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अब हर छह माह में जांची जाएगी पानी की गुणवता
Updated Mon, 09 Apr 2018 11:04 PM IST
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जिले के दक्षिणांचल के गांवों में दूषित पानी की जांच अब हर छह माह पर होगी। जांच कर पानी में फ्लोराइड, पारा की मात्रा की जांच की जाएगी। रासायनिक पदार्थों की अधिकता वाले पानी का सेवन कर लोग विभिन्न तरह के रोगों के शिकार हो रहे हैं। प्रमुख सचिव पंचायत राज ने निर्देश दिया है कि अब राज्य वित्त और 14वें वित्त की धनराशि से हर छह माह पर पानी में प्रदूषण की मात्रा की जांच की जाए।
जिले के दक्षिणांचल में कई औद्योगिक कंपनियां हैं। उनसे निकलने वाला प्रदूषण आसपास के गांवों को प्रभावित कर रहा है। उद्योग-धंधों से निकलने वाले सूक्ष्म कण हमारे फेफड़ों में जाकर तमाम बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। जिले में पारे के खतरनाक होने के नाते तीन प्रकार के लक्षण सामने आए हैं। इनमें मसूड़ों का नीला होना, गर्भपात एवं हाथों में कंपन होने लगता है। पारे के कारण इस तरह की बीमारियां गुलालझरिया, कुबरी, लोझरा, पड़रवा, गुलालाडीह, जोगेंद्रा, कजरहट, डहकुडंडी, पड़रछ, करैल, कुड़वा, करहिया, जामपानी, जरहा, डुमरहर आदि गांव में मिलने लगी है।
सूक्ष्म कणों की वजह से फेफड़ों को कमजोर करने वाली बीमारी का पता पडरछ, जामपानी, केवाल, डगडउवाटोला, सतबहिनी, सिरसोती, डोडह, लोझरा, कुबरी में अधिक मात्रा में है। इसी तरह फ्लोराइड से दांत पीले होने की समस्या एवं हड्डियां कमजोर होने के मुख्य लक्षण पड़रछ, गुलाल झरिया, कटौधीं, जरहा, डोडहर, बीजपुर, कुबरी, लोझरा, पडरवा आदि गांव में पाई गई है। पानी पीने और सब्जियों के सेवन से मरकरी रूपी विष को शरीर में कम किया जा सकता है। इसके अलावा नाखून व बाल काटते रहने से भी इस तरह की समस्या शरीर में कम होती है।
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झारोकला के प्रधान रामवृक्ष का कहना है कि पंचायत राज के प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया है कि राज्य वित्त और 14वें वित्त से हर छह माह पर पानी की जांच होगी। इससे पानी में प्रदूषण की अधिकता सामने आएगी और जलस्रोतों को सही कराने पर काम होगा।
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जिले के दक्षिणांचल में कई औद्योगिक कंपनियां हैं। उनसे निकलने वाला प्रदूषण आसपास के गांवों को प्रभावित कर रहा है। उद्योग-धंधों से निकलने वाले सूक्ष्म कण हमारे फेफड़ों में जाकर तमाम बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। जिले में पारे के खतरनाक होने के नाते तीन प्रकार के लक्षण सामने आए हैं। इनमें मसूड़ों का नीला होना, गर्भपात एवं हाथों में कंपन होने लगता है। पारे के कारण इस तरह की बीमारियां गुलालझरिया, कुबरी, लोझरा, पड़रवा, गुलालाडीह, जोगेंद्रा, कजरहट, डहकुडंडी, पड़रछ, करैल, कुड़वा, करहिया, जामपानी, जरहा, डुमरहर आदि गांव में मिलने लगी है।
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सूक्ष्म कणों की वजह से फेफड़ों को कमजोर करने वाली बीमारी का पता पडरछ, जामपानी, केवाल, डगडउवाटोला, सतबहिनी, सिरसोती, डोडह, लोझरा, कुबरी में अधिक मात्रा में है। इसी तरह फ्लोराइड से दांत पीले होने की समस्या एवं हड्डियां कमजोर होने के मुख्य लक्षण पड़रछ, गुलाल झरिया, कटौधीं, जरहा, डोडहर, बीजपुर, कुबरी, लोझरा, पडरवा आदि गांव में पाई गई है। पानी पीने और सब्जियों के सेवन से मरकरी रूपी विष को शरीर में कम किया जा सकता है। इसके अलावा नाखून व बाल काटते रहने से भी इस तरह की समस्या शरीर में कम होती है।
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झारोकला के प्रधान रामवृक्ष का कहना है कि पंचायत राज के प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया है कि राज्य वित्त और 14वें वित्त से हर छह माह पर पानी की जांच होगी। इससे पानी में प्रदूषण की अधिकता सामने आएगी और जलस्रोतों को सही कराने पर काम होगा।