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वैदिक मंत्रोचार के साथ पूजे जाएंगे भगवान धनवंतरि
Updated Mon, 05 Nov 2018 12:08 AM IST
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सोनभद्र। जिले में सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान धनवंतरि का पूजन-अर्चन किया जाएगा। वहीं, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आभूषण, बर्तन, इलेक्ट्रानिक्स, कपड़ों की दुकानों को दुकानदारों ने झालर, फूल, माला से सजा दिया है। दुकानदारों ने अपनी सुविधा के अनुसार छूट की स्कीम भी लागू की है। रविवार को दो-चार समेत अन्य वाहनों के एजेंसियों पर वाहनों की बुकिंग कराने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही।
राबटर्सगंज नगर में कानोडिया औषधालय की ओर से विगत वर्षों की भांति सोमवार की सुबह 11 बजे से विधि-विधान से आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि पूजे जाएंगे। धनतेरस के दिन को धन एवं आरोग्य से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि इस दिन भगवान धनवंतरि और कुबेर का पूजन अर्चन किया जाता है। ताकि हर घर में समृद्धि और आरोग्य बना रहे। धनतेरस, धनवंतरि त्रयोदशी या धन त्रयोदशी दीपावली से पूर्व मनाया जाना महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन आरोग्य के देवता धनवंतरि मृत्यु के अधिपति यम, वास्तविक धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी तथा वैभव के स्वामी कुबेर की पूजा की जाती है। इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे मान्यता है कि लक्ष्मी के आह्वान के पहले आरोग्य की प्राप्ति और यम को प्रसन्न करने के लिए कर्मों का शुद्धिकरण अत्यंत आवश्यक है। कुबेर भी आसुरी प्रवृत्तियों का हरण करने वाले देव हैं। धनवंतरि और मां लक्ष्मी का अवतरण समुद्र मंथन से हुआ था। दोनों ही कलश लेकर अवतरित हुए थे। इसके साथ ही मां लक्ष्मी का वाहन ऐरावत हाथी भी समुद्र मंथन द्वारा अवतरित हुआ था। श्रीसूक्त में लक्ष्मी के स्वरूपों का विवरण कुछ इस प्रकार मिलता है। इस दिन लोग आभूषण, वाहन, बर्तन आदि सामानों की खरीदारी करते हैं। जिले में इस दिन करोड़ों का कारोबार भी होता है।
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राबटर्सगंज नगर में कानोडिया औषधालय की ओर से विगत वर्षों की भांति सोमवार की सुबह 11 बजे से विधि-विधान से आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि पूजे जाएंगे। धनतेरस के दिन को धन एवं आरोग्य से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि इस दिन भगवान धनवंतरि और कुबेर का पूजन अर्चन किया जाता है। ताकि हर घर में समृद्धि और आरोग्य बना रहे। धनतेरस, धनवंतरि त्रयोदशी या धन त्रयोदशी दीपावली से पूर्व मनाया जाना महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन आरोग्य के देवता धनवंतरि मृत्यु के अधिपति यम, वास्तविक धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी तथा वैभव के स्वामी कुबेर की पूजा की जाती है। इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे मान्यता है कि लक्ष्मी के आह्वान के पहले आरोग्य की प्राप्ति और यम को प्रसन्न करने के लिए कर्मों का शुद्धिकरण अत्यंत आवश्यक है। कुबेर भी आसुरी प्रवृत्तियों का हरण करने वाले देव हैं। धनवंतरि और मां लक्ष्मी का अवतरण समुद्र मंथन से हुआ था। दोनों ही कलश लेकर अवतरित हुए थे। इसके साथ ही मां लक्ष्मी का वाहन ऐरावत हाथी भी समुद्र मंथन द्वारा अवतरित हुआ था। श्रीसूक्त में लक्ष्मी के स्वरूपों का विवरण कुछ इस प्रकार मिलता है। इस दिन लोग आभूषण, वाहन, बर्तन आदि सामानों की खरीदारी करते हैं। जिले में इस दिन करोड़ों का कारोबार भी होता है।
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