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कोरोना की जांच रिपोर्ट के इंतजार में बढ़ रहा मर्ज
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थमी रहीं सांसे
शहर के विकास नगर के मोहित को हल्का बुखार होने पर कोरोना के कुछ लक्षण प्रतीत हुए। इस पर मोहित ने आरटीपीसीआर जांच कराई। रिपोर्ट आने में तीन दिन लग गए। इस दौरान वे काफी परेशान रहे। रिपोर्ट निगेटिव आई। इससे मोहित को राहत तो जरूर मिली लेकिन रिपोर्ट के इंतजार में उनकी सांसे थमी रहीं।
घर पर ही कराया इलाज
खैराबाद के मुवक्किम ने कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। आरटीपीसीआर के माध्यम से जांच हुई। 36 घंटे में रिपोर्ट आने की बात कही गई। लेकिन उनकी रिपोर्ट 72 घंटे में मिल सकी। मुवक्किम घर पर ही रहकर अपना इलाज कराते रहे। रिपोर्ट के इंतजार में वे परेशान रहें।
दो दिन से अधिक का लगा समय
विजयलक्ष्मी नगर की एक महिला ने जिला अस्पताल में टूनेट से जांच कराई। वह पॉजिटिव मिली। लेकिन महिला को कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे। इस पर महिला ने शंका दूर करने के लिए आरटीपीसीआर से जांच कराई। उसमें भी वह पॉजिटिव निकली। महिला को रिपोर्ट प्राप्त करने में दो दिन से अधिक इंतजार करना पड़ा।
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सीतापुर। जिले में कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ रहा है, लेकिन इनकी पुष्टि होने में लोगों को काफी समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालात ये हैं आरटीपीसीआर जांच में तीन दिन का समय लग रहा है। इस दौरान अगर मरीज को कोई दिक्कत होती है तो उसे इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाता है। जांच रिपोर्ट के इंतजार में लोग कोविड का इलाज नहीं करा पा रहे हैं। इस बीच समय से इलाज न शुरू होने से उनका मर्ज और बढ़ने लगता है।
कोरोना की जांच करने के लिए जिले स्तर पर तीन सुविधाएं मौजूद हैं। जिला अस्पताल में टूनेट से जांच की जाती है। एंटीजन व आरटीपीसीआर के माध्यम से जांच होती है। जिसमें टूनेट व एंटीजन की जांच कुछ ही घंटों में मिल जाती है। आरटीपीसीआर की जांच आने में समय लग जाता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह बताते हैं कि कोविड की जांच के लिए आरटीपीसीआर सबसे भरोसेमंद जांच है।
यह जांच लखनऊ में होती है। करीब एक माह पहले यही जांच महज 24 घंटे के अंदर मिल जाती थी। इससे लोग अपना तत्काल इलाज शुरू कर देते थे। लेकिन इस बार रिपोर्ट आने में देरी के चलते लोगों को धड़कने बढ़ रही है।
लखनऊ में लैब का लोड बढ़ गया है। इसी वजह से जांच रिपोर्ट आने में समय लग रहा है। गंभीर मरीजों की तत्काल टूनेट व एंटीजन से जांच करा दी जाती है।
- डॉ. पीके सिंह, एसीएमओ
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शहर के विकास नगर के मोहित को हल्का बुखार होने पर कोरोना के कुछ लक्षण प्रतीत हुए। इस पर मोहित ने आरटीपीसीआर जांच कराई। रिपोर्ट आने में तीन दिन लग गए। इस दौरान वे काफी परेशान रहे। रिपोर्ट निगेटिव आई। इससे मोहित को राहत तो जरूर मिली लेकिन रिपोर्ट के इंतजार में उनकी सांसे थमी रहीं।
घर पर ही कराया इलाज
खैराबाद के मुवक्किम ने कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। आरटीपीसीआर के माध्यम से जांच हुई। 36 घंटे में रिपोर्ट आने की बात कही गई। लेकिन उनकी रिपोर्ट 72 घंटे में मिल सकी। मुवक्किम घर पर ही रहकर अपना इलाज कराते रहे। रिपोर्ट के इंतजार में वे परेशान रहें।
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दो दिन से अधिक का लगा समय
विजयलक्ष्मी नगर की एक महिला ने जिला अस्पताल में टूनेट से जांच कराई। वह पॉजिटिव मिली। लेकिन महिला को कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे। इस पर महिला ने शंका दूर करने के लिए आरटीपीसीआर से जांच कराई। उसमें भी वह पॉजिटिव निकली। महिला को रिपोर्ट प्राप्त करने में दो दिन से अधिक इंतजार करना पड़ा।
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सीतापुर। जिले में कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ रहा है, लेकिन इनकी पुष्टि होने में लोगों को काफी समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालात ये हैं आरटीपीसीआर जांच में तीन दिन का समय लग रहा है। इस दौरान अगर मरीज को कोई दिक्कत होती है तो उसे इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाता है। जांच रिपोर्ट के इंतजार में लोग कोविड का इलाज नहीं करा पा रहे हैं। इस बीच समय से इलाज न शुरू होने से उनका मर्ज और बढ़ने लगता है।
कोरोना की जांच करने के लिए जिले स्तर पर तीन सुविधाएं मौजूद हैं। जिला अस्पताल में टूनेट से जांच की जाती है। एंटीजन व आरटीपीसीआर के माध्यम से जांच होती है। जिसमें टूनेट व एंटीजन की जांच कुछ ही घंटों में मिल जाती है। आरटीपीसीआर की जांच आने में समय लग जाता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह बताते हैं कि कोविड की जांच के लिए आरटीपीसीआर सबसे भरोसेमंद जांच है।
यह जांच लखनऊ में होती है। करीब एक माह पहले यही जांच महज 24 घंटे के अंदर मिल जाती थी। इससे लोग अपना तत्काल इलाज शुरू कर देते थे। लेकिन इस बार रिपोर्ट आने में देरी के चलते लोगों को धड़कने बढ़ रही है।
लखनऊ में लैब का लोड बढ़ गया है। इसी वजह से जांच रिपोर्ट आने में समय लग रहा है। गंभीर मरीजों की तत्काल टूनेट व एंटीजन से जांच करा दी जाती है।
- डॉ. पीके सिंह, एसीएमओ