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106 गांव के विस्थापितों को नहीं मिला जमीन पर मालिकाना हक

Fri, 09 Oct 2020 11:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 11:00 PM IST
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106 village displaced did not get ownership of land
सोनभद्र । पांच दशक से रिहंद बांध सिविल खंड, पिपरी-तुर्रा से जुड़े 106 गांवों के विस्थापितों को मालिकाना हक नहीं मिला है। विभिन्न गांवों में मुआवजा के रूप में मिली भूमि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट की भूमि को श्रेणी-1 संक्रमणीय भूमिधर भूमि दर्ज कराने के लिए अब ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है। मामला संझान में आने पर सांसद पकौड़ी लाल कोल ने ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद डीएम को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है।
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सांसद ने पत्र के माध्यम से विस्थापितों को मुआवजे के रूप में मिली उनकी जमीनों पर उनका मालिकाना हक दिलाने की मांग की है। पत्र के माध्यम से सांसद पकौड़ी लाल कोल ने कहा कि ग्रामीणों ने बताया कि 1960 के लगभग रिहंद जलाशय बना, जिससे जिले के 106 गांवों के लोग विस्थापित हुए थे। वर्तमान सरकार ने उन विस्थापितों को दुद्धी, म्योरपुर, बभनी, अनपरा, शक्तिनगर, डाला, चोपन आदि के विभिन्न गांवों में भूमि देकर बसाया लेकिन आज 54 वर्ष बाद भी वह भूमि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट की भूमि खतौनी में दर्ज है, जो उक्त खतौनी से खेती की उपज अनाज को सरकार के अनाज क्रय केन्द्रों को नहीं बेच पाते, जिससे वह किसान उपज अनाज को आढ़तियों को औने पौने दाम पर बेचने के लिए विवश हैं। उक्त खतौनी पर खेती के लिये बैंक से ऋण, किसान दुर्घटना बीमा व किसी की जमानत भी नहीं करा पाते और न ही सरकार द्वारा कोई अन्य सुविधा का लाभ ले पाते हैं। अभी तक विस्थापितों को कोई मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है। इसलिए उपरोक्त रिहन्द बांध से विस्थापितों को मुआवजा के रूप में मिली गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट भूमि को श्रेणी-1 संक्रमणीय भूमिधर भूमि दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है। ताकि मुआवजा के रूप में मिली भूमि का संपूर्ण लाभ विस्थापित परिवारों को मिल सके। सांसद ने कहा कि जरूरत पड़ने पर विस्थापितों के मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मिलकर समस्या को दूर करने की मांग करेंगे।
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