेष्ठि यज्ञ से राजा दशरथ की तीनों रानियों कौशल्या, कैकेई और सुमित्रा को पुत्र रत्नों की प्राप्ति होती है। रामलला के जन्म की खबर पर पूरे अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ जाती है और रामलला के दर्शन से पूरा मैदान श्री राम के जयकारे से गूंज उठता है। इसके बाद की लीलाओं में गुरु वशिष्ठ नामकरण करते हुए चारों भाइयों को राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुध्न का नाम प्रदान करते हैं। चारो भाई गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा प्राप्त करते हुुए अपने बाल सुलभ लीलाओं से दर्शकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उधर जनकपुर में पड़े भीषण अकाल से प्रजा की रक्षा के लिए राजा जनक स्वयं हल चलाते हैं और सीता उत्पत्ति का बहुत ही मनोहारी दृश्य देखकर लीला प्रेमी मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं। यहां मुख्य अतिथि हिण्डाल्को फ़ैब्रिकेशन प्लांट के अध्यक्ष निर्मल्या सेन व नंदिनी सेन ने विधि-विधान से गणेश पूजन करके लीलाओं का शुभारंभ किया। यहां रामलीला परिषद के अध्यक्ष वीएन झा समेत अन्य मौजूद रहे।
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बभन संवाददाता के अनुसार ग्रामीण नव युवक रामलीला मंडली असनहर में गुरुवार की रात विश्वामित्र द्वारा राम, लक्ष्मण को राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए मांगना और ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। यहां मंचन में विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों के विघ्न पैदा करने पर विश्वामित्र ने अयोध्या नरेश राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम लक्ष्मण को मांगा। राजा दशरथ ने राम और लक्ष्मण को देने से इंकार कर दिया। दशरथ के इंकार करने पर विश्वामित्र मुनि क्रोधित हो उठे और श्राप देने लगे। तभी गुरू वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझा बुझाकर राम और लक्ष्मण को देने को कहा। जब विश्वामित्र मुनि, राम और लक्ष्मण को आश्रम आते देखा तो ताड़क वन में ताड़का नाम की राक्षसी ने उन पर हमला किया। इस पर श्री राम ने उसका वध कर दिया। व्यास लालकेश ने कलाकारों से रामलीला का मंचन कराया। यहां सूर्यकांत दुबे, मटुकधारी कुशवाहा, मेंहीलाल, कृष्ण कुमार, उमेश कुमार मौजूद रहे। रेणुकूट: हिण्डाल्को रामलीला मैदान पर दूसरे दिन की रामलीला का शुभारंभ राजा दशरथ के किये गये पुत्रेष्ठि यज्ञ के मंचन से हुआ। पुत्रेष्ठि यज्ञ से राजा दशरथ की तीनों रानियों कौशल्या, कैकेई और सुमित्रा को पुत्र रत्नों की प्राप्ति होती है। रामलला के जन्म की खबर पर पूरे अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ जाती है और रामलला के दर्शन से पूरा मैदान श्री राम के जयकारे से गूंज उठता है। इसके बाद की लीलाओं में गुरु वशिष्ठ नामकरण करते हुए चारों भाइयों को राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुध्न का नाम प्रदान करते हैं। चारो भाई गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा प्राप्त करते हुुए अपने बाल सुलभ लीलाओं से दर्शकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उधर जनकपुर में पड़े भीषण अकाल से प्रजा की रक्षा के लिए राजा जनक स्वयं हल चलाते हैं और सीता उत्पत्ति का बहुत ही मनोहारी दृश्य देखकर लीला प्रेमी मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं। यहां मुख्य अतिथि हिण्डाल्को फ़ैब्रिकेशन प्लांट के अध्यक्ष निर्मल्या सेन व नंदिनी सेन ने विधि-विधान से गणेश पूजन करके लीलाओं का शुभारंभ किया। यहां रामलीला परिषद के अध्यक्ष वीएन झा समेत अन्य मौजूद रहे।
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