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दो लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
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नैमिषारण्य में सतुवाही अमावस्या पर चक्रतीर्थ में स्नान करते श्रद्घालु। -संवाद
- फोटो : SITAPUR
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। बैसाख मास की सतुवाही अमावस्या पर चक्रतीर्थ और गोमती नदी के तट पर लाखों श्रद्धालु उमड़े। सुबह तड़के ही श्रद्धालुओं ने स्नान करके मां ललिता देवी मंदिर सहित विभिन्न मठ मंदिरों के दर्शन पूजन किए। सत्तू का दान देकर घर परिवार के कल्याण की कामना की।
नैमिषारण्य में दिनभर श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला लगा रहा। शनिवार रात से ही नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। यह दिनभर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने चक्रकुंड से लेकर आदि गंगा गोमती नदी में स्नान किया। शक्ति मां ललिता देवी मंदिर, सूत गद्दी, देव-देवेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी, देवपुरी आदि मंदिरों में जाकर माथा टेका और पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगीं। शनि अमावस्या होने की वजह से श्रद्धालुओं ने काले तिल और सरसों का तेल और काली वस्तु दान की।
इस पर्व पर सत्तू दान का विशेष महत्व है। जिसके चलते भक्तों ने स्नान दर्शन के बाद परंपरा के अनुसार सेतुआ का दान किया किया। यहां के मंदिरों व मठों में जाकर पूजन-अर्चन करके ब्राम्हणों व कन्याओं को दक्षिणा व सतुवा दान करके पुण्य कमाया। श्रद्धालुओं ने पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध व पितृकर्म भी किए। ऐसे में नैमिष में जौ का सत्तू 60 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिका। चने का सत्तू 80 से 120 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता रहा।
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पवित्र सरोवर में स्नान करके कमाया पुण्य
लहरपुर (सीतापुर)। लहरपुर क्षेत्र के सूर्यकुंड मंदिर पर सेतुवाही शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर स्थित पवित्र सरोवर में स्नान किया। बाबा कामेश्वर नाथ के दर्शन करके पूजा अर्चना की। पवित्र सरोवर में स्नान कर अपने आराध्य देव भगवान शंकर के दर्शन किए। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भारी संख्या में लोगों द्वारा हवन पूजन व मुंडन संस्कार कराया गया।
श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए भंडारों का भी आयोजन किया गया। जिसमें भारी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। यहां पर लगे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं ने खरीदारी की और बच्चों ने मेले में लगे झूलों का आनंद उठाया। मान्यता है कि मंदिर परिसर स्थित पवित्र सरोवर में अमावस्या के अवसर पर डुबकी लगाने से मनुष्य सभी रोगों से मुक्त हो जाता है।
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नैमिषारण्य में दिनभर श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला लगा रहा। शनिवार रात से ही नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। यह दिनभर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने चक्रकुंड से लेकर आदि गंगा गोमती नदी में स्नान किया। शक्ति मां ललिता देवी मंदिर, सूत गद्दी, देव-देवेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी, देवपुरी आदि मंदिरों में जाकर माथा टेका और पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगीं। शनि अमावस्या होने की वजह से श्रद्धालुओं ने काले तिल और सरसों का तेल और काली वस्तु दान की।
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इस पर्व पर सत्तू दान का विशेष महत्व है। जिसके चलते भक्तों ने स्नान दर्शन के बाद परंपरा के अनुसार सेतुआ का दान किया किया। यहां के मंदिरों व मठों में जाकर पूजन-अर्चन करके ब्राम्हणों व कन्याओं को दक्षिणा व सतुवा दान करके पुण्य कमाया। श्रद्धालुओं ने पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध व पितृकर्म भी किए। ऐसे में नैमिष में जौ का सत्तू 60 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिका। चने का सत्तू 80 से 120 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता रहा।
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पवित्र सरोवर में स्नान करके कमाया पुण्य
लहरपुर (सीतापुर)। लहरपुर क्षेत्र के सूर्यकुंड मंदिर पर सेतुवाही शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर स्थित पवित्र सरोवर में स्नान किया। बाबा कामेश्वर नाथ के दर्शन करके पूजा अर्चना की। पवित्र सरोवर में स्नान कर अपने आराध्य देव भगवान शंकर के दर्शन किए। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भारी संख्या में लोगों द्वारा हवन पूजन व मुंडन संस्कार कराया गया।
श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए भंडारों का भी आयोजन किया गया। जिसमें भारी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। यहां पर लगे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं ने खरीदारी की और बच्चों ने मेले में लगे झूलों का आनंद उठाया। मान्यता है कि मंदिर परिसर स्थित पवित्र सरोवर में अमावस्या के अवसर पर डुबकी लगाने से मनुष्य सभी रोगों से मुक्त हो जाता है।