फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Youngsters are risking their lives for the sake of a bright future

Sitapur News: सुनहरे भविष्य की खातिर जान जोखिम में डाल रहे नौनिहाल

Fri, 04 Aug 2023 12:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Fri, 04 Aug 2023 12:00 AM IST
विज्ञापन
Youngsters are risking their lives for the sake of a bright future
सीतापुर। स्कूल जाने के लिए करीब 75 गांवों के 1350 बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालते हुए नदी पार कर स्कूल जाते हैं। बारिश के मौसम में नदियों में पानी बढ़ने पर हर समय मासूमों की जान खतरे में रहती है। इसके बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
विज्ञापन

कुछ जगहों पर ग्रामीणों ने अपने प्रयास से बांस-बल्ली के सहारे नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर रास्ता सुलभ करने का प्रयास किया लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। रामपुर मथुरा, बेहटा, सकरन व बिसवां क्षेत्र के कई गांवों में नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों को रोजाना इस समस्या से दो चार होना पड़ता है।
विज्ञापन





दृश्य 1
नाव से सरयू पार कर 12 किमी. दूर स्कूल जाते
रामपुर मथुरा इलाके में सरयू नदी पार करने के लिए बंगालीपुरवा घाट पर नाव ही एकमात्र सहारा है। यहां पुल निर्माण की मांग दशकों पुरानी है। जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से शुकुलपुरवा, कनरखी, अर्जुनपुरवा, धांधीरेती, कोठार, पीताम्बर पुरवा, नयापुरवा समेत लगभग 15 गांवों के छात्र-छात्राएं स्कूल जाने के लिए नाव से नदी पार करते हैं। शुकुलपुरवा की रूबी रामपुर मथुरा के छाेटेलाल बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा 11 की छात्रा हैं। इसी कॉलेज में रेखा कक्षा 9 जबकि सुमित्रा निषाद महेन्द्र कुमार शास्त्री मेमोरियल इंटर कॉलेज में कक्षा 11 की छात्रा हैं। छात्राओं ने बताया कि गांव से स्कूल की दूरी लगभग 12 किमी. है। रास्ते में सरयू नदी पार करनी पड़ती है। इसके लिए साइकिल समेत नाव पर सवार होते हैं। कभी नाव दूसरी ओर होती है तो कभी नाविक सवारी कम होने पर ले जाने से मना कर देता है। इससे काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। इस वजह से स्कूल पहुंचने में अक्सर देर हो जाती है। बाढ़ आने पर स्कूल पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। प्रधान श्रीराम बताते हैं, कि पिछले कई सालों से बंगालीपुरवा घाट पर पुल निर्माण की मांग की जा रही है। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। महमूदाबाद तहसीलदार सुखवीर सिंह ने बताया कि प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए इस साल नाव की व्यवस्था कराई है। नाव साल भर यहीं तैनात रहेगी। लोगों को किराया देकर नदी नहीं पार करनी पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


दृश्य 2
चौका नदी पार करने को लकड़ी के पुल का सहारा
ब्लॉक बेहटा क्षेत्र के सुमरावा गांव के पास चौका नदी बहती है। लगभग 25 गांवों के लोगों को बाजार, थाना, अस्पताल व बैंक जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। इन गांवों के बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए भी चौका नदी पार करना होता है। इसके लिए 20 किमी.का चक्कर काटना पड़ता है। समस्या को देखते हुए पिछले कई वर्षों से क्षेत्रीय ग्रामीण यहां पुल बनवाने की मांग कर रहे हैं। शासन-प्रशासन ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चौका नदी पर बांस बल्लियों के सहारे लकड़ी का अस्थायी पुल बनाया है। ग्रामीण कुंज बिहारी निषाद, मलखे, उत्तम, बेचे लाल, राकेश कुमार, झब्बू, मेवा लाल, महेश, अभिराम अवस्थी आदि ने बताया कि लकड़ी का पुल बनने से हजारों ग्रामीणों के अलावा स्कूली बच्चों को 20 किमी. का चक्कर नहीं काटना पड़ता है। हालांकि लकड़ी के पुल पर आवागमन जोखिम भरा है, लेकिन मजबूरी में इसी पुल से होकर नदी पार करना पड़ रहा है।
दृश्य 3
लकड़ी के पुल पर जोखिम उठाकर करते आवागमन
सकरन के लहसड़ा गांव के पास किवानी नदी पर पुल निर्माण की मांग क्षेत्रीय ग्रामीण पिछले कई वर्षों से कर रहे हैं। शासन-प्रशासन ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने चंदा लगाकर श्रमदान से किवानी नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुल बना दिया। अब आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण व स्कूली बच्चे लकड़ी के अस्थायी पुल से आते-जाते हैं। इसके अलावा बेलवा बसहिया गांव के पास भी ग्रामीणों ने लकड़ी व बांस का पुल बनाया है। बरसात के सीजन में यह पुल पानी के तेज बहाव से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, इसके बाद फिर ग्रामीण लकड़ी का पुल बना लेते हैं। इन लकड़ी के पुलों पर आवागमन असुरक्षित होने के बाद भी जनप्रतिनिधि व अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।

दृश्य 3
खुद नाव चलाकर स्कूल जाते बच्चे
सिधौली तहसील क्षेत्र के कंटाइन गांव के पास सरायन नदी बहती है। सरायन नदी के पार बसे करीब 15 गांवों के बच्चे कंटाइन के स्वरचना स्कूल में पढ़ने जाते हैं। रोजाना बच्चों को नाव से नदी पार करनी पड़ती है। यह नौनिहाल अक्सर खुद पतवार थामकर नाव चलाते नजर आते हैं। दूसरी ओर बगुलापारा घाट पर पुल बनने की राह ताक रहे ग्रामीणों को जब जनप्रतिनिधियों से उम्मीद खत्म हो गई, तो खुद ही बांस बल्ली के सहारे लकड़ी का पुल बना लिया। हालांकि बरसात में लकड़ी का पुल क्षतिग्रस्त होने से फिर ग्रामीणों व स्कूली बच्चों को नाव से सरायन नदी पार करनी पड़ती है।

बाक्स
रामपुर मथुरा क्षेत्र के कन्हईघाट पर पुल के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बंगालीपुरवा घाट समेत जहां पुल के निर्माण की आवश्यकता है वहां के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। ग्रामीणों के सुगम व सुरक्षित आवागमन के लिए जल्द पुल बनवाने का प्रयास किया जाएगा।

- राजेश वर्मा, सांसद

सरयू नदी पर बंगालीपुरवा घाट पर पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने अप्रैल में मुझे लिखित मांगपत्र सौंपा था। तत्काल पुल बनवाने का प्रस्ताव शासन भेज दिया गया था। पुल निर्माण की कवायद चल रही है।
- ज्ञान तिवारी, विधायक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed