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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   20 years' imprisonment for rape and abortion, judge said: The crime was committed with premeditation, no relief is justified.

दुष्कर्म गर्भपात में 20 साल की सजा,जज ने कहा: सोच-समझकर किया गया अपराध, राहत का औचित्य नहीं

Sun, 07 Jul 2024 02:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jul 2024 02:10 AM IST
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20 years' imprisonment for rape and abortion, judge said: The crime was committed with premeditation, no relief is justified.
सोनभद्र। किशोरी से दुष्कर्म और फिर धोखे से दवा खिलाकर गर्भपात कराने के मामले में विशेष जज पॉक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की कोर्ट ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 1.28 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। शनिवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने किशोरी के साथ कई बार दुष्कर्म किया, जिस कारण वह गर्भवती हुई। यह सोच समझकर किया गया अपराध है। उसे परिवीक्षा का लाभ देने का कोई औचित्य नहीं है।
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पिपरी थाना क्षेत्र निवासी महिला ने पिपरी थाने में दी तहरीर में बताया कि रेणुकूट के शिवा पार्क निवासी शशि नाई उर्फ कलुआ ने उसकी नाबालिग बेटी को बहला फुसलाकर करीब एक साल से अवैध संबंध बनाया था। जब बेटी के पेट में तीन माह का गर्भ ठहर गया तो धोखे से दवा खिला दिया। आठ मार्च 2016 को बेटी घर आकर बेहोश हो गई। उसे हिंडाल्को अस्पताल में भर्ती कराया तो तीन माह का मृत बच्चा पैदा हुआ। बेटी की किसी तरह से जान बची। तहरीर पर पुलिस ने 20 मार्च 2016 को केस दर्ज कर मामले की जांच की। कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने प्रथम अपराध बताते हुए कम से कम सजा की मांग की तो वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता दिनेश प्रसाद अग्रहरि ने कहा कि नाबालिग पीड़िता से कई बार दुष्कर्म किया गया, वह गर्भवती हुई। जब तीन माह के गर्भ का पता चला तो आरोपी ने उसे दवा खिलाकर गर्भपात करा दिया। यह गंभीर प्रकृति का अपराध है। इसमें कठोरतम सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जुर्रत न कर सके। कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकारते हुए कहा कि शशि नाई उर्फ कलुआ का अपराध पूरी तरह सोच समझकर साजिश के तहत किया गया है। इसमें किसी तरह की राहत देने का औचित्य नहीं है। कोर्ट उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और 1.28 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से एक लाख रुपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश कुमार अग्रहरी, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस की।
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