{"_id":"618ac1c48ffbf3328c69fa37","slug":"vegetable-prices-jump-budget-messed-up-sitapur-news-lko6037147188","type":"story","status":"publish","title_hn":"सब्जियों के दामों में उछाल, गड़बड़ाया बजट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सब्जियों के दामों में उछाल, गड़बड़ाया बजट
विज्ञापन
सीतापुर में कैंचीपुल के पास सब्जी खरीदते लोग। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। पिछले 15 दिन में सब्जी के भावों में काफी उतार-चढ़ाव हुआ है। थोक व फुटकर की कीमतों में जमीन आसमान का अंतर है। थोक से फुटकर में सब्जी आते ही प्रति किलो करीब 10 रुपये महंगी हो जा रही है। इससे लोगों को सब्जी खरीदने के लिए जेब अधिक ढीली करनी पड़ रही है।
इस समय सब्जियों के भाव काफी बढ़ गए हैं। पिछले 15 दिन की बात की जाए तो आलू व प्याज के भाव में कुछ गिरावट आई है। गोभी, बैंगन, परवल सहित अन्य सब्जियों की कीमतों में इजाफा हो गया है। महंगी सब्जी होने के चलते लोगों को खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इस समय पुराना आलू थोक में 20 रुपये किलो है।
लेकिन यह फुटकर बाजार में आते ही 30 रुपये किलो हो जाता है। यही हाल प्याज का भी है। थोक में 30 रुपये का बिक रहा है। खुले में 40 रुपये प्रति किलो पहुंच रहा है। यानी थोक व फुटकर मंडी में काफी अंतर है। इसके पीछे व्यापारियों का कहना है कि थोक से सामान लेने के बाद उसकी सफाई व छंटाई में काफी सब्जी निकल जाती है। उसके बाद फेरी लगाकर सब्जी बेचते हैं। इसी वजह से रेट का अंतर आ रहा है। आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव कम होने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं।
विज्ञापन
क्यों महंगी हो रही सब्जी
सब्जी व्यापारी उमेश का कहना है कि कुछ दिन पहले कई दिनों तक बरसात हुई थी। इससे खेतों में सब्जी पानी में डूबकर सड़ गई थी। इसकी वजह से आवक कम हो गई है। इसी वजह से सब्जी महंगी बिक रही है। अब जब डीजल के भाव कम पड़े हैं, लेकिन भाड़ा कम नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में जब भाड़ा कम होगा तो सब्जी के रेट में कमी आएगी।
सब्जी थोक रेट फुटकर रेट
आलू 20 30
गोभी 40 50
प्याज 30 40
कद्दू 20 30
बैंगन 30 40
करेला 30 40
लौकी 10 20
... फिर तो सब्जी खरीदना हो जाएगा मुश्किल
गृहिणी पायल ने बताया कि सब्जियों के रेट काफी अधिक हो गए हैं। इतनी महंगी सब्जी खरीदने से घर का बजट बिगड़ रहा है। रेट कम होने की बहुत आवश्यकता है। सुषमा शुक्ला का कहना है कि थोक व फुटकर में काफी अंतर आ रहा है। जिला प्रशासन को सब्जियों के रेट तय करने चाहिए। जिससे कोई अधिक मुनाफाखोरी न कर सकें। जूली ने कहा कि अगर इसी तरह से सब्जियों के रेट बढ़ते चले जाएंगे तो सब्जी खरीदना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को सब्जियों के रेट नियंत्रित करने चाहिए।
विज्ञापन
इस समय सब्जियों के भाव काफी बढ़ गए हैं। पिछले 15 दिन की बात की जाए तो आलू व प्याज के भाव में कुछ गिरावट आई है। गोभी, बैंगन, परवल सहित अन्य सब्जियों की कीमतों में इजाफा हो गया है। महंगी सब्जी होने के चलते लोगों को खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इस समय पुराना आलू थोक में 20 रुपये किलो है।
विज्ञापन
लेकिन यह फुटकर बाजार में आते ही 30 रुपये किलो हो जाता है। यही हाल प्याज का भी है। थोक में 30 रुपये का बिक रहा है। खुले में 40 रुपये प्रति किलो पहुंच रहा है। यानी थोक व फुटकर मंडी में काफी अंतर है। इसके पीछे व्यापारियों का कहना है कि थोक से सामान लेने के बाद उसकी सफाई व छंटाई में काफी सब्जी निकल जाती है। उसके बाद फेरी लगाकर सब्जी बेचते हैं। इसी वजह से रेट का अंतर आ रहा है। आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव कम होने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं।
विज्ञापन
क्यों महंगी हो रही सब्जी
सब्जी व्यापारी उमेश का कहना है कि कुछ दिन पहले कई दिनों तक बरसात हुई थी। इससे खेतों में सब्जी पानी में डूबकर सड़ गई थी। इसकी वजह से आवक कम हो गई है। इसी वजह से सब्जी महंगी बिक रही है। अब जब डीजल के भाव कम पड़े हैं, लेकिन भाड़ा कम नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में जब भाड़ा कम होगा तो सब्जी के रेट में कमी आएगी।
सब्जी थोक रेट फुटकर रेट
आलू 20 30
गोभी 40 50
प्याज 30 40
कद्दू 20 30
बैंगन 30 40
करेला 30 40
लौकी 10 20
... फिर तो सब्जी खरीदना हो जाएगा मुश्किल
गृहिणी पायल ने बताया कि सब्जियों के रेट काफी अधिक हो गए हैं। इतनी महंगी सब्जी खरीदने से घर का बजट बिगड़ रहा है। रेट कम होने की बहुत आवश्यकता है। सुषमा शुक्ला का कहना है कि थोक व फुटकर में काफी अंतर आ रहा है। जिला प्रशासन को सब्जियों के रेट तय करने चाहिए। जिससे कोई अधिक मुनाफाखोरी न कर सकें। जूली ने कहा कि अगर इसी तरह से सब्जियों के रेट बढ़ते चले जाएंगे तो सब्जी खरीदना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को सब्जियों के रेट नियंत्रित करने चाहिए।