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Sonebhadra News: 19 बच्चे-किशोर लापता, दो हैं इकलौते, कोई 10 तो कोई 5 साल से गायब

Wed, 18 Mar 2026 11:37 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:37 PM IST
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19 children and teenagers are missing, two are single, some have been missing for 10 years and some for 5 years.
राबट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बबुरी गांव में मासूम बच्चें के गायब होने की जानकारी देते माता, पित
सोनभद्र। कलेजे के टुकड़े को खोने का गम क्या होता है, यह वह माता-पिता ही समझते हैं, जिन पर यह बीत रही है। जिले में ऐसे 19 परिवार हैं, जिनकी संतान वर्षों से लापता हैं। कोई चार साल में गुम हुआ तो कोई 10, 12 साल की उम्र में। परिजन उन्हें ढूंढते-ढूंढते थक चुके हैं। मगर लापता बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला। इनमें 2 बच्चे ऐसे हैं, जो इकलौते हैं। बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं के बीच हमने उन परिवारों से बात की, जिनके लाडले घर नहीं लौटे। जिगर के टुकड़े के लापता होने से माता-पिता बेहाल हैं। वह असहनीय पीड़ा से जूझ रहे हैं। ईश्वर से बस यही कामना करते हैं कि जो दुख उन्हें मिला, वह किसी और को न मिले। लापता बच्चों के परिवार के हाल को दर्शाते इस अभियान की पहली कड़ी।
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बस 15 मिनट के लिए हटी निगाह, लापता हो गया इकलौता पुत्र

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बबुरी गांव निवासी ओमप्रकाश का पुत्र शुभम साढ़े चार साल से लापता है। तब उसकी उम्र 4 साल थी। शुभम इकलौता पुत्र है। बड़े मन्नतों के बाद पैदा हुआ था। परिवार को आज भी 16 अक्तूबर 2021 का वह दिन नहीं भूलता, जब घर के बाहर खेलते हुए बेटा अचानक लापता हो गया।
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पिता ओमप्रकाश बताते हैं कि सुबह करीब आठ से नौ बजे के बीच शुभम घर के सामने आम के पेड़ के नीचे खेल रहा था। घर के लोग अपने-अपने काम में लगे थे। महज 15 मिनट के भीतर जब मां राधिका बाहर आईं तो बेटा गायब था। पहले आसपास तलाश की गई, फिर पूरे गांव में खोजबीन हुई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। सूचना पर पुलिस ने ड्रोन कैमरा और डॉग स्कवॉड की मदद से भी खोजबीन की लेकिन सफलता नहीं मिली।
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ओमप्रकाश बताते हैं कि बेटे की तलाश में वे दिल्ली, मुंबई तक गए। दो महीने पहले रांची में बच्चों के मिलने की सूचना पर वहां भी पहुंचे, मगर निराशा ही हाथ लगी। दादी प्रभावती की आंखें आज भी पोते की राह तकते-तकते नम हो जाती हैं। वह कहती हैं कि जब भी कोई बच्चा घर के सामने दिखता है तो लगता है शुभम ही लौट आया है।



मां को सिर्फ एक ही उम्मीद शायद कोई चमत्कार हो जाए

मां राधिका बहुत कुछ बोल नहीं पाईं। रुंधे गले से बस इतना कहा कि उनका बेटा उनकी आंखों के सामने आम के पेड़ के नीचे खेल रहा था। स्नान के बाद वह सामने वाले कमरे में कपड़े पहनकर तैयार हो रही थी। महज 15 मिनट बाद बाहर निकली तो देखा कि शुभम गायब है। हर जगह तलाश की। मत्था टेका। मन्नत मांगी। थाने-चौकी से लेकर पुलिस लाइन तक गुहार लगाई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। उम्मीद है कि शायद कोई चमत्कार हो जाए।

मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए साल 2014 से अब तक लापता बेटे-बेटियों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। तीन बेटियों को ढूंढ़ने में कामयाबी भी मिल चुकी है। शेष के लिए टीमें लगाई गई हैं। - अभिषेक वर्मा, एसपी


लापता बेटी-बेटियों की तलाश के लिए बाल कल्याण समिति की लगातार पहल जारी है। हर माह बैठक में इस मसले पर प्रमुखता से चर्चा की जाती है। कई बेटे-बेटियों को ढ़ूंढकर लाने में सफलता भी मिली है। फिलहाल 19 ऐसे किशोर-किशोरी है जिनकी भी तलाश जल्द पूरी हो सके। इसका प्रयास जारी है। -अखिल नारायण देव पांडेय, अध्यक्ष सीडब्लूसी।
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