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परियोजना के निजीकरण से महंगी होगी बिजली
Updated Thu, 03 May 2018 11:04 PM IST
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ओबरा। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इलाहाबाद करछना तापीय परियोजना को निजी क्षेत्र को सौपने के कैबिनेट के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
अभियंता संघ के केंद्रीय अध्यक्ष इं. जीके मिश्र व ओबरा-पिपरी क्षेत्र के सचिव इं. अदालत वर्मा ने बताया कि करछना बिजली परियोजना को निजी क्षेत्र को सौंपने जाने से महंगी बिजली मिलेगी। इसका भार आम जनता पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 1320 मेगावॉट क्षमता की करछना परियोजना को निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कैबिनेट के निर्णय का विरोध करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री से पुनर्विचार करने की मांग की है। संघर्ष समिति के संयोजक इं. शैलेंद्र दुबे ने कहा कि निजीकरण का निर्णय संघर्ष समिति और प्रमुख चिव ऊर्जा के बीच पांच अप्रैल को हुए लिखित समझौते का उल्लंघन है। यह समझौता ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की मौजूदगी में हुआ था। समझौते में कहा गया था कि कर्मचारियों की सहमति के बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।
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अभियंता संघ के केंद्रीय अध्यक्ष इं. जीके मिश्र व ओबरा-पिपरी क्षेत्र के सचिव इं. अदालत वर्मा ने बताया कि करछना बिजली परियोजना को निजी क्षेत्र को सौंपने जाने से महंगी बिजली मिलेगी। इसका भार आम जनता पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 1320 मेगावॉट क्षमता की करछना परियोजना को निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कैबिनेट के निर्णय का विरोध करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री से पुनर्विचार करने की मांग की है। संघर्ष समिति के संयोजक इं. शैलेंद्र दुबे ने कहा कि निजीकरण का निर्णय संघर्ष समिति और प्रमुख चिव ऊर्जा के बीच पांच अप्रैल को हुए लिखित समझौते का उल्लंघन है। यह समझौता ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की मौजूदगी में हुआ था। समझौते में कहा गया था कि कर्मचारियों की सहमति के बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।
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