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वेतन विसंगतियां दूर किए जाने की हुई मांग
Updated Mon, 07 May 2018 12:56 AM IST
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ओबरा(सोनभद्र)। अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में व्याप्त वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई है। विद्युत अभियंता संघ के अध्यक्ष जीके मिश्रा एवं महासचिव राजीव सिंह ने बयान जारी कर कहा कि विगत वर्ष ऊर्जा निगमों के अवर अभियंता संवर्ग जो अभियंता संवर्ग का अधीनस्थ कर्मचारी है की नियुक्ति ग्रेड पे 4200 से बढ़ाकर 4600 करने के बाद अभियंता संवर्ग एवं जेई संवर्ग के मध्य वेतन अनुपात नगण्य हो गया है।
ऊर्जा निगमों में अन्य संवर्ग में जो ग्रेडपे 5400 पा रहे थे, उन सभी संवर्गों की ग्रेडपे 6600 कर दी गई है। यह आवश्यक हो गया है कि अभियंता संवर्ग की भी ग्रेड-पे उच्चीकृत की जाए। नियुक्ति ग्रेड पे 6600 की जाए। बिजली अभियंताओं ने सरकार से ऊर्जा निगमों में कंसलटेंटों के नाम पर हो रही सरकारी धन की बर्बादी एवं लूट रोकने की मांग करते हुए करछना परियोजना उत्पादन निगम के पास ही रखने तथा पांच अप्रैल के समझौते का पालन करने की मांग की। बिजली अभियंताओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय न होने की स्थिति में किसी भी समय आंदोलन की घोषणा करने के लिए अध्यक्ष एवं महासचिव को अधिकृत किया गया। बिजली अभियंताओं ने ऊर्जा निगमों में अत्यधिक बैठकों, समीक्षाओं, सूचनाओं, विडियों कॉफ्रेसिंग आदि विभिन्न प्रकार की दिन प्रतिदिन की जा रही बैठकों से विद्युत अभियंताओं को धरातल पर कार्य करने के लिए समय न मिल पाने का मुद्दा उठाया गया। प्रबंधन से यह मांग की गई कि सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने एवं कार्य करने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को पर्याप्त समय दिया जाए। माह में मात्र एक बार समीक्षा बैठक की जाए।
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ऊर्जा निगमों में अन्य संवर्ग में जो ग्रेडपे 5400 पा रहे थे, उन सभी संवर्गों की ग्रेडपे 6600 कर दी गई है। यह आवश्यक हो गया है कि अभियंता संवर्ग की भी ग्रेड-पे उच्चीकृत की जाए। नियुक्ति ग्रेड पे 6600 की जाए। बिजली अभियंताओं ने सरकार से ऊर्जा निगमों में कंसलटेंटों के नाम पर हो रही सरकारी धन की बर्बादी एवं लूट रोकने की मांग करते हुए करछना परियोजना उत्पादन निगम के पास ही रखने तथा पांच अप्रैल के समझौते का पालन करने की मांग की। बिजली अभियंताओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय न होने की स्थिति में किसी भी समय आंदोलन की घोषणा करने के लिए अध्यक्ष एवं महासचिव को अधिकृत किया गया। बिजली अभियंताओं ने ऊर्जा निगमों में अत्यधिक बैठकों, समीक्षाओं, सूचनाओं, विडियों कॉफ्रेसिंग आदि विभिन्न प्रकार की दिन प्रतिदिन की जा रही बैठकों से विद्युत अभियंताओं को धरातल पर कार्य करने के लिए समय न मिल पाने का मुद्दा उठाया गया। प्रबंधन से यह मांग की गई कि सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने एवं कार्य करने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को पर्याप्त समय दिया जाए। माह में मात्र एक बार समीक्षा बैठक की जाए।
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