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बेमौसम बारिश ने किसानों की तोड़ी कमर

Thu, 22 Apr 2021 11:07 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Apr 2021 11:07 PM IST
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Unseasonal rains broke the back of farmers
औरंगाबाद क्षेत्र के हाथिया गांव में आम के बाग आंधी से गिरे अबिया बीनते बच्चे। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। तेज आंधी के साथ बुधवार रात हुई बारिश किसानों और बागवानों के लिए आफत बनकर आई। कमर तोड़ मेहनत के बाद तैयार की गई गेहूं के साथ आम की फसल को काफी नुकसान हुआ। मड़ाई के लिए खेतों में कटी लगी गेहूं की फसल भीग गई। भीगने से खेतों में खड़ी फसल को काफी नुकसान हुआ है। अब किसानों को कटाई के लिए दो-तीन दिन इंतजार करना पड़ेगा।
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आंधी से बागवानी को भी नुकसान हुआ है। भारी मात्रा में कच्चा आम टूट कर गिर गया है। गेहूं की फसल और बाग की तबाही देख किसानों व बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। मौजूदा रबी सीजन में लाखों किसानों ने 2 लाख 16 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल उगाई है। इसमें करीब 25 फीसदी फसल मड़ाई होकर घरों को पहुंच गई।
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बाकी की फसल या तो मड़ाई के लिए खलियान में लगी या फिर अभी खेतों में खड़ी है। बुधवार रात तेज आंधी के साथ बारिश से खेत और खलिहान तर हो गए। इससे खलियान में लगी और खेतों में खड़ी फसल को बड़ा नुकसान हुआ और किसानों के समक्ष दोहरा संकट खड़ा हो गया। अब किसानों को मड़ाई के खलिहान में लगी फसल को सुखाना पड़ेगा और खेतों में खड़ी पकी पौध को काटने के लिए कुछ दिनों को इंतजार करना पड़ेगा।
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मड़ाई की फसल को सुखाने में किसानों की मेहनत जाया जाने के साथ ही गेहूं के दाने को भी नुकसान होगा। अगर सुखाने के लिए पर्याप्त जगह न मिल पाई तो गेहूं का दाना काला पड़ जाएगा। काले दाने का गेहूं बाजार में बहुत ही कम रेट पर जाता है। बारिश से भीगी जो फसल खेत में खड़ी है। उसकी कटाई में किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। कटाई के दौरान 20 से 25 प्रतिशत बालियां टूटकर गिर जाएंगी।
भीगी कटी फसल की ज्यादा देखभाल करने की जरूरत है। इसे दिन में कम से कम दो बार उलट-पलट जरूर कर दें। इससे गेहूं का दाना काला नहीं पड़ने पाएगा।
- अखिलानंद पांडेय, जिला कृषि अधिकारी
किसान बोले - मेहनत पर फिर गया पानी
आंधी और बारिश से किसान परेशान हो गए हैं। किसानों का कहना है बारिश से मेहनत पर पानी फिर गया है। महोली के गांव पैलाकीसा निवासी किसान रमेशचन्द्र ने बताया कि एक एकड़ की गेहूं की फसल मड़ाई के लिए लगी थी। बेमौसम बारिश से फसल भीग गई है। जिसे दोबारा सुखाने में मेहनत करनी पड़ेगी साथ ही फसल भी खराब होगी।
किसान खंजन कश्यप की बारिश में तीन बीघा फसल भीगकर खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार कर पाए थे। बारिश में फसल भीगने से गेहूं की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। बेनीपुर निवासी सूरज की ढाई बीघा गेहूं की फसल बारिश से भीग गयी है। सूरज कहते हैं कि भीगने के बाद फसल में पहले जैसी बात रही रहती, गेहूं बेस्वाद हो जाता है। महोली क्षेत्र के किसान दुजई, राम सहारे, चुन्नी लाल, उमेश कुमार, गोलू, बाबूराम, संजय आदि हजारों किसा बेमौसम आंधी और बारिश से प्रभावित हुए हैं।
आंधी उड़ा ले गई भूसा
तमाम किसानों ने मड़ाई कर ली थी, लेकिन भूसा नहीं उठा पाए थे। ऐसे किसानों को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा। तेज आंधी में भूसे का ढेर उड़ गया। खलिहान व खेतों में भूसा इस कदर उड़ा कि उसे बटोरने तक की गुंजाइश नहीं रह गई।
परसदा के किसान अनुराग ने बताया कि उनके खेत में पांच बीघा फसल का भूसा लगा था। आंधी में ढेर आधा भी नहीं बचा है। समझ में नहीं आ रहा है कि पूरे साल पशुओं के चारे का इंतजाम कैसे होगा। मछरेटा क्षेत्र के कंदुआपुर के किसान विनीत कहते हैं कि आंधी पानी के बाद खलिहान जा कर देखा तो भूसा का ढेर एक चौथाई भी नहीं बचा था। सब आंधी में उड़ गया था।
बड़ी मात्रा में बर्बाद हो गया आम
आंधी और बारिश से आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। आंधी में भारी मात्रा में कच्चा आम टूट कर गिर गया है। मिश्रिख क्षेत्र की बागों में कम नुकसान हुआ। इस क्षेत्र में हाइपर रोग लगने के चलते बागों में कम फसल आई थी। ऐसे में आंधी में ज्यादा फसल नहीं टूटी। उधर खैराबाद, कमलापुर व महमूदाबाद क्षेत्र की बागों में ज्यादा नुकसान देखा गया।

बड़ी मात्रा में कच्चा आम टूट कर गिर गया। बागवानों ने आम को बीनकर ढेरियां लगाकर उसे क्षेत्रीय बाजारों में बिकने के लिए भेज दिया। बाजारों में कच्चा आम का रेट एकाएक गिर गया। खैराबाद के बागवान संदीप मिश्र ने बताया कि गनीमत रही मजबूत आम नहीं टूटा। नहीं तो बहुत ज्यादा नुकसान हो जाता। लोगों ने गलका, कली आदि बनाने के लिए आम खरीदे। जिले में बड़ी संख्या में बागवान 18500 हेक्टेयर जमीन पर आम की बागवानी करते हैं। इसमें खैराबाद बेल्ट में सर्वाधिक बागवानी होती है। यहां से गैर राज्यों को भी आम की सप्लाई जाती है।
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