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जिले में चिह्नित नहीं हैं एक भी खनन माफिया
Updated Thu, 14 Dec 2017 10:41 PM IST
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सोनभद्र। जनपद का खनन उद्योग बारूद के ढेर पर संचालित हो रहा है। अवैध खनन पर पूर्व में कई बार प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन हैरानी की बात है कि जनपद में अब तक एक भी खनन माफिया चिह्नित नहीं किया गया है।
खनन उद्योग को जिले की लाइफ लाइन माना जाता है। गिट्टी, बालू और बोल्डर के कारोबार से तमाम लोग जुड़े हैं। करीब 50 हजार मजदूरों को यहां से रोजी-रोटी मिलती है। जिले के बाजार भी काफी हद तक इसी उद्योग पर टिका है। फरवरी 2012 में बिल्ली मारकुंडी में खनन हादसे में दस लोगों की मौत हुई। वर्ष 2016 में भी रासपहाड़ी क्षेत्र में बड़ा हादसा हुआ, जिसमें कई लोगों ने दम तोड़ा। अक्सर गहरी खदानों में मजदूरों के गिरने, घायल होने और दम तोड़ने के भी मामले सामने आते रहते हैं। इतना ही नहीं ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जा कर क्रेशर संचालित करने का मामला पूर्व में प्रशासन ने ही सार्वजनिक किया था। लेकिन यह हैरानी की बात है कि इन सबके बावजूद जिले में खनन विभाग, वन विभाग और प्रशासन के रिकार्ड में एक भी खनन माफिया चिह्नित नहीं किया गया है। जबकि सभी ने पूर्व में यह माना था कि निर्धारित खनन स्थल से हटकर खनन होता है। नगवां, पिपरडीह, बरहमोरी और खेवंधा में संचालित बालू साइटों पर लीज एरिया से हटकर खनन करने पर लाखों का जुर्माना लगाया जा चुका है। इन सबके बावजूद अब तक किसी खनन माफिया का चिह्नित न किया जाना हैरानी की बात है। जिला खनन अधिकारी एसके दास का कहना है कि जिले में कोई खनन माफिया नहीं है। अब शासन से इसको लेकर कोई गाइड लाइन आई तो चिह्नित करने का कार्य किया जाएगा। वहीं खनन अधिकारी एसके दास कहते हैं, शासन से गाइड लाइन मिलने के बाद ही खनन माफिया चिह्नित किये जाएंगे।
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खनन उद्योग को जिले की लाइफ लाइन माना जाता है। गिट्टी, बालू और बोल्डर के कारोबार से तमाम लोग जुड़े हैं। करीब 50 हजार मजदूरों को यहां से रोजी-रोटी मिलती है। जिले के बाजार भी काफी हद तक इसी उद्योग पर टिका है। फरवरी 2012 में बिल्ली मारकुंडी में खनन हादसे में दस लोगों की मौत हुई। वर्ष 2016 में भी रासपहाड़ी क्षेत्र में बड़ा हादसा हुआ, जिसमें कई लोगों ने दम तोड़ा। अक्सर गहरी खदानों में मजदूरों के गिरने, घायल होने और दम तोड़ने के भी मामले सामने आते रहते हैं। इतना ही नहीं ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जा कर क्रेशर संचालित करने का मामला पूर्व में प्रशासन ने ही सार्वजनिक किया था। लेकिन यह हैरानी की बात है कि इन सबके बावजूद जिले में खनन विभाग, वन विभाग और प्रशासन के रिकार्ड में एक भी खनन माफिया चिह्नित नहीं किया गया है। जबकि सभी ने पूर्व में यह माना था कि निर्धारित खनन स्थल से हटकर खनन होता है। नगवां, पिपरडीह, बरहमोरी और खेवंधा में संचालित बालू साइटों पर लीज एरिया से हटकर खनन करने पर लाखों का जुर्माना लगाया जा चुका है। इन सबके बावजूद अब तक किसी खनन माफिया का चिह्नित न किया जाना हैरानी की बात है। जिला खनन अधिकारी एसके दास का कहना है कि जिले में कोई खनन माफिया नहीं है। अब शासन से इसको लेकर कोई गाइड लाइन आई तो चिह्नित करने का कार्य किया जाएगा। वहीं खनन अधिकारी एसके दास कहते हैं, शासन से गाइड लाइन मिलने के बाद ही खनन माफिया चिह्नित किये जाएंगे।
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