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महिलाओं ने प्रशिक्षण में सीखे मछली पालन के तरीके
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मानपुर (सीतापुर)। कृषि विज्ञान केंद्र कटिया में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से महिलाओं को मछली पालन विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। मछलियों की प्रजातियों सहित अन्य जरूरी जानकारी दी गई।
ग्रामीण महिला तकनीकी पार्क के अंतर्गत रंगीन मछली पालन विषयक प्रशिक्षण में स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को रंगीन मछलियों की प्रजातियों, प्रजनन, देखभाल, प्रमुख बीमारियों एवं समाधान आदि पर जानकारी दी गई। केंद्र के गृह वैज्ञानिक एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. सौरभ ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं बहुत कम खर्च में कम सुविधाओं के साथ भी रंगीन मछली पालन को अपनाकर घर बैठे ही अपना रोजगार स्थापित कर सकती हैं।
आज भी रंगीन मछली के व्यापार में पश्चिम बंगाल, ओड़िसा आदि सबसे आगे हैं जबकि हमारे प्रदेश में भी रंगीन मछली पालन की अपार संभावनाएं हैं एवं बाजार भी आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि ये मछलियां दो प्रकार की होती है। अंडे देने वाली और बच्चे देने वाली। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बच्चे देने वाली मछलियों की प्रजातियां पालन हेतु उपयुक्त होती हैं क्योंकि उनकी देखभाल एवं प्रजनन आसान होता है।
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कम सुविधाओं में भी इनको पाला जा सकता है। अलंकृत मछलियों की शहरी क्षेत्रों में बहुत मांग है। शीशे के एक्वेरियम में इनको घर में रखने को शुभ माना जाता है। तनाव को दूर करने में सहायक मानी जाती हैं। इस तरह यदि महिलाएं इस उद्यम को अपनाती हैं तो वे आसानी से अपने परिवार के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बना सकती हैं।
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ग्रामीण महिला तकनीकी पार्क के अंतर्गत रंगीन मछली पालन विषयक प्रशिक्षण में स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को रंगीन मछलियों की प्रजातियों, प्रजनन, देखभाल, प्रमुख बीमारियों एवं समाधान आदि पर जानकारी दी गई। केंद्र के गृह वैज्ञानिक एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. सौरभ ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं बहुत कम खर्च में कम सुविधाओं के साथ भी रंगीन मछली पालन को अपनाकर घर बैठे ही अपना रोजगार स्थापित कर सकती हैं।
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आज भी रंगीन मछली के व्यापार में पश्चिम बंगाल, ओड़िसा आदि सबसे आगे हैं जबकि हमारे प्रदेश में भी रंगीन मछली पालन की अपार संभावनाएं हैं एवं बाजार भी आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि ये मछलियां दो प्रकार की होती है। अंडे देने वाली और बच्चे देने वाली। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बच्चे देने वाली मछलियों की प्रजातियां पालन हेतु उपयुक्त होती हैं क्योंकि उनकी देखभाल एवं प्रजनन आसान होता है।
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कम सुविधाओं में भी इनको पाला जा सकता है। अलंकृत मछलियों की शहरी क्षेत्रों में बहुत मांग है। शीशे के एक्वेरियम में इनको घर में रखने को शुभ माना जाता है। तनाव को दूर करने में सहायक मानी जाती हैं। इस तरह यदि महिलाएं इस उद्यम को अपनाती हैं तो वे आसानी से अपने परिवार के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बना सकती हैं।