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कहीं खतरे में तो नहीं लाडले की जान
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कैंचीपुल के पास जर्जर ई-रिक्शे से जाते स्कूली बच्चे। (फाइल फोटो)
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। जागरूकता अभियान और कार्रवाई के बाद भी विद्यालयों की मनमानी जारी है। 19 दिन से चल रहे अभियान में सिर्फ 35 वाहनों की फिटनेस हो सकी है। 280 स्कूली वाहन अब भी अनफिट हैं। ऐसे में इन वाहनों में सफर बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। पिछले दिनों गाजियाबाद में स्कूल बस से बाहर झांक रहे कक्षा चार के छात्र अनुराग की खंभे से टकराकर दर्दनाक मौत हो गई थी। इस मामले को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया था। जांच में बस अनफिट पाई गई थी।
एक सप्ताह के अंदर जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश शासन की ओर से दिए गए थे। बिना फिटनेस संचालित बसों पर कार्रवाई के आदेश थे। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया है। पिछले कई दिनों से अभियान चलाकर जिम्मेदारों को जगाने की कोशिश की जा रही थी। लगातार प्रकाशित हुई खबरों का असर भी हुआ। परिवहन विभाग सक्रिय हुआ।
कुछ स्कूल-कॉलेजों के जिम्मेदार भी संजीदा नजर आए, लेकिन जिस तरह से मामला काफी बड़ा है और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है, उस हिसाब से जिले के नामचीन कॉलेज मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उनके स्कूल की अनफिट बसें बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रहीं हैं, ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। इसका जवाब स्कूलों के जिम्मेदारों के पास नही हैं।
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मामले में सबसे बड़ी हैरानी इस बात की है कि परिवहन विभाग की ओर से 22 अप्रैल से फिटनेस के लिए सख्ती और अभियान चलाया जा रहा है। चेकिंग के दौरान अनफिट स्कूली वाहनों पर कार्रवाई भी की जा रही है। सख्ती लगातार हो रही है, लेकिन इसके बाद भी अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा के नाम पर मोटी फीस वसूलने वाले शिक्षण संस्थान उनकी सुरक्षा को लेकर जरा भी फिक्रमंद नहीं हैं। अगर होते तो अब तक बसों की फिटनेस जरूर करा ली होती। 19 दिन में भी महज 35 स्कूली वाहनों की फिटनेस हो सकी है। ऐसे में सबसे बड़ा खतरा उन हजारों बच्चों के जीवन पर है, जो हर रोज अनफिट वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं।
कोरोना का रोना रो रहे हैं विद्यालय
कोरोना का खतरा पहले जैसा नहीं है। यही वजह है कि हर साल की अपेक्षा इस बार कान्वेंट स्कूलों में अच्छी खासी तादात में बच्चों के दाखिले हुए हैं। इससे विद्यालयों के पास खजाना भी आया है, लेकिन इसके बाद भी फिटनेस कराने का दबाव बनने पर विद्यालयों की ओर चिट्ठियां देकर मोहलत मांगी जा रही है। हवाला आर्थिक तंगी और कोरोना का दिया जा रहा है, इन जवाबों से परिवहन विभाग के जिम्मेदार भी परेशान हैं।
कार्रवाई बता रही, सब कुछ ठीक नहीं
गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद सख्ती दिखाने पर भले ही विद्यालय दावा कर रहे हों कि उनके अनफिट वाहन सड़कों पर चल नहीं रहे हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा है नहीं। अगर ऐसा होता तो फिर एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय की कार्रवाई में अनफिट वाहन बच्चों को लेकर सड़कों पर चलते कैसे मिलते। यह कार्रवाई बता रही है कि सब कुछ ठीक नहीं है।
अनफिट वाहन मिले तो स्कूल के प्रबंधक पर दर्ज होगा केस
फिटनेस कराने पर परिवहन विभाग की ओर से पूरा जोर दिया जा रहा है। 19 दिनों से अभियान चल रहा है, लेकिन अभी तक 35 वाहनों की ही फिटनेस हो सका है। सोमवार को इस संबंध में स्कूलों के प्रबंधकों के साथ बैठक की गई थी। 300 स्कूलों को सूचना दी गई थी। 19 लोग ही आए थे। डीआईओएस और बीएसए की ओर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अब बिना फिटनेस वाहनों के चलते पाए जाने बंद और चालान की कार्रवाई नहीं होगी बल्कि सीधे स्कूल के प्रबंधक और प्रधानाचार्य पर केस कराया जाएगा।
- माला बाजपेयी, एआरटीओ प्रशासन
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एक सप्ताह के अंदर जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश शासन की ओर से दिए गए थे। बिना फिटनेस संचालित बसों पर कार्रवाई के आदेश थे। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया है। पिछले कई दिनों से अभियान चलाकर जिम्मेदारों को जगाने की कोशिश की जा रही थी। लगातार प्रकाशित हुई खबरों का असर भी हुआ। परिवहन विभाग सक्रिय हुआ।
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कुछ स्कूल-कॉलेजों के जिम्मेदार भी संजीदा नजर आए, लेकिन जिस तरह से मामला काफी बड़ा है और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है, उस हिसाब से जिले के नामचीन कॉलेज मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उनके स्कूल की अनफिट बसें बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रहीं हैं, ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। इसका जवाब स्कूलों के जिम्मेदारों के पास नही हैं।
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मामले में सबसे बड़ी हैरानी इस बात की है कि परिवहन विभाग की ओर से 22 अप्रैल से फिटनेस के लिए सख्ती और अभियान चलाया जा रहा है। चेकिंग के दौरान अनफिट स्कूली वाहनों पर कार्रवाई भी की जा रही है। सख्ती लगातार हो रही है, लेकिन इसके बाद भी अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा के नाम पर मोटी फीस वसूलने वाले शिक्षण संस्थान उनकी सुरक्षा को लेकर जरा भी फिक्रमंद नहीं हैं। अगर होते तो अब तक बसों की फिटनेस जरूर करा ली होती। 19 दिन में भी महज 35 स्कूली वाहनों की फिटनेस हो सकी है। ऐसे में सबसे बड़ा खतरा उन हजारों बच्चों के जीवन पर है, जो हर रोज अनफिट वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं।
कोरोना का रोना रो रहे हैं विद्यालय
कोरोना का खतरा पहले जैसा नहीं है। यही वजह है कि हर साल की अपेक्षा इस बार कान्वेंट स्कूलों में अच्छी खासी तादात में बच्चों के दाखिले हुए हैं। इससे विद्यालयों के पास खजाना भी आया है, लेकिन इसके बाद भी फिटनेस कराने का दबाव बनने पर विद्यालयों की ओर चिट्ठियां देकर मोहलत मांगी जा रही है। हवाला आर्थिक तंगी और कोरोना का दिया जा रहा है, इन जवाबों से परिवहन विभाग के जिम्मेदार भी परेशान हैं।
कार्रवाई बता रही, सब कुछ ठीक नहीं
गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद सख्ती दिखाने पर भले ही विद्यालय दावा कर रहे हों कि उनके अनफिट वाहन सड़कों पर चल नहीं रहे हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा है नहीं। अगर ऐसा होता तो फिर एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय की कार्रवाई में अनफिट वाहन बच्चों को लेकर सड़कों पर चलते कैसे मिलते। यह कार्रवाई बता रही है कि सब कुछ ठीक नहीं है।
अनफिट वाहन मिले तो स्कूल के प्रबंधक पर दर्ज होगा केस
फिटनेस कराने पर परिवहन विभाग की ओर से पूरा जोर दिया जा रहा है। 19 दिनों से अभियान चल रहा है, लेकिन अभी तक 35 वाहनों की ही फिटनेस हो सका है। सोमवार को इस संबंध में स्कूलों के प्रबंधकों के साथ बैठक की गई थी। 300 स्कूलों को सूचना दी गई थी। 19 लोग ही आए थे। डीआईओएस और बीएसए की ओर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अब बिना फिटनेस वाहनों के चलते पाए जाने बंद और चालान की कार्रवाई नहीं होगी बल्कि सीधे स्कूल के प्रबंधक और प्रधानाचार्य पर केस कराया जाएगा।
- माला बाजपेयी, एआरटीओ प्रशासन