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Sitapur News: एक्सक्लूसिव

Sat, 21 Jan 2023 05:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jan 2023 05:30 AM IST
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wife pradhan secretary paid wages to husband
सीतापुर। जनपद में ग्राम पंचायतों से लेकर ब्लॉक तक में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। मनरेगा हो, राज्य वित्त हो या फिर 15वें वित्त से मिलने वाला बजट। नियम कानून को दरकिनार कर कहीं चहेती फर्मों को भुगतान किया जा रहा है तो कहीं परिवार की फर्म पर ही कृपा बरस रही है।
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हरगांव विकास खंड की ग्राम पंचायत महादेव अटरा में तो गजब ही हो गया। तत्कालीन ग्राम सचिव ने ग्राम प्रधान के पति को ही 15वें वित्त से मजदूरी के नाम पर करीब ढाई लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
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ग्राम पंचायतों को विकास कार्य कराने के किये बड़े पैमाने पर अलग-अलग मदों से बजट दिया जाता है। राज्य वित्त (चौथे वित्त) और 15वें वित्त से सबसे ज्यादा बजट ग्राम पंचायतों को मिलता है। ग्राम पंचायतों को मिलने वाले बजट को खर्च करने के लिए अलग अलग नियम भी हैं ।
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इन नियमों को दरकिनार हरगांव विकास खंड की ग्राम पंचायत महादेव अटरा में अफसरों ने आंख बंद कर गजब खेल कर दिया। 15वें वित्त से ग्राम पंचायत को मिले बजट से यहां ग्राम प्रधान अंजली वर्मा के पति सुनील कुमार को दस बिलों पर दो लाख 43 हजार 958 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
दर्ज ब्योरे में सुनील कुमार के प्रधानपति होने का उल्लेख नहीं है बल्कि उसको सिटीजन (नागरिक) बताया गया है। यह रुपये विभिन्न कार्यों में मजदूरी के नाम पर निकाला गया है।
इसी ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव कौशलेंद्र वर्मा ने भी चालू वित्तीय वर्ष में अब तक खुद को लगभग एक लाख रुपये का भुगतान किया है। उक्त सभी भुगतान ग्राम पंचायत के खाते से सुनील कुमार और कौशलेंद्र वर्मा के खाते में भेजे गए हैं।
हरगांव विकास खंड में ग्राम पंचायत है जलालीपुर देहात। यहां के प्रधान हैं अकील। इन्होंने ग्राम पंचायत के 15वें वित्त से अपने ही खाते में 13 बार में चार लाख 27 हजार रुपये का भुगतान कर लिया।
भुगतान ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान के डोंगल से किया जाता है। प्रधान को यहां भी सिटीजन (नागरिक) बताया गया है और भुगतान मरम्मत में मजदूरी के लिए किया गया है।

हरगांव विकास खंड की ग्राम पंचायत नबीनगर में भी प्रधान गुलजहां ने 15वें वित्त के बजट से अपने बैंक खाते में एक लाख 84 हजार रुपये से अधिक का भुगतान ले लिया। दर्ज ब्यौरे में उन्हें भी सिटीजन (नागरिक) बताया गया है। यह भुगतान भी मजदूरी के नाम पर लिया गया है।
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