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50 हजार उपभोक्ता, 14 उपकेंद्र, मोबाइल ट्रांसफार्मर नदारद
Updated Mon, 12 Jun 2017 10:11 PM IST
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अनपरा। सूबे का पावर हब, 50 हजार उपभोक्ता, 14 उपकेंद्र, बिजली विभाग को जिले से मिलने वाले राजस्व में दो तिहाई की हिस्सेदारी, फिर भी मोबाइल ट्रांसफार्मर की व्यवस्था नदारद है। यह हाल है ऊर्जाचल (पिपरी विद्युत वितरण खंड) का। यह स्थिति तब है, जब शासन स्तर से निर्देश तो जारी हैं ही, डीएम भी सीएसआर की बैठकों में परियोजना प्रतिनिधियों को हिदायत दे चुके हैं।
अनपरा-शक्तिनगर इलाके के साथ ही पूरे ऊर्जांचल परिक्षेत्र में जब कभी ट्रांसफार्मर जलता है तो उसकी जगह दूसरा ट्रांसफार्मर लेने के लिए मिर्जापुर जाना पड़ता है। सामान्यतया इस कवायद में दस से पंद्रह दिन गुजर जाते हैं। तत्काल ट्रांसफार्मर मिल भी जाए तो साधन आदि के इंतजाम में तीन से चार दिन का वक्त गुजर जाता है। परिक्षेत्र में बिजली, कोयला, अल्यमुनियम, सीमेंट परियोजनाओं के साथ कई छोटे उद्योग-धंधे स्थित हैं। इनके आस-पास सघन आबादी क्षेत्र है। ऐसे में बिजली गुल होते ही हायतौबा मच जाती है। अक्टूबर 2016 में सपा नेता रवि कुमार बड़कू ने तत्कालीन सीएम को पत्र भेज गुहार लगाई थी। वहां से बिजली विभाग और प्रशासन को जरूरी पहल का निर्देश हुआ। उस क्रम में सीएम के विशेष सचिव जीएस नवीन कुमार को अनपरा-शक्तिनगर, बीजपुर, रेणुकूट, डाला परिक्षेत्र के औद्योगिक संस्थाओं से बातचीत जारी होने की आख्या भेजी गई लेकिन अब तक पहल मूर्तरूप नहीं ले पाई। उधर, एक्सईएन लक्ष्मीशंकर का कहना था कि सीएसआर कोटे में प्रत्येक परियोजना को लाभांश का दो प्रतिशत जनसुविधाओं पर खर्च करना अनिवार्य है। उसी मद से मोबाइल ट्रांसफार्मर के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। डीएम भी निर्देशित कर चुके हैँ। बाववूद परियोजना प्रबंधन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।
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अनपरा-शक्तिनगर इलाके के साथ ही पूरे ऊर्जांचल परिक्षेत्र में जब कभी ट्रांसफार्मर जलता है तो उसकी जगह दूसरा ट्रांसफार्मर लेने के लिए मिर्जापुर जाना पड़ता है। सामान्यतया इस कवायद में दस से पंद्रह दिन गुजर जाते हैं। तत्काल ट्रांसफार्मर मिल भी जाए तो साधन आदि के इंतजाम में तीन से चार दिन का वक्त गुजर जाता है। परिक्षेत्र में बिजली, कोयला, अल्यमुनियम, सीमेंट परियोजनाओं के साथ कई छोटे उद्योग-धंधे स्थित हैं। इनके आस-पास सघन आबादी क्षेत्र है। ऐसे में बिजली गुल होते ही हायतौबा मच जाती है। अक्टूबर 2016 में सपा नेता रवि कुमार बड़कू ने तत्कालीन सीएम को पत्र भेज गुहार लगाई थी। वहां से बिजली विभाग और प्रशासन को जरूरी पहल का निर्देश हुआ। उस क्रम में सीएम के विशेष सचिव जीएस नवीन कुमार को अनपरा-शक्तिनगर, बीजपुर, रेणुकूट, डाला परिक्षेत्र के औद्योगिक संस्थाओं से बातचीत जारी होने की आख्या भेजी गई लेकिन अब तक पहल मूर्तरूप नहीं ले पाई। उधर, एक्सईएन लक्ष्मीशंकर का कहना था कि सीएसआर कोटे में प्रत्येक परियोजना को लाभांश का दो प्रतिशत जनसुविधाओं पर खर्च करना अनिवार्य है। उसी मद से मोबाइल ट्रांसफार्मर के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। डीएम भी निर्देशित कर चुके हैँ। बाववूद परियोजना प्रबंधन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।
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