{"_id":"5cf012ebbdec220766496b3f","slug":"155923740115-sonbhadra-news131","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाठ क्षेत्र के ग्रामीण चुआंड व गंदे नालों से प्यास बुझाने को विवश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाठ क्षेत्र के ग्रामीण चुआंड व गंदे नालों से प्यास बुझाने को विवश
विज्ञापन
विज्ञापन
अनपरा। ओबरा विधानसभा के भाठ क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य ग्राम सभाओं में पर्याप्त पेयजल की सुविधा नहीं होने से भीषण गर्मी में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। पेयजल की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण चुंआड व नालों के दूषित पानी से प्यास बुझाने को विवश है।
भाठ क्षेत्र के जोगेन्द्रा, रणहोर, पाटी, पनारी आदि कई ग्राम सभाओं में पर्याप्त हैंडपंप नहीं होने से इन गांवों के लोग गर्मी के दिनों मे चुंआड़ और नालों के दूषित पानी पीने को विवश हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे ने इन ग्रामों में प्रत्येक पांच घर के मध्य हैंडपंप स्थापित किए जाने हेतु मार्च में ही जिलाधिकारी सोनभद्र को पत्र प्रेषित कर हैंडपंप लगाने की मांग की थी। जिसके जवाब मे मुख्य विकास अधिकारी सोनभद्र द्वारा बताया गया कि विधायक व विधान परिषद सदस्यो कि संस्तुति व उनके द्वारा प्रेषित सूची मे नाम व स्थान सम्मिलित होने पर ही हैण्डपम्प स्थापित किये जा सकेंगे। भीषण पेयजल से जुझते गांव व ग्रामीण अब इंतजार कर रहे है कि कब विधायक व विधानपरिषद सदस्य उनके गांव आयेंगे और वह अपनी पेयजल समस्या बतायेंगे तथा संस्तुति के उपरांत उन्हे हैण्डपम्प मिल सकेंगे तथा पेयजल समस्या हल हो सकेगी। सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे ने इन गांवो मे एनसीएल के सामाजिक नैगमिक दायित्व कार्यक्रम के तहत व केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को भी हैण्डपम्प स्थापित किये जाने हेतु पत्र भेजकर गुहार लगायी है। उन्होंने कहा कि विधायक व विधान परिषद के सदस्यों की संस्तुति नही होगी तो क्या ग्रामीण पेयजल संकट से जुझते रहेंगे। उन्होंने जिलाधिकारी सोनभद्र से मांग किया है कि इन गांवो मे पेयजल संकट के स्थाई निराकरण हेतु जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास के मद से हैण्डपम्प स्थापित किये जाये अथवा पेयजल परियोजनाओ का निर्माण किया जाए।
भाठ क्षेत्र के जोगेन्द्रा, रणहोर, पाटी, पनारी आदि कई ग्राम सभाओं में पर्याप्त हैंडपंप नहीं होने से इन गांवों के लोग गर्मी के दिनों मे चुंआड़ और नालों के दूषित पानी पीने को विवश हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे ने इन ग्रामों में प्रत्येक पांच घर के मध्य हैंडपंप स्थापित किए जाने हेतु मार्च में ही जिलाधिकारी सोनभद्र को पत्र प्रेषित कर हैंडपंप लगाने की मांग की थी। जिसके जवाब मे मुख्य विकास अधिकारी सोनभद्र द्वारा बताया गया कि विधायक व विधान परिषद सदस्यो कि संस्तुति व उनके द्वारा प्रेषित सूची मे नाम व स्थान सम्मिलित होने पर ही हैण्डपम्प स्थापित किये जा सकेंगे। भीषण पेयजल से जुझते गांव व ग्रामीण अब इंतजार कर रहे है कि कब विधायक व विधानपरिषद सदस्य उनके गांव आयेंगे और वह अपनी पेयजल समस्या बतायेंगे तथा संस्तुति के उपरांत उन्हे हैण्डपम्प मिल सकेंगे तथा पेयजल समस्या हल हो सकेगी। सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे ने इन गांवो मे एनसीएल के सामाजिक नैगमिक दायित्व कार्यक्रम के तहत व केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को भी हैण्डपम्प स्थापित किये जाने हेतु पत्र भेजकर गुहार लगायी है। उन्होंने कहा कि विधायक व विधान परिषद के सदस्यों की संस्तुति नही होगी तो क्या ग्रामीण पेयजल संकट से जुझते रहेंगे। उन्होंने जिलाधिकारी सोनभद्र से मांग किया है कि इन गांवो मे पेयजल संकट के स्थाई निराकरण हेतु जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास के मद से हैण्डपम्प स्थापित किये जाये अथवा पेयजल परियोजनाओ का निर्माण किया जाए।
विज्ञापन