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Sitapur News: बैराजों से लगातार छोड़ा जा रहा पानी, सताने लगा बाढ़ का डर
Thu, 09 Jul 2026 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 09 Jul 2026 11:53 PM IST
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सीतापुर। तीनों बैराजों से बृहस्पतिवार को 93,419 क्यूसेक पानी सरयू व शारदा नदियों में छोड़ा गया। इसके साथ ही 24 घंटे के दौरान जिले में 71 मिमी. बारिश हुई है। इससे तराई क्षेत्र के लोग बाढ़ के खतरे से चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी से नदियों के उफनाने की आशंका गहरा गई है।
घाघरा, बनबसा और शारदा बैराजों से छोड़ा गया पानी एक दिन बाद सीतापुर तक पहुंचता है। तीन दिन से लगातार बैराजों से पानी छोड़ा जा रहा है। अभी पानी कम मात्रा में डिस्चार्ज किया जा रहा है, लेकिन जिले में सरयू व शारदा नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
सिंचाई विभाग के मुताबिक, बुधवार सुबह आठ बजे से बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक जिले में 71 मिमी. बारिश हुई है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के शिवमंगल का कहना है कि बीते वर्षों में जुलाई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बैराजों से पानी छोड़ा जाता था। इस बार अभी से पानी छोड़े जाने की सूचना से सभी परेशान हैं।
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गुड्डू ने बताया कि हम लोगों के घर और जमीन को बैराजों से छोड़ा गया पानी ही बर्बाद करता है। प्रशासन की ओर से सतर्क रहने की हिदायत दी जाती है। बाढ़ आने पर राशन किट व लंच पैकेट दिए जाते हैं। बाढ़ से जूझना तटवर्ती गांव अखरी, शंकर पुरवा, कनरखी, निरंजन पुरवा, अंगरौरा आदि गांवों के लोगों की नियति बन गई है।
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घाघरा, बनबसा और शारदा बैराजों से छोड़ा गया पानी एक दिन बाद सीतापुर तक पहुंचता है। तीन दिन से लगातार बैराजों से पानी छोड़ा जा रहा है। अभी पानी कम मात्रा में डिस्चार्ज किया जा रहा है, लेकिन जिले में सरयू व शारदा नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
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सिंचाई विभाग के मुताबिक, बुधवार सुबह आठ बजे से बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक जिले में 71 मिमी. बारिश हुई है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के शिवमंगल का कहना है कि बीते वर्षों में जुलाई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बैराजों से पानी छोड़ा जाता था। इस बार अभी से पानी छोड़े जाने की सूचना से सभी परेशान हैं।
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गुड्डू ने बताया कि हम लोगों के घर और जमीन को बैराजों से छोड़ा गया पानी ही बर्बाद करता है। प्रशासन की ओर से सतर्क रहने की हिदायत दी जाती है। बाढ़ आने पर राशन किट व लंच पैकेट दिए जाते हैं। बाढ़ से जूझना तटवर्ती गांव अखरी, शंकर पुरवा, कनरखी, निरंजन पुरवा, अंगरौरा आदि गांवों के लोगों की नियति बन गई है।