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खेती और पशुपालन के नवीनतम तकनीक की दी जानकारी
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दुद्धी। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत डीआर पैलेस में आयोजित चोपन और दुद्धी ब्लाक के पांच दिवसीय कृषि सखी एवं पशु सखी का जिलास्तरीय आवासीय प्रशिक्षण का रविवार की देर शाम समापन हो गया। आखिरी दिन 30 पशु सखियों को तुर्रीडीह गांव ले जाकर पशुपालन से संबंधित विभिन्न गतिविधियां दिखाई गई। 30 कृषि सखियों की टीम को नगवां भेजकर भी यहीं जानकारी दी गई।
प्रशिक्षक उपेंद्र कुमार ने कृषि सखियों को श्रीविधि से खेती, जैविक खेती, जैविक खाद बनाने और उसका उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया। बताया कि नवीनतम तकनीक से वैज्ञानिक एवं जैविक खेती की मुहिम को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए कृषि सखी का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे जहां रासायनिक खादों के प्रयोग के मजबूरी से निजात मिलेगा। वहीं जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से उपज के साथ मिट्टी की सेहत में भी सुधार होगा। उन्होंने बताया कि वर्मी कंपोस्ट खाद धीरे-धीरे पोषण देती है, जिसे पौधे आवश्यकतानुसार अवशोषित करते हैं। इसके प्रयोग से किसान का खर्च कम और आमदनी अधिक होती है।वर्मी कम्पोस्ट खाद में मल-मूत्र, कूड़ा-करकट, खर-पतवार आदि का इस्तेमाल होने से वातावरण स्वच्छ होता है। पशु सखी प्रशिक्षक राजेंद्र कुमार वैश्य ने कहा कि समूह से जुड़े महिलाओं के लिए रोजगार के रूप में पशुपालन बड़ा विकल्प है। उन्नत नस्ल के पशुपालने से काफी आमदनी की जा सकती है। पशुओं के रोगों को पहचानने, विभिन्न तरह के टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान आदि की जानकारी दी। बीआरपी सुनीता देवी, कुसुम देवी, पीआरपी सीताराम कुमार, मिथिलेश कुमार, पूनम कुमारी आदि मौजूद रहे।
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प्रशिक्षक उपेंद्र कुमार ने कृषि सखियों को श्रीविधि से खेती, जैविक खेती, जैविक खाद बनाने और उसका उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया। बताया कि नवीनतम तकनीक से वैज्ञानिक एवं जैविक खेती की मुहिम को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए कृषि सखी का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे जहां रासायनिक खादों के प्रयोग के मजबूरी से निजात मिलेगा। वहीं जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से उपज के साथ मिट्टी की सेहत में भी सुधार होगा। उन्होंने बताया कि वर्मी कंपोस्ट खाद धीरे-धीरे पोषण देती है, जिसे पौधे आवश्यकतानुसार अवशोषित करते हैं। इसके प्रयोग से किसान का खर्च कम और आमदनी अधिक होती है।वर्मी कम्पोस्ट खाद में मल-मूत्र, कूड़ा-करकट, खर-पतवार आदि का इस्तेमाल होने से वातावरण स्वच्छ होता है। पशु सखी प्रशिक्षक राजेंद्र कुमार वैश्य ने कहा कि समूह से जुड़े महिलाओं के लिए रोजगार के रूप में पशुपालन बड़ा विकल्प है। उन्नत नस्ल के पशुपालने से काफी आमदनी की जा सकती है। पशुओं के रोगों को पहचानने, विभिन्न तरह के टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान आदि की जानकारी दी। बीआरपी सुनीता देवी, कुसुम देवी, पीआरपी सीताराम कुमार, मिथिलेश कुमार, पूनम कुमारी आदि मौजूद रहे।
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