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टैंकरों से हुई पेयजलापूर्ति की जांच शुरू
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सोनभद्र। जिले में वर्ष 2018 में गर्मी में जल निगम द्वारा की गई पेयजलापूर्ति की जांच शुरू हो गई है। जल निगम से जिन गांवों में पानी की आपूर्ति हुई थी उसकी सूची तहसीलों को मुहैया करा दी है। सदर तहसील क्षेत्र में एसडीएम यमुनाधर की देखरेख में आठ टीमें जिन गांवों में पानी की आपूर्ति हुई थी वहां जाकर जांच कर रही हैं।
पूर्वांचल का बुंदेलखंड कहे जाने वाले सोनभद्र में प्रत्येक वर्ष भूजल स्तर खिसक रहा है। वहीं शुद्ध पेयजल के लिए लगाए गए आरओ प्लांट से रोजाना 15 से18 लाख लीटर पानी व्यर्थ बहा दिया जा रहा है। इस पानी के उपयोग की योजना के लिए कई बार आवाज उठी। यहां तक केंद्रीय भूजल बोर्ड, एनजीटी की तरफ से भी सुझाव दिए गए, लेकिन अभी तक ठोस कार्ययोजना नहीं बन सकी। मार्च माह मेें पहाड़ी क्षेत्रों में पानी की समस्या शुरू हो जाती है। अप्रैल के अंत तक उरमौरा, बेलछ, कनछ, कन्हौरा, सूअरसोत, मड़पा, लोढ़ी, कमोजी, पुसौली, मुसही समेत तीन सौ से अधिक गांवों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। इससे निजात दिलाने के लिए टैंकरों से पानी की आपूर्ति होती है। इस बार तो अधिकांश गांवों में ग्राम पंचायतों के टैंकरों से पानी की सप्लाई हो रही है। इसके पहले जल निगम खुद और किराए के टैंकरों से पानी की आपूर्ति कराता है। वर्ष 2018 मेें टैंकरों से पानी की आपूर्ति करने मेें सरकारी धन का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत मिलने के बाद डीएम अंकित कुमार ने उपजिलाधिकारियों की देखरेख में जिन गांवों में पानी की समस्याएं हुई थीं उनकी जांच शुरू करा दी है। सदर तहसीलदार विकास पांडेय ने कहा कि आठ टीमें पिछले वर्ष टैंकरों से हुई पेयजलापूर्ति की जांच कर रही है।
पूर्वांचल का बुंदेलखंड कहे जाने वाले सोनभद्र में प्रत्येक वर्ष भूजल स्तर खिसक रहा है। वहीं शुद्ध पेयजल के लिए लगाए गए आरओ प्लांट से रोजाना 15 से18 लाख लीटर पानी व्यर्थ बहा दिया जा रहा है। इस पानी के उपयोग की योजना के लिए कई बार आवाज उठी। यहां तक केंद्रीय भूजल बोर्ड, एनजीटी की तरफ से भी सुझाव दिए गए, लेकिन अभी तक ठोस कार्ययोजना नहीं बन सकी। मार्च माह मेें पहाड़ी क्षेत्रों में पानी की समस्या शुरू हो जाती है। अप्रैल के अंत तक उरमौरा, बेलछ, कनछ, कन्हौरा, सूअरसोत, मड़पा, लोढ़ी, कमोजी, पुसौली, मुसही समेत तीन सौ से अधिक गांवों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। इससे निजात दिलाने के लिए टैंकरों से पानी की आपूर्ति होती है। इस बार तो अधिकांश गांवों में ग्राम पंचायतों के टैंकरों से पानी की सप्लाई हो रही है। इसके पहले जल निगम खुद और किराए के टैंकरों से पानी की आपूर्ति कराता है। वर्ष 2018 मेें टैंकरों से पानी की आपूर्ति करने मेें सरकारी धन का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत मिलने के बाद डीएम अंकित कुमार ने उपजिलाधिकारियों की देखरेख में जिन गांवों में पानी की समस्याएं हुई थीं उनकी जांच शुरू करा दी है। सदर तहसीलदार विकास पांडेय ने कहा कि आठ टीमें पिछले वर्ष टैंकरों से हुई पेयजलापूर्ति की जांच कर रही है।
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