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बिना भवन के चल रहे दो हजार आंगनबाड़ी केंद्र

Fri, 08 Oct 2021 11:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 11:48 PM IST
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Two thousand Anganwadi centers do not have buildings
सीतापुर। सरकार की योजना आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की है ताकि निजी स्कूलों के प्ले ग्रुप मॉड्यूल की बराबरी की जा सके। इसके लिए शासन के निर्देश पर जिम्मेदारों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है लेकिन जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति ठीक नहीं है।
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तकरीबन दो हजार केंद्रों के संचालन के लिए भवन ही नहीं हैं। एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं व इतने ही सहायिकाओं के पद रिक्त हैं। इसके साथ ही सुपरवाइजर व सीडीपीओ के स्वीकृत पदों के सापेक्ष कम की तैनाती है। ऐसे में नई व्यवस्था के साकार होने पर सवाल उठ रहे हैं।
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जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, सुपरवाइजर एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी की है जबकि यहां स्वीकृत पदों क सापेक्ष कई पद रिक्त हैं। ऐसे में अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। 20 सीडीपीओ की तैनाती होनी चाहिए जबकि मात्र नौ की ही तैनाती है। इसी तरह सुपरवाइजर के 145 पदों के सापेक्ष मात्र 87 की ही तैनाती है।
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यही हाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का भी है। दोनों के एक-एक हजार से अधिक पद कई साल से रिक्त चल रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति में ग्राम पंचायत की महिला को ही प्राथमिकता दी जाती है। ज्यादातर केंद्रों के पास भौतिक परिवेश नहीं है।
4232 आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहालों को जाड़ा, गर्मी व बारिश से बचाव के लिए भवन होना चाहिए। बावजूद इसके दो हजार से अधिक केंद्र भवन विहीन हैं। करीब चार सौ विभागीय भवन उपलब्ध हो सके हैं। तीन सौ से अधिक भवन विभिन्न कमियों के कारण हैंडओवर नहीं हुए हैं। करीब 18 सौ केंद्र प्राइमरी स्कूलों में संचालित हो रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित करने के लिए संबंधित को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई है। विभाग के डीसी प्रशिक्षण आर्य दीक्षित बताते हैं एक ब्लॉक की कुछ कार्यकर्ताओं को छोड़कर बीते साल सभी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी गई है। सुपरवाइजर व सीडीपीओ को भी प्रशिक्षण दिया गया है।
पहले चरण में प्रत्येक संकुल से एक-एक शिक्षक, कुल 220 शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। ये मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे। दूसरे चरण का प्रशिक्षण होना है। यह संभवत: 18 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। इसके तहत प्रत्येक प्राइमरी स्कूल के कक्षा-एक के टीचर का चयन करके उन्हेें मास्टर ट्रेनर द्वारा ट्रेनिंग दी जाएगी। ये टीचर नोडल के रूप में कार्य करेंगे।
कोविड के कारण कई महीनों से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में लाभार्थियों को उनके घर पर ही सहायिकाओं के माध्यम से पोषाहार दिया जा रहा है। वर्तमान में छह माह से तीन साल के बच्चों की संख्या दो लाख 50 हजार 782 है।
इसी तरह तीन से छह साल के बच्चों की संख्या एक लाख 30 हजार 660 है जबकि गर्भवती व धात्री महिलाओं की संख्या एक लाख तीन हजार 391 है। 16192 अति कुपोषित बच्चे हैं। वर्गवार लाभार्थियों को गेहूं, चावल, दलिया, चने की दाल, सोयाबीन/रिफांइड ऑयल उपलब्ध कराया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित ऐसे बच्चे जो अतिकुपोषित हैं और जिन्हें इलाज की आवश्यकता है, उन्हें सीडीपीओ द्वारा जिला अस्पताल में बने एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया जाता है। वहां 14 दिन तक बच्चे का मुफ्त इलाज किया जाता है। बच्चे के साथ एक केयरटेकर के भी रहने व खाने की व्यवस्था है।
कोविड के कारण बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरतते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कई माह से बंद चल रहा है। प्राइमरी स्कूल संचालित हो गए हैं। इसी क्रम में शासन ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों को खोले जाने का निर्णय लिया है।
यह जानकारी देते हुए डीपीओ राज कपूर ने बताया कि इस संबंध में निदेशक से निर्देश प्राप्त हुए हैं। इसके अनुसार समस्त आयु वर्ग के लाभार्थी सप्ताह में दो दिन (सोमवार, गुरुवार) आंगनबाड़ी केंद्रों पर उपस्थित होंगे। निर्धारित तिथि पर अवकाश होने की दशा में केंद्र अगले कार्य दिवस में खुलेंगे। इस संबंध में सभी सीडीपीओ व सुपरवाइजर को निर्देश दिए गए हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी राज कपूर ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित करने के लिए प्रशिक्षण संबंधी कार्य बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा है। केंद्रों के संचालन के लिए मनरेगा व पंचायतराज के कन्वर्जेंस से बनाए गए चार सौ भवन विभाग को प्राप्त हो गए हैं। तीन सौ से अधिक भवनों के हैंडओवर की कार्यवाही चल रही है। 18 सौ केंद्र प्राइमरी स्कूलों में संचालित किए जा रहे हैं।
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