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परियोजना को निजी हाथों में देने के फैसले का विरोध
Updated Thu, 03 May 2018 11:16 PM IST
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अनपरा । 1320 मेगावाट करछना परियोजना को निजी क्षेत्र में देने के कैबिनेट के फैसले का उत्पादन निगम अधिकारी एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा मंत्री से मिलकर अपना पक्ष रखेगा।
महासचिव उत्पल शंकर ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य उत्पादन निगम लिमिटेड के स्वामित्व में कराए जाने का निर्णय पिछली सरकार ने लिया था। उत्पादन निगम द्वारा निर्माण कार्य के लिए सभी औपचारिकताएं भी पूर्ण कर ली गई थी। लेकिन प्रदेश सरकार ने उसे निजी क्षेत्र में देने का फैसला कर लिया। कैबिनेट द्वारा अचानक लिए गए इस निर्णय से उत्पादन निगम लिमिटेड में कार्यरत अभियंताओं एवं कार्मिकों में आक्रोश है। कहा कि उत्पादन निगम द्वारा पावर कारपोरेशन को दी जाने वाली बिजली पर सरचार्ज नहीं लिया जाता है। जबकि पावर कारपोरेशन को निजी विद्युत उत्पादन कंपनियों को 16 प्रतिशत आरओई तथा विलंब के लिए सरचार्ज भी देना पड़ता है। ऐसे में करछना परियोजना को निजी क्षेत्र में देने से पावर कारपोरेशन को निजी बिजली कंपनियों से उत्पादन निगम लिमिटेड की अपेक्षा अधिक दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी। जिससे प्रदेश की जनता महंगी बिजली लेने को मजबूर होगी। ऐसी स्थितिस्त्रत्त् में करछना परियोजना को निजी हाथों में देने का फैसला जनहित में नहीं है।
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महासचिव उत्पल शंकर ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य उत्पादन निगम लिमिटेड के स्वामित्व में कराए जाने का निर्णय पिछली सरकार ने लिया था। उत्पादन निगम द्वारा निर्माण कार्य के लिए सभी औपचारिकताएं भी पूर्ण कर ली गई थी। लेकिन प्रदेश सरकार ने उसे निजी क्षेत्र में देने का फैसला कर लिया। कैबिनेट द्वारा अचानक लिए गए इस निर्णय से उत्पादन निगम लिमिटेड में कार्यरत अभियंताओं एवं कार्मिकों में आक्रोश है। कहा कि उत्पादन निगम द्वारा पावर कारपोरेशन को दी जाने वाली बिजली पर सरचार्ज नहीं लिया जाता है। जबकि पावर कारपोरेशन को निजी विद्युत उत्पादन कंपनियों को 16 प्रतिशत आरओई तथा विलंब के लिए सरचार्ज भी देना पड़ता है। ऐसे में करछना परियोजना को निजी क्षेत्र में देने से पावर कारपोरेशन को निजी बिजली कंपनियों से उत्पादन निगम लिमिटेड की अपेक्षा अधिक दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी। जिससे प्रदेश की जनता महंगी बिजली लेने को मजबूर होगी। ऐसी स्थितिस्त्रत्त् में करछना परियोजना को निजी हाथों में देने का फैसला जनहित में नहीं है।
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